ट्विटर से शुरू हुआ सारा झगड़ा. उस पर बैंक ने कुबूल किया कि जानवरों के फैट वाला तेल लग रहा है. इसी साल सितंबर में ये पॉलीमर नोट लॉन्च हुए हैं. बस इसी के साथ बमचक मच गई. शाकाहारी लोगों ने भसड़ काट दी. भई बात ही ऐसी थी. फिर भैया कम्ब्रिया के डग मॉ ने पिटीशन शुरू की. साढ़े 13 हजार सिग्नेचर मिले इस पर. कहिन कि पुराने नोट तो सर्कुलेशन में आ चुके हैं. उनका कुछ नहीं हो सकता. लेकिन अब नए नोट तो नहीं चलने देंगे.
47 साल का ये होटल वर्कर 20 साल पहले शाकाहारी हो गया था. बोले कि इसके लिए कोई एक्सक्यूज ही नहीं है. और भी तरीके हैं नोट बनाने के. ये क्या कि चर्बी मिला दो.
इस साल एक सर्वे हुआ था ब्रिटेन में. जिसमें पता चला कि पिछले दशक के मुकाबले इस दशक में 360 परसेंट शाकाहारी बढ़े. 15 साल से ऊपर के 5 लाख 42 हजार के करीब लोगों ने शाकाहार अपना लिया है. 2006 में ये गिनती 1 लाख 50 हजार थी. तो ऐसा तो है नहीं कि ये आंकड़ा नजरअंदाज किया जाए. बैंक को भी अपनी गलती का एहसास हो गया है. ये भी पढ़ें: 100 का नोट होश खोल के लेना, वरना चिड़िया चुग जाएगी खेत






















