चेन्नई का रहने वाला सोमसुंदरम. उम्र 80 साल. 1 मार्च 2010 को उसने तीन बच्चियों को फुसलाकर अपने घर बुलाया. फिर उनका रेप किया. 10, 11 और 12 साल की बच्चियां. अब 6 साल बाद सोमसुंदरम को सजा हो गई है. उम्रकैद.
जब रेप किया था, उस वक़्त ये बुढ़ऊ 74 साल का था. जिस उम्र में दादाजी लोग बच्चों के साथ बैठ कर 'छोटा भीम' देखते हैं. इस घटिया आदमी ने उन बच्चियों को ब्लू फिल्म्स दिखाईं. उनको बांधा. फिर उनका रेप किया. बाद में उन बच्चियों को धमकी दी. अगर उन तीनों ने किसी से कुछ भी कहा, तो 'बहुत बुरा होगा'.
सोमसुंदरम के खिलाफ केस दर्ज हुआ था. लेकिन सुनवाई के लिए वो कोर्ट जाता ही नहीं था. खुद को बचाने के लिए उसने एक अजब ही तरीका निकाल लिया. उसको ट्रायल के लिए कोर्ट में बुलाया जाता. तो वो कोर्ट ना जाने का कोई बहाना बना देता था. फिर थोड़े दिनों बाद कोर्ट में एक पेटीशन डाल देता था. जिसमें वो बच्चियों को फिर से पूछताछ के लिए बुलाने की मांग करता था. महिला सेशन कोर्ट ने एकाध बार तो उसकी मांग मान ली. और बच्चियों को फिर से कोर्ट में पूछताछ के लिए बुला लिया. लेकिन बच्चियां कोर्ट आतीं भी थीं तो सोमसुंदरम खुद कोर्ट से गायब रहता. मतलब एक तरह से वो ज्यूरी के सामने आ ही नहीं रहा था. और तो और, उसका वकील भी कोर्ट नहीं आता. ये हरक़त उसने कई बार दोहराई. ये पूरा मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया.
सुनवाई के लिए सोमसुंदरम को हाईकोर्ट बुलाया गया. उसने एक बार फिर से वही पेटीशन फाइल किया. लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने उसकी अपील नहीं मानी. हाईकोर्ट ने उसको ट्रायल के लिए नहीं बुलाया. बल्कि सीधे उम्र कैद की सजा सुना दी. कोर्ट ने उसके खिलाफ नॉन-बेलेबल अरेस्ट वॉरेंट जारी कर दिया. आखिर में सोमसुंदरम ने सरेंडर कर दिया.
सोमसुंदरम का कहना है कि उसको अपनी सफाई का कभी मौका ही नहीं दिया गया. लेकिन जस्टिस एस नागमुत्थू और वी भारतीदासन ने उसका ये इलज़ाम रिजेक्ट कर दिया. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने उसको कई बार ट्रायल के लिए बुलाया था. लेकिन वो खुद कोर्ट नहीं जाता था. हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि बार-बार बच्चियों को कोर्ट में बुलाना गलत है. वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि '
आरोपी ने कह दिया'. ये कॉन्स्टीट्यूशन के आर्टिकल 21 के खिलाफ है. ज्यूरी ने कहा है,
'तीनों नाबालिग बच्चियों को सोमसुंदरम की वजह से बहुत टॉर्चर सहना पड़ा है. फिजिकल और मेंटल दोनों ही तरह का. इसलिए सोमसुंदरम को जो भी सजा मिली है. हम उसमे कोई भी कमी नही करेंगे. ना ही इस फैसले में किसी का भी इंटरफेरेंस सहेंगे.'
वैसे ज़रा सोचिए. ये कितनी डरावनी सी बात है. हमारे अड़ोस-पड़ोस के घरों में कई दादू टाइप के लोग रहते हैं. लोग अपने बच्चों को कितने आराम से उनके पास भेज देते हैं. उनके साथ खेलो. ड्राइंग करो. कहानियां सुनो. उनके साथ घूम आओ. कार्टून देखो. कितने आराम से हम, लोगों की उम्र की वजह से उनपर भरोसा कर लेते हैं. और सिर्फ उम्र बढ़ जाने की वजह से उनको रिस्पेक्ट देने लग जाते हैं. लेकिन फिर इस तरह के कुछ बड़े बुज़ुर्ग लोग ऐसी घटिया हरक़त कर देते हैं. लोगों ने जो भरोसा किया है, उसकी छीछालेदर कर देते हैं. इस तरह से तो किसी को भी अपने घर में रहने वालों से डर लग जाए.