हमने 'तारे ज़मीन पर' पिक्चर में आमिर खान को देखा था, सोचा था काश सारे स्कूलों में कम से कम एक आमिर जैसा टीचर हो. भले ही ड्राइंग जैसे ग्रेड सब्जेक्ट का हो, जिसकी हफ्ते में एक ही क्लास होती थी. लेकिन हमारे टीचर कैसे होते थे, उसके बारे में क्या ही बात करें. भैया मेरे चाचा के स्कूल में तो एक ऐसे टीचर थे, जब वो आते थे, लड़के नीचे वाले फ्लोर पर कूद जाया करते थे. नंबर कम आए तो मिलती थी पनिशमेंट सीट. और जिन्होंने संटियां खाई हैं, उनका जी तो बदले की आग में आज तक कुलबुलाता रहता है. लेकिन इंग्लैंड के लैंसबरी स्कूल की ये वाली मैडम इतनी प्यारी हैं कि इनकी क्लास का एक बच्चा कम मार्क्स लाया, तो उसको इन्होंने लिखी एक प्यारी सी चिट्ठी.

बच्चे को ऑटिज्म है. वही वाली बीमारी जो 'माय नेम इज खान' में शाहरुख़ को थी. हालांकि बीमारी नहीं कहना चाहिए इसे. ये तो बस एक मेंटल और फिजिकल स्टेट है. तो बेन नाम का ये 11 साल का ऑटिस्टिक बच्चा SAT के एग्जाम में बैठा. और उतना अच्छा रिजल्ट नहीं ला पाया जितना उसने सोचा था. तो मैडम रूथ क्लार्कसन ने बच्चे को ख़त लिखकर बताया कि वो उदास न हो. उसके पास ऐसे कई टैलेंट हैं, जो ये रिजल्ट माप नहीं सकता. जैसे खेलों, म्यूजिक में उसका टैलेंट. या फिर स्वतंत्र और दयालु होने की उसकी भावनाएं. रूथ ने लिखा कि ये रिजल्ट उसके जीवन का एक छोटा सा हिस्सा भर है. बहुत छोटा. चिट्ठी पढ़ने के बाद बेन की मां गेल की आंखों में आंसू आ गए. उन्होंने इस चिट्ठी को ट्विटर पर पोस्ट किया.
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