सवाल-1- क्या होता है संयुक्त राष्ट्र संघ? संयुक्त राष्ट्र संघ एक ग्लोबल संस्था है. ये दुनियाभर के देशों से मिलकर बनी है. शुरुआत में इसके सदस्य केवल 51 देश थे. आज कोई 193 देश इसके सदस्य बन चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन दूसरे विश्व युद्ध के बाद अक्टूबर, 1945 किया गया था. अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्य देश हैं. दुनिया के 10 दूसरे देशों को सुरक्षा परिषद में अस्थाई सदस्य के तौर पर शामिल किया जाता है. किसी अहम मुद्दे पर फैसला लेते समय स्थाई सदस्यों का एक राय होना जरूरी होता है. अगर एक भी सदस्य देश विरोध करता है, तो वो प्रस्ताव पास नहीं हो पाता है. चीन ने मसूद अजहर के मामले में इसी का फायदा उठाया है.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से मसूद अजहर को बैन कराने के लिए कूटनीतिक पहल की गई. पर कामयाबी नहींं मिल सकी. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
सवाल-2- क्या मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र संघ ही बैन लगाने वाला था? इसका जवाब है नहीं. मसूद अजहर पर बैन लगाने का फैसला संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के तहत गठित एक कमेटी को करना था. इस कमेटी को ISIL और अलकायदा प्रतिबंध समिति या 1267 प्रतिबंध समिति के नाम से जाना जाता है.
सवाल-3- ISIL और अलकायदा का इस कमेटी से क्या लेना देना? असल में ISIL का मतलब है इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड लेवांट. ये वही संगठन है, जिसे पूरी दुनिया ISIS यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया के नाम से जानती है. दोनों संगठन एक ही हैं. और ईराक और सीरिया में बड़े पैमाने पर हिंसा और आतंक फैलाने का काम कर रहे हैं. अलकायदा खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन का संगठन है. ISIL और अलकायदा प्रतिबंध समिति पर संयुक्त राष्ट्र के तय मानकों का पालन कराने का जिम्मा है. कमेटी देखती है कि कोई संगठन या शख्स आतंक से जुड़े मानकों का पालन कर रहा है या नहीं.

ISIS यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ ईराक एंड सीरिया ने कई देशों को हलकान कर रखा है. फाइल फोटो.
सवाल-4- प्रतिबंध समिति के और कौन-कौन से काम हैं? ISIL और अलकायदा प्रतिबंध समिति या 1267 बैन कमेटी दुनिया में आतंक से जुड़े लोगों और संगठनों के बारे में सूचनाएं हासिल करती है. और उनको बैन या छूट देने पर विचार करती है. ये कमेटी संबंधित संगठन या शख्स को हथियारों के आयात पर रोक, यात्रा पर रोक और उसकी प्रॉपर्टी आदि जब्त करने के फैसले लेती है. इन फैसलों की हर 18 महीने में समीक्षा भी होती है. ये कमेटी अब तक 257 लोगों और 81 संगठनों पर बैन लगा चुकी है.
सवाल-5- प्रतिबंध समिति मसूद अजहर पर बैन क्यों नहीं लगा पाई? मसूद अजहर को बैन का करने का प्रस्ताव फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका 27 फरवरी को लाए थे. समिति के सदस्यों को इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए 10 दिन का वक्त था. ये समयसीमा 13-14 मार्च की रात 12.30 बजे खत्म हो रही थी. इससे पहले ही चीन ने प्रस्ताव को होल्ड कर दिया. चीन ने प्रस्ताव की समीक्षा और कुछ टाइम और देने की मांग की है. ये कमेटी सभी सदस्य देशों की सहमति से फैसले लेती है. चीन सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य है. ऐसे में उसकी आपत्ति पर कमेटी ने फैसले को 'टेक्निकल होल्ड' पर रखा है. मतलब ये कि ये मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है.
