पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद माना है कि उन्हें देश चलाने के लिए कर्ज का सहारा लेना पड़ता है और ऐसा करते हुए दुनिया के सामने उनका सिर शर्म से झुक जाता है. शरीफ का ये कबूलनामा शुक्रवार, 30 जनवरी को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान आया है, जहां वह पाकिस्तान के टॉप एक्सपोर्टर्स को संबोधित कर रहे थे. इंडिया टुडे से जुड़े प्रणय उपाध्याय की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम में बोलते हुए शहबाज शरीफ भावुक हो गए. उन्होंने कहा,
पाकिस्तान की कंगाली पर रो पड़े शहबाज़ शरीफ, बोले, 'मुनीर के साथ कर्ज लेने जाता हूं, शर्म आती है'
प्रधानमंत्री शरीफ का यह कबूलनामा शुक्रवार, 30 जनवरी को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से आया. जहां वह पाकिस्तान के टॉप एक्सपोर्टर्स के एक प्रोग्राम में शामिल होने पहुंचे थे.


मैं आपको कैसे बताऊं कि हमने किन-किन दोस्त मुल्कों के पास जाकर कर्ज की मांग की. उन देशों ने हमें मायूस तो नहीं किया लेकिन जो कर्ज लेने जाता है, उसका सिर झुका रहता है.
शरीफ ने अपने संबोधन में साफ लफ्जों में कहा कि जब कोई देश किसी दूसरे देश से कर्ज लेने जाता है तो उसे अपने आत्मसम्मान के साथ समझौता करना पड़ता है. साथ ही कर्ज देने वालों की ऐसी शर्तों को मानना पड़ता है, जिनका बोझ उठाना नामुमकिन होता है. प्रधानमंत्री शरीफ ने भाषण में यह भी कबूल किया उनके साथ पाकिस्तानी सेना के फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर ने भी कई देशों से कर्ज की गुहार लगाई है.
उन्होंने आगे बताया कि वे तमाम अधिकारियों के साथ कई देशों में गए. जहां उन्होंने International Monetary Fund (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) प्रोग्राम को बचाने के लिए बिलियन और डॉलर्स में मदद मांगी.
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बता दें कि मौजूदा समय में भी पाकिस्तान की आर्थिक व्यवस्था की हालत खराब है. इसकी वजह से पाकिस्तानी जनता पर टैक्स और महंगाई की मार पड़ती रहती है. बता दें कि ऑपरेशन सिंदुर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान IMF ने पाकिस्तान को कर्ज दिया था. आंकड़ों को देखें, तो दिसंबर, 2025 तक पाकिस्तान पर कुल विदेशी कर्ज करीब 52.366 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है.
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