महिला पहलवानों (Female Wrestlers) के आरोपों को लेकर बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan Sharan Singh) के वकील ने कोर्ट में कई दलीलें दीं. कहा कि बिना यौन इरादे के किसी महिला को छूना आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं है. दावा किया कि कोच का अपने स्टूडेंट को गले लगाना नॉर्मल बात है.
"कोच खुशी से स्टूडेंट को गले लगाए तो गलत क्या"- बृजभूषण के वकील ने और क्या-क्या कहा?
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि महिला पहलवानों से जुड़े कई मामले दिल्ली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर यानी दूसरे राज्यों के थे और उनका मुकदमा यहां नहीं चलाया जा सकता.


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 9 अगस्त को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई. अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने आरोपी बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर दलीलें सुनीं.
इस दौरान बृजभूषण की तरफ से पेश हुए एडवोकेट राजीव मोहन ने कोर्ट में कहा,
कुश्ती ऐसा स्पोर्ट है जहां ज्यादातर कोच पुरुष हैं. यहां महिला कोच कम ही हैं. ऐसा नहीं है कि महिला खिलाड़ियों के लिए केवल महिला कोच ही होंगी. देश के लिए कुछ करने की चिंता में या खुशी से कोई मेल कोच अपने स्टूडेंट को गले लगाता है तो इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए. हम ये टीवी पर भी देखते हैं. अगर कोई विंबलडन मैच होता है तो ऐसा नहीं होता कि केवल महिला कोच ही महिला खिलाड़ियों को गले लगाएंगी.
राजीव मोहन ने कहा कि महिला पहलवानों से जुड़े कई मामले दिल्ली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर यानी दूसरे राज्यों के थे और उनका मुकदमा यहां नहीं चलाया जा सकता. आगे बताया कि भारत के बाहर हुए मामलों की सुनवाई केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना देश के कोर्ट में नहीं की जा सकती. मामले में आगे की सुनवाई 10 अगस्त को होनी है.
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इससे पहले, मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने 20 जुलाई को दोनों आरोपियों को कुछ शर्तों के साथ 25 हजार रुपये के बॉन्ड पर जमानत दे दी थी. उनसे कहा गया था कि अदालत की पूर्व अनुमति के बिना वो देश नहीं छोड़ेंगे.
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