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हाउस हेल्प ने मेजर पर लगाया रेप का आरोप, 7 साल चला केस, अब असलियत कुछ और ही निकली

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने महिला पर झूठा केस दर्ज करने और झूठे बयान देने के आरोप में केस दर्ज करने को कहा है.

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सांकेतिक तस्वीर. (PTI)

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में, भारतीय सेना के एक मेजर को रेप और शोषण के केस में बरी कर दिया. ये आरोप सेनाधिकारी की घर की सहायिका द्वारा लगाए गए थे, जो सर्वेन्ट क्वॉर्टर को छोड़ने के लिए कहने से नाराज़ थीं. कोर्ट में ये बात साबित हुई कि पूरा झूठा केस महिला ने अपने चाचा के साथ मिलकर पैसे ऐंठने के लिए रचा था.

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ये मुकदमा पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा था. सत्र न्यायाधीश पवन कुमार ने अपने फैसले में सख्त लहज़े का इस्तेमाल करते हुए मेजर पर महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठा, निराधार, गुप्त उद्देश्यों से प्रेरित और विसंगतियों से भरा बताया.

इतना ही नहीं, अदालत ने नज़ीर पेश करते हुए न केवल युवा अधिकारी को बरी किया, बल्कि महिला के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने और झूठे बयान देने के लिए आपराधिक केस दर्ज करने को कहा. महिला अगर दोषी पाई गई तो उसे सात साल तक की कैद हो सकती है.

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यह मामला जुलाई 2018 में शुरू हुआ था. जब मेजर के घर पर काम करने वाली महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसके साथ मारपीट की और बलात्कार किया. साथ ही महिला ने ये आरोप भी लगाया कि उसके पति की मौत में सेना के अधिकारी की भी भूमिका है. लेकिन अदालत में सबूतों की जांच हुई तो उसके बयानों में विरोधाभास सामने आए. महिला अपने दावों के पक्ष भी पुष्टि करने वाला सबूत पेश करने में विफल रही. यही नहीं जांच में एक वीडियो रिकॉर्डिंग सामने आई, जिसमें महिला और उसके रिश्तेदार पैसों की उगाही के लिए झूठे मामले दर्ज कराने की साजिश रचते नजर आए.

अदालत ने कहा कि यह मामला इस बात का एक उदाहरण है कि कैसे झूठे आरोप सालों की मेहनत और सेवा से बनी प्रतिष्ठा को बर्बाद कर सकते हैं. अपने फ़ैसले में अदालत ने कहा,

"किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा सालों में बनती है और इसे स्थापित करने के लिए जीवन भर की कड़ी मेहनत और ईमानदारी की ज़रूरत होती है. कुछ झूठ इसे कुछ ही पलों में नष्ट कर सकते हैं."

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इसी आधार पर कोर्ट ने महिला के खिलाफ CrPC की धारा 195 और 340 के तहत केस दर्ज करने को कहा, जिसमें सात साल तक की कैद का प्रावधान है.

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