हनुमनथप्पा के लिए पूजा नमाज हुई ये बहुत अच्छा है. लेकिन हमें उन शहीदों का बलिदान कतई नहीं भूलना चाहिए. वो भी इसी त्रासदी में शहीद हुए. इसके पहले चार जवान और शहीद हो गए थे. इसी सियाचिन के ग्लेशियर में. जहां आदमी के लिए हालात नॉर्मल नहीं हैं. बड़ी मुसीबत झेलते हैं वहां हमारे फौजी. हर दम मौत का डर.
इसलिए शहीदों का नाम जब आंखे नम हों तो भेदभाव मत करो. सोमवार 4 जनवरी को लद्दाख के तुरकुट में हिमस्खलन हुआ. लद्दाख स्काउट के ये चार जवान बर्फ में दब कर शहीद हुए. पठानकोट अटैक की आड़ में इनकी शहादत चर्चा से बाहर रही.
- हवलदार सेवांग नुर्बू
- हवलदार दुर्जय ग्यालसन
- राइफलमैन मोहम्मद यूसुफ
- राइफलमैन जिगमेड चोसडप

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और ये वो जवान हैं जो लॉन्स नायक हनुमनथप्पा के साथी थे. साथ ड्यूटी की. साथ ही सियाचिन में मुसीबत के शिकार हुए. लेकिन आखिरी वक्त साथ न रहा.
- सुबेदार नागेश, गांव तेजुर, जिला हसन, कर्नाटक
- हवलदार एलुमलाई, दुक्कम पराई गांव, वेल्लूर, तमिलनाडु
- लॉन्स हवलदार एस कुमार, गांव कुमनान थोजू, जिला टेनी, तमिलनाडु
- लॉन्स नायक सुधीश, गांव मुनरोथुरुत, जिला कोलम, केरल
- सिपाही महेश, गांव एचडी कोटा, मैसूर, कर्नाटक
- सिपाही गणेशन, गांव चोकथवान पट्टी, जिला मदुरै, तमिलनाडु
- सिपाही राम मूर्ति, गांव गुदिस्ताना पल्ली, जिला कृष्णागिरि, तमिलनाडु
- सिपाही मुश्ताक अहमद, गांव पर्नापल्ली, जिला कुर्नूल, आंध्र प्रदेश
- सिपाही नर्सिंग असिस्टेंट सूर्यवंशी, गांव मस्करवाड़ी, जिला सतारा, महाराष्ट्र

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