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तुर्किए-पाकिस्तान को जवाब, आर्मेनिया को सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट दे सकता है भारत

Azerbaijan को 25 सितंबर, 2024 को अपने पहले JF-17 Fighter Jet की डिलीवरी मिली थी.

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भारत का सुखोई (PHOTO-Indian Air Force)

आर्मेनिया और अजरबैजान (Armenia Azerbaijan Tension) टेंशन जगजाहिर है. नागोर्नो-काराबाख इलाके को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना रहता है. इस बीच खबर आई है कि अजरबैजान चीन और पाकिस्तान द्वारा मिलकर डेवलप किए गया फाइटर जेट JF-17 खरीद रहा है. अजरबैजान हमेशा से पाकिस्तान और तुर्की (Turkey Pakistan Relations) का पक्ष लेता आया है. इसके जवाब में भारत उसके पड़ोसी विरोधी आर्मेनिया को अपना अपग्रेडेड और उन्नत Sukhoi Su-30MKI फाइटर जेट दे सकता है. इससे पूरे एशिया क्षेत्र में पावर बैलेंस का तराजू आर्मेनिया के पक्ष में झुक सकता है.

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फोर्ब्स को दिए एक इंटरव्यू में इंटेलीजेंस फर्म RANE के डायरेक्टर Sam Lichtenstein ने बताया कि अजरबैजान ने आधिकारिक तौर पर 4.6 बिलियन डॉलर की डिफेंस के तहत JF-17 के अपने ऑर्डर को 16 जेट से बढ़ाकर 40 कर दिया है. पाकिस्तानी सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इसकी पुष्टि भी कर दी है. यह पाकिस्तान का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा एक्सपोर्ट होने वाला है. साथ ही ये JF-17 विमान की इमेज चेंज करने में भी मददगार साबित होगा, जिसे पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर विकसित किया है.

अजरबैजान की मीडिया रिपोर्ट्स को देखें तो यहां की सरकार ने विमानों की संख्या और सौदे का कीमत को 1.6 बिलियन से बढ़ाकर लगभग 4.2 बिलियन कर दिया है. लेकिन, ऐसी रिपोर्ट्स की बाकू (अजरबैजान की राजधानी) या इस्लामाबाद की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है. अजरबैजान को 25 सितंबर, 2024 को अपने पहले JF-17 की डिलीवरी मिली थी. अजरबैजान को इस विमान का JF-17C ब्लॉक III वेरिएंट मिला है. ये विमान Ectronically Scanned Array Radar और ऐसे कई हथियारों से लैस है जो आमतौर पर 4.5 जेनरेशन के विमानों में पाए जाते हैं. Sam Lichtenstein कहते हैं-

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चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में कुछ सीमाएं हैं, जैसे कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और डेवलप किए जा रहे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की तुलना में स्टेल्थ की कमी.  लेकिन अजरबैजान को इसमें कई फायदे भी दिखाई दे रहे हैं.

Sam आगे कहते हैं

सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि JF-17 अपने कई कंपटीटर्स, मसलन वेस्टर्न या रूसी विकल्पों की तुलना में एक किफायती विकल्प है. इससे अजरबैजान के पुराने और कम सक्षम सोवियत में बने विमानों को अपग्रेड करने में भी मदद मिलेगी.

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यह खरीद देश की वायुसेना के लिए संख्या और क्वालिटी, दोनों नजरिए से एक बहुत बड़ा अपग्रेड है. अब तक अजरबैजान की वायुसेना एक दर्जन से अधिक पुराने Mig-29 फलक्रम लड़ाकू विमानों और सबसॉनिक Su-25 फ्रॉगफुट विमानों पर निर्भर थी.

Sam के मुताबिक रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के जारी हैं. इस वजह से JF-17 लेने से बाकू को रूस से अधिक सैन्य क्षमताएं प्राप्त करने की बाध्याता से बचने में मदद मिलती है. इसके अलावा, JF-17 तुर्की की कई सिस्टम्स के साथ इंटीग्रेटेड है जो अजरबैजान के पास पहले से ही हैं. इससे अजरबैजान को विमान के मेंटेनेंस आदि के लिहाज से सहूलियत मिलेगी. भारत इस रक्षा सौदे से तुर्की-पाकिस्तान और अजरबैजान की तिकड़ी को साधने में भी मदद मिलेगी. तुर्की और अजरबैजान ने पहलगाम हमले, फिर ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक स्वर में भारत का विरोध कर पाकिस्तान का साथ दिया था.

रही बात भारत के सुखोई की तो भारत ने इसे काफी अपग्रेड किया है. भारत ने इसके रडार, एवियॉनिक्स जैसी चीजों को लगभग पूरी तरह से बदल दिया है. साथ ही इसे न्यूक्लियर केपेबल तक बनाया है. हवा में इसकी मैनुवरिंग की पूरी दुनिया कायल है. ऐसे में अजरबैजान के सामने आर्मेनिया के पास अगर ये विमान आता है तो एशिया में पावर बैलेंस पूरी तरह बदल जाएगा. साथ ही भारत को भी आर्मेनिया के रूप में एक रक्षा पार्टनर मिलेगा.

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