सवाल-6- अब जान लेते हैं चीन ने आखिर ऐसा क्यों किया? असल में चीन इस वक्त पाकिस्तान का सबसे बड़ा दोस्त है. या यूं कहें कि पाकिस्तान और चीन भाई-भाई सरीखे हो चुके हैं. इसके पीछे है पाकिस्तान की गरीबी और चीन का वहां किया जा रहा भारी निवेश. चीन अपने शहर काश्गर से लेकर पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह तक आर्थिक गलियारा बना रहा है. इसे CPEC यानी चाइना पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर का नाम दिया गया है. ये एक ऐसी सड़क है, जिसके दोनों ओर चीन पाकिस्तान के अंदर बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है. CPEC प्रोजेक्ट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, खैबर पख्तूनख्वाह और बलूचिस्तान जैसे कई संवेदनशील इलाकों से गुजरता है, जहां इसका विरोध होता है. कहा जाता है कि मसूद अजहर की चीन से करीबी की वजह से आतंकी संगठन CPEC के निर्माण में रोड़ा नहीं अटकाते. सीपैक के तहत चीन पाकिस्तान में करीब 7 लाख करोड़ रुपए का निवेश कर रहा है.
सवाल-7- क्या कुछ और वजहें भी हैं चीन की जो पाकिस्तान का साथ देता है? चीन तीन और वजहों से पाकिस्तान का साथ देता है.
पहली, चीन भारत को अपना आर्थिक प्रतिद्वंदी मानता है. चीन चाहता है कि भारत बाकी दुनिया की ओर न देखकर घरेलू मोर्चे पर उलझा रहे. अगर चीन मसूद अजहर के बैन का समर्थन करता तो भारत दुनिया में मजबूत देश के तौर पर दिखाई देता. दूसरी, चीन अपने यहां के उइगर मुसलमानों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हुए है. इस पूरे मामले में पाकिस्तान उसका साथ देता है. तीसरी वजह हैं दलाई लामा. चीन दलाई लामा के मामले में भारत की आलोचना करता रहा है. तिब्बती धर्मगुरु को भारत ने शरण दे रखी है. चीन को ये कभी नहीं सुहाया.
सवाल-8- कितनी बार रोड़े अटका चुका है चीन? तो इसका जवाब है अब तक तीन बार. भारत ने साल 2009 मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र संघ में दिया था. साल 2016 में भारत ने एक बार फिर अमेरिका, यूके और फ्रांस यानी पी-3 देशों के साथ मिलकर मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया. प्रस्ताव में कहा गया कि जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमले का मास्टरमाइंड अजहर ही था. पर चीन ने इस पर रोड़ा लगा दिया. साल 2017 में पी-3 देशों ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में मसूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए प्रस्ताव दिया. चीन ने इसे फिर रोका. अब ये चौथी बार चीन ने रोक लगाई है.

मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का मुखिया है.
सवाल-9- रोक लग जाती तो क्या होता? सवाल उठता है कि अगर मसूद अजहर ग्लोबल आतंकवादी घोषित हो जाता तो इससे उसकी सेहत पर क्या असर पड़ता. वैश्विक आतंकी घोषित हो जाने के बाद मसूद अजहर पर ये 6 प्रतिबंध लग जाते.
- दुनियाभर के देशों में मसूद अजहर की एंट्री पर बैन लग जाता.
- मसूद किसी भी देश में आर्थिक गतिविधियां नहीं चला पाता.
- संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को मसूद के बैंक अकाउंट्स और प्रॉपर्टी को सीज करना पड़ता.
- मसूद से संबंधित व्यक्तियों या उसकी संस्थाओं को कोई मदद नहीं मिलती.
- पाकिस्तान को भी मसूद अजहर के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने पड़ते.
- बैन के बाद पाकिस्तान को मसूद अजहर के टेरर कैंप और उसके मदरसों को भी बंद करना पड़ता.
डूब जाता चीन का निवेश
और इस सबसे बढ़कर. अगर मसूद अजहर का नाम UNSC की ग्लोबल आतंकवादियों वाली लिस्ट में शामिल हो जाता तो पाकिस्तान के FATF यानी फाइनेंशियल एक्शन टाक्स फोर्स की ब्लैक लिस्ट में शामिल होने के आसार बढ़ जाते. FATF की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान पहले से ही है. FATF में ब्लैकलिस्ट होने के बाद पाकिस्तान पर आर्थिक प्रतिबंध लग जाएंगे, इससे चीन का पाकिस्तान में करोड़ों रुपए का निवेश डूब सकता है. एफएटीएफ एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, ये कमजोर और आतंक प्रभावित देशों के लिए कुछ तय मानकों को देखता है. इसकी ओर से दी जाने वाली रैंकिंग से संबंधित देशों को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संगठनों से वित्तीय मदद मिलने में आसानी या कठिनाई हो जाती है.
वीडियोः अर्थात: लोकतंत्र में जनता के सवालों के जवाब तो देने ही होंगे सरकार को
























