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इंजीनियर बन सेट थी लाइफ, लेकिन फिर चुनी फौज, शहीद कैप्टन बृजेश की कहानी आंसू ला देगी!

Captain Brijesh Thapa की मां ने बताया कि उन्होंने 6 साल पहले एक आर्मी जैकेट खरीदी थी और कहा था कि एक साल के अंदर उनके पास भी आर्मी की मूल जैकेट होगी.

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2019 में बृजेश थापा सेना में शामिल हुए थे. (फ़ोटो - PTI)

जम्मू-कश्मीर के डोडा ज़िले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ (Doda Terror Attack) में जिन 4 जवानों ने शहादत दी, उनमें से एक कैप्टन बृजेश थापा (Brijesh Thapa) भी थे. कैप्टन की मौत के बाद उनके पिता कर्नल भुवनेश के. थापा और मां नीलिमा थापा ने उन पर गर्व जताया. उन्होंने कहा कि इतने जोखिम भरे ऑपरेशन में बेटे का डटकर खड़े रहना साहसिक है. अपने बेटे को याद करते हुए बृजेश के पिता ने कहा कि वो बचपन से सेना में जाना चाहते थे. बृजेश बचपन में अपने पिता के सेना वाले कपड़े पहनकर घूमते थे. इंजीनियरिंग करने के बाद भी उन्होंने सेना में जाना चुना. कर्नल भुवनेश के. थापा ने बताया कि जब बृजेश का पार्थिव शरीर घर वापस आएगा, तो वो एक सैनिक के रूप में अपने बेटे को 'सलाम' करेंगे.

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कर्नल भुवनेश के. थापा 34 सालों तक सेना में सेवा देने के बाद 2014 में रिटायर हुए थे. फिलहाल वो दार्जिलिंग के लेबोंग में पूर्व-सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS) ऑफ़िस के प्रभारी अधिकारी (officer-in-charge) के रूप में काम कर रहे हैं.

Brijesh Thapa की कहानी

बृजेश की इंजीनियरिंग की पढ़ाई से सैनिक बनने की कहानी दिलचस्प है. बृजेश थापा का जन्म 15 जनवरी 1997 में हुआ. संयोग देखिए कि इसी दिन को सेना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. जालंधर के सैन्य अस्पताल में जन्मे बृजेश को हमेशा से सेना में जाने का शौक था. उन्होंने मुंबई के एक आर्मी स्कूल में पढ़ाई पूरी की. बाद में मुंबई के ही एक कॉलेज से बी.टेक. की पढ़ाई पूरी की.

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इसके बाद बृजेश ने सेना में जाने का मन बनाया. शॉर्ट सर्विस कमीशन के ज़रिए सेना में भर्ती हुए. एक ही बार में उन्होंने परीक्षा पास की. 2018 में उनकी ट्रेनिंग शुरू हुई और 2019 में वो सेना में शामिल हो गए. बृजेश के परिवार में उनके माता-पिता के साथ एक बड़ी बहन भी हैं. बृजेश की बहन निखिता थापा ऑस्ट्रेलिया में संगीत की पढ़ाई कर रही हैं. वो भी 17 जुलाई को घर पहुंचेंगी, जब बृजेश के पार्थिव शरीर को दार्जिलिंग लाया जाएगा.

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में बृजेश की मां नीलिमा थापा ने अपने बेटे को याद करते हुए बताया कि आख़िरी बार उनकी बात रविवार, 14 जुलाई को हुई थी. तब बृजेश ने बताया था कि उनकी टुकड़ी 15 जुलाई को ऑपरेशन एरिया में वापस आ जाएगी. वो इसी महीने और उसके बाद नवंबर में घर आने की प्लानिंग कर रहे थे. इससे पहले वो मार्च में ही घर पहुंचे थे, तब उन्होंने घर में लंबा वक़्त गुजारा था. मां नीलिमा ने बताया कि बृजेश को गिटार और ड्रम बजाना बहुत पसंद था.

कर्नल के. थापा ने जानकारी दी कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर 16 जुलाई की रात सिलीगुड़ी पहुंचा और 17 जुलाई की सुबह घर पहुंचने वाला है. बृजेश का परिवार दार्जिलिंग शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर बारा गिंग में रहता है. टेलीग्राफ की ख़बर के मुताबिक़, बृजेश को याद करते हुए उनकी मां नीलिमा जैकेट से जुड़ा एक क़िस्सा सुनाती हैं. नीलिमा ने कहा कि छह साल पहले परिवार के साथ लद्दाख यात्रा के दौरान 21 साल के बृजेश थापा ने एक आर्मी जैकेट खरीदी थी और बाद में सोशल मीडिया पर बताया था कि एक साल के अंदर इसकी मूल जैकेट उनकी हो जाएगी. 

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बृजेश के माता-पिता का कहना है कि ये एक सैन्य अभियान है और इस तरह के अभियान में हमेशा जोखिम रहता है. हमारे बेटे ने इस जोखिम भरे ऑपरेशन को बखूबी अंजाम दिया और वो भी पूरी ईमानदारी से. हमें दुख है कि अब वो हमारे पास वापस नहीं आएगा. हर कोई देश की सेवा करने के लिए भाग्यशाली नहीं होता.

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हमले के बारे में क्या पता चला?

अब तक की जानकारी के मुताबिक़, राष्ट्रीय राइफल और जम्मू कश्मीर पुलिस डोडा जिले के धारी गोटे उरारबागी में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे. ये ऑपरेशन 15 जुलाई की शाम से चल रहा थी. तभी आतंकवादियों ने फायरिंग की. सेना के जवानों की जवाबी फायरिंग के बाद आतंकी भागने लगे. जवान पीछा करते रहे थे, लेकिन घना जंगल होने के कारण आतंकी सुरक्षा बलों को चकमा देते रहे. बाद में फिर फ़ायरिंग की गई, जिसमें कैप्टन बृजेश समेत 4 जवान शहीद हो गए. इनमें कैप्टन बृजेश थापा, नायक डी राजेश, सिपाही बिजेंद्र और सिपाही अजय नरुका शामिल हैं.

इस हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूह जैश-ए-मोहम्मद के छद्म समूह (शैडो ग्रुप) 'कश्मीर टाइगर्स' ने ली है. 'कश्मीर टाइगर्स' वही ग्रुप है, जिसने 9 जुलाई को कठुआ में सेना के काफिले पर हमले की जिम्मेदारी ली थी. पिछले तीन हफ्तों में डोडा के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच ये तीसरी बड़ी मुठभेड़ थी. मामले में पुलिस का कहना है कि तलाशी अभियान अभी भी जारी है.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: डोडा में चार जवानों की शहादत का जिम्मेदार कौन?

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