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पुलिसकर्मियों को सरकार का अल्टीमेटम, 'तोंद कम करो या रिटायर हो जाओ'

सभी पुलिसकर्मियों का BMI रिकॉर्ड होगा.

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असम में पुलिस वालों को मिला वजन कम करने का अल्टीमेटम. (फोटो- ट्विटर/@assampolice)

असम पुलिस में काम करने वाले अनफिट कर्मियों को वजन कम कर फिट बनने का अल्टीमेटम मिला है. डेडलाइन है नवंबर तक की. अगर तब तक वजन कम नहीं हुआ तो उनसे वॉलंटरी रिटायरमेंट लेने के लिए कह दिया जाएगा. ये अल्टीमेटम असम के DGP जीपी सिंह ने दिया है. उन्होंने बताया कि अब सभी पुलिसकर्मियों के BMI (Body Mass Index) का पेशेवर तरीके से रिकॉर्ड रखा जाएगा.

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BMI का मतलब होता है बॉडी मास इंडेक्स. इसमें व्यक्ति की लंबाई के हिसाब से उसके वजन का अनुपात निकाला जाता है. BMI से तय होता है कि कोई व्यक्ति अपनी हाईट के मुताबिक फिट है या नहीं. DGP जीपी सिंह ने अपने एक ट्वीट में बताया है कि ये फैसला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के निर्देश पर लिया गया है. DGP ने ट्वीट में लिखा,

IPS/APS अधिकारियों, सभी DEF/Bn/संगठनों समेत असम पुलिस के सभी कर्मियों के BMI की पेशेवर रिकॉर्डिंग करने का फैसला लिया गया है. हम 15 अगस्त तक सभी पुलिसकर्मियों को तीन महीने का समय देने की योजना बना रहे हैं. फिर अगले 15 दिनों में BMI मूल्यांकन शुरू करेंगे. वे सभी जो मोटे (BMI 30+) की श्रेणी में होंगे उन्हें वजन कम करने के लिए तीन और महीने दिए जाएंगे. उसके बाद भी फिट नहीं हुए तो उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (Voluntary Retirement Scheme यानी VRS) का विकल्प दिया जाएगा. 

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ट्वीट में DGP ने बताया कि 16 अगस्त को BMI रिकॉर्ड करवाने वाले वे पहले व्यक्ति होंगे. इस पूरी प्रक्रिया में उन कर्मियों को छूट मिलेगी जिन्हें हाइपोथायरायडिज्म जैसी कोई मेडिकल कंडीशन हो. सोशल मीडिया पर पुलिस की इस पहल की खूब तारीफ हो रही है. 

बीबीसी ने कुछ साल पहले पुलिस वालों की बढ़ती तोंद पर एक रिपोर्ट छापी थी. इसमें कुछ अनफिट पुलिसकर्मियों ने बताया था कि भर्ती के बाद कसरत करने की उनकी आदत छूट गई, इसलिए वे मोटे हो गए. कुछ ने बताया कि मोबाइल फोन और आधुनिक तकनीक ने उनकी भागदौड़ घटा दी है जिसका असर उनकी सेहत पर दिखता है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, DGP असम ने पिछले हफ्ते ही उन पुलिसकर्मियों की लिस्ट बनाई थी जो शराब पीने के आदी हैं या मोटे हैं. खबर है कि इनमें से जो पुलिसकर्मी ड्यूटी करने के काबिल नहीं पाए जाएंगे उन्हें ऑब्जर्वेशन के बाद VRS की पेशकश की जाएगी. पूरे प्रोसेस के लिए बटालियन और जिला समितियां बनाई गई हैं. इनके हेड डिप्टी कमांडेंट या एडिशनल एसपी-रैंक के अधिकारी होंगे.

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