नोट: इस खबर को पढ़ने से पहले अपनी आंखें बंद करें और उस दिन को याद करें जब होमवर्क पूरा न होने की वजह से आप क्लास में पेट दर्द होने का नाटक करते थे. ज़रा इन्टरनेट ब्राउज़र पर ब्रांडी ली वीवर का नाम सर्च कीजिये. आप पहुचेंगे 2015 में सेंटर काउंटी गैजेट में छपे एक आर्टिकल तक. जो बताता है कि कैसे पेन्सिल्वेनिया में रहने वाली ब्रांडी ली वीवर कैंसर से जूझते हुए मिस पेन्सिल्वेनिया यूएस इंटरनेशनल का खिताब जीत चुकी थी. उस कैंसर से जूझती लड़की को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. वजह? वजह है उसकी बीमारी. कैंसर. नकली कैंसर.

वो लड़की पिछले दो सालों से कैंसर की बीमारी होने का नाटक कर रही थी. बाकायदा कीमोथेरपी के लिए जाती थी और थेरपी की वजह से हुए साइड इफेक्ट्स को दिखाने के लिए अपना सर भी मुंडवा लेती थी. ऐसा करते हुए उसे दो साल हो गए थे और किसी को भी उस पर शक भी नहीं हुआ था. लेकिन जब किसी ने गौर किया और देखा कि उसके सर पर थोड़े-थोड़े बाल आते हैं और फिर गायब हो जाते हैं तो उसे शक हुआ. पुलिस को खबर दी गयी और उसे पकड़ा गया. उसे सिर्फ कैंसर की बीमारी के नाटक के लिए नहीं पकड़ा गया. बल्कि हुआ ये कि उस लड़की ने अपने दोस्तों की मदद से अपने कैंसर के इलाज के लिए हजारों डॉलर का 'चंदा' इकठ्ठा कर लिया. और उस चंदे को अपने बैंक अकाउंट में इकठ्ठा करती रही. मज़े की बात तो ये है कि उसके दोस्तों को भी नहीं मालूम था. और सिर्फ दोस्तों को ही नहीं, उसकी बहन को भी ये बात नहीं मालूम थी. वो अपनी बहन के साथ तमाम अस्पताल में अपना इलाज करवाने के लिए घूम चुकी थी. वो अपनी बहन से अस्पताल के बाहर ही रहने को कहती. कहती अन्दर कीमो-ड्रिप चढ़वाने जा रही है. 6 से 8 घंटे बाद लौटती. और ऐसा दो सालों तक चलता ही रहा. ब्रांडी ली ने सबसे पहले 2013 में अपने घरवालों और दोस्तों को ये पहली बार बताया कि उसे कैंसर डायग्नोस हुआ है. शुरुआत में ये खबर सिर्फ उसके क्लोज़ लोगों तक ही सीमित थी लेकिन बाद में ये फैलने लगी. और अब शुरू हुआ लड़की का असली खेला. उसने फेसबुक और बाकी सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाया. उसने अपनी कहानी इस तरह से लिखनी शुरू करी कि लोगों को ये विश्वास हो चला कि वो सचमुच कैंसर से जूझ रही है. लोग उससे प्रभावित होने लगे. इंस्पिरेशन टाइप एकदम. 12 अप्रैल 2014 को उसने अपने कैंसर का दूसरा अध्याय शुरू किया. कहती है कि कैंसर चला गया था लेकिन फिर से आ गया है. इसके बाद उसने पेन स्टेट स्टूडेंट रन रिले फॉर लाइफ में हिस्सा लिया. वहां इवेंट की ऑर्गनाईज़र ने ब्रांडी ली के बारे में बोलते हुए कहा, "कैंसर सोता नहीं है. और ये हमारा तरीका है उन्हें याद रखने का जो कैंसर से जूझ रहे हैं या उसकी वजह से वो आज ज़िन्दा नहीं हैं." जिस वक़्त ये बात कही जा रही थी, ब्रांडी ली वहां मौजूद हर शख्स के इमोशन्स के साथ एक खिलवाड़ कर रही थी. उसके दोस्तों ने, घर वालों ने बहुत से फंडरेज़र ऑर्गनाइज़ करवाए जिससे कि उसके कैंसर का इलाज करवाया जा सके. उसके दोस्तों ने तो लोगों से घर-घर जाकर 'चंदा' इकठ्ठा किया.

टेलिग्राफ़ में छपी खबर के अनुसार ब्रांडी ली ने इतने वक़्त में कुल 30 हज़ार डॉलर इकट्ठे कर लिए थे. उसने कोर्ट में जज के सामने अपना ज़ुर्म कुबूला और कहा कि उसने जो कुछ भी किया, लोगों का अटेंशन पाने के लिए किया. मंगलवार को कोर्ट ने उसे झांसा देकर पैसे लेने और चोरी के आरोप में 2 से 4 साल की जेल की सज़ा सुनाई. वैसे, अब उसके सारे सोशल मीडिया अकाउंट डीऐक्टिवेटेड चल रहे हैं.