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आजम खान की विधायकी गई, लेकिन 2 साल की सजा पाए BJP MLA विक्रम सैनी की कैसे नहीं गई?

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा - "मुझे जानकारी नहीं दी गई"

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आजम खान और विक्रम सैनी (फोटो-आजतक)

हाल ही में आजम खान को हेट स्पीच मामले में तीन साल के लिए जेल की सजा हुई है (MLA Azam Khan Hate Speech Jail). इसके साथ ही उनकी विधायकी भी जा चुकी है. दरअसल ये रूल है कि दो साल की सजा होने पर किसी भी जनप्रतिनिधि की सदस्यता खत्म मानी जाएगी. अब इस फैसले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. सवाल उठ रहे हैं कि दो साल की जेल के बाद खतौली से बीजेपी विधायक विक्रम सैनी की विधायकी क्यों नहीं खत्म की गई? 

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मामले पर RLD प्रमुख जयंत चौधरी ने विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी में सवाल उठाए हैं कि जितनी तेजी से सतीश महाना ने आजम खान की विधायकी ली, उतनी तेजी विक्रम सैनी की विधायकी खत्म करने में क्यों नहीं दिखाई गई. मामले को पूरी तरह समझने के लिए जेल की सजा के बाद विधायकी खत्म करने की पूरी प्रक्रिया को जानना जरूरी है. बता दें कि साल 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे के मामले में विक्रम सैनी को कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई थी.

क्या है प्रक्रिया?

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि दो साल की सजा मिलने पर किसी भी जनप्रतिनिधि की सदस्यता अपने आप खत्म मानी जाएगी. सजा मिलने की सूचना नगर प्रशासन द्वारा विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय को दी जाती है. इस केस में विधानसभा अध्यक्ष हैं सतीश माहाना. ये जानकारी मिलने पर विधानसभा अध्यक्ष ऐक्शन लेते हैं. तुरंत उस विधायक की सीट खाली होने अधिसूचना जारी कर देते हैं.

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जैसे ही आजम खान को हेट स्पीच केस में 3 साल के कारावास की सजा का ऐलान हुआ, रामपुर जिला अधिकारी ने इसकी सूचना राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय को दी. फिर जानकारी विधानसभा कार्यालय को भेजी गई और तुरंत विधानसभा स्पीकर ने आजम खान की सीट के खाली होने की घोषणा कर दी.

लेकिन अभी तक विक्रम सैनी के साथ नहीं ऐसा नहीं हुआ है. इसको लेकर आजतक से जुड़े पत्रकार कुमार अभिषेक से विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बात की. उन्होंने कहा कि विक्रम सैनी वाले मामले में उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. ना तो जिला अधिकारी के तरफ से, ना ही राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से. कोई चिट्ठी नहीं मिली. सतीश महाना ने आजतक को बताया,

“जब तक किसी भी जनप्रतिनिधि की सजा की कोई आधिकारिक सूचना मेरे दफ्तर को नहीं दी जाती, तब तक मैं किसी माननीय सदस्य के सीट के खाली होने की घोषणा नहीं कर सकता. विक्रम सैनी के अदालती फैसले की कोई सूचना विधानसभा कार्यालय को आधिकारिक तौर पर नहीं भेजी गई है.”

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सतीश महाना ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में मामले को देखने के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा.

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