#1. फिल्म 'काला पत्थर' डायरेक्टर यश चोपड़ा, अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और राइटर जोड़ी सलीम-जावेद की एक साथ चौथी फिल्म थी. इससे पहले इन्होंने 'दीवार' (1975), 'कभी-कभी' (1976) और 'त्रिशूल' (1978) में साथ काम किया था. इन लोगों की पिछली तीनों फ़िल्में सुपरहिट रही थीं, लेकिन 'काला पत्थर' बॉक्स-ऑफिस पर कुछ ज़्यादा सफल नहीं हुई.

'काला पत्थर' से पहले अमिताभ, यश चोपड़ा और सलीम-जावेद द्वारा साथ बनाई फ़िल्में.
#2. ये फिल्म झारखंड के धनबाद में हुई चासनाला खदान दुर्घटना पर बेस्ड थी. 27 दिसम्बर, 1975 को हुए इस एक्सीडेंट में 370 से ज्यादा कोयला खदान मजदूरों की जान चली गई. ये हादसा खान में बाढ़ का पानी भर जाने से हुआ था. बताया जाता है कि खदान के ठीक ऊपर बने तालाब से 5 करोड़ गैलन पानी खदान की छत तोड़ता हुआ अंदर भर गया, जिससे वहां काम करने वाले लोग भीतर ही फंस गए. अफरा-तफरी में रेस्क्यू का काम शुरू हुआ लेकिन पानी निकालने के लिए जो मशीनें मंगाई गईं वो काफी नहीं थीं और देरी की वजह से अंदर फंसे मजदूरों को जान गंवानी पड़ी.

धनबाद की चासनाला कोयला खदान.
#3. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने कोयला खदान में काम करने वाले एक आदमी का रोल किया था जो पहले मर्चेंट नेवी ऑफिसर हुआ करता था. तब जहाज पर एक हादसे के दौरान वो डूबती शिप से कूद कर भाग गया था और वहां लोगों की जान नहीं बचा पाया था. उनका ये कैरेक्टर जोसेफ कॉनरॉड के नॉवेल 'लॉर्ड जिम' के ही एक पात्र से प्रेरित था.

जोसफ कॉनरॉड और उनका नॉवेल 'लार्ड जिम.'
#4. 'काला पत्थर' बनाते वक़्त डायरेक्टर यश चोपड़ा बहुत व्यस्त रहते थे. ये फिल्म एक मल्टीस्टारर प्रोजेक्ट थी और फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े स्टार इसमें काम कर रहे थे. इन सबकों साथ मैनेज करना बहुत मुश्किल काम होता था. यश जी की व्यस्तता का आलम ये था कि फिल्म के एक गाने 'बाहों में तेरी मस्ती के घेरे' की शूटिंग उन्हें दूसरे डायरेक्टर रमेश तलवार से करवानी पड़ी थी जो शशि कपूर और परवीन बाबी पर फिल्माया गया था. उस समय यश चोपड़ा दूसरे एक्टर्स के साथ कोई अन्य सीन शूट कर रहे थे.
फिल्म का वो गाना :
#5. ये फिल्म ऑफ स्क्रीन ज्यादा चर्चा में इसलिए रही थी क्योंकि इसके लीड एक्टर अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच खटास आ गई थी जो फिल्म इंडस्ट्री में बहुत अच्छे दोस्तों के तौर पर जाने जाते थे. उस दौर में शत्रुघ्न सिन्हा नेगेटिव किरदार करके भी हीरो से ज़्यादा वाहवाही बटोर ले जाते थे. कहा जाता है कि अमिताभ उनके इस रुतबे से असुरक्षित थे. ये भी कहा जाता है कि उन्होंने कई फिल्मों में शत्रुघ्न के रोल कटवा कर छोटे करवा दिए थे. बाद में दोनों ने साथ में काम करना भी बंद कर दिया था और इनकी अनबन बहुत चर्चा में रही थी.

शत्रुघ्न सिन्हा ने 1980 में आई 'दोस्ताना' में भी नेगेटिव रोल किया था. इसमें उनके साथ अमिताभ भी थे.
#6. अमिताभ और शत्रुघ्न के बीच इस फिल्म में एक फाइट सीक्वेंस था. इसे डायरेक्ट कर रहे स्टंटमास्टर शेट्टी ने शत्रुघ्न सिन्हा को बताया कि ये बिलकुल बराबरी की फाइट है और कोई किसी को ज़्यादा नहीं मारेगा, न ही मार खाएगा. बताया जाता है कि शूटिंग शुरू हुई और डायरेक्टर के कट बोलने के बावजूद अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा को पीटते रहे. ये मार-पीट तब तक चलती रही जब तक तक शशि कपूर ने दोनों के बीच आकर इन्हें अलग नहीं किया.

अमिताभ और शत्रु को अलग करते शशि कपूर.
#7. शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी जीवनी 'एनीथिंग बट खामोश - द शत्रुघ्न सिन्हा बायोग्राफी' में बताया है कि एक्टिंग करियर के शुरुआती दिनों में दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे, लेकिन समय के साथ इनके बीच तनाव आ गया. शत्रुघ्न ने बताया कि इसकी शुरुआत अमिताभ ने की थी. फिल्म की शूटिंग के दौरान, शत्रुघ्न सिन्हा और अमिताभ बच्चन एक ही होटल में ठहरे थे और एक ही समय पर शूटिंग लोकेशन से भी निकलते थे, लेकिन इनमें आपस में कोई बात नहीं होती थी. सेट पर अमिताभ अपनी कुर्सी शत्रु से अलग लगवाते थे. इनके बीच दरार इतनी बढ़ गई थी कि जब मशहूर निर्माता-निर्देशक सुभाष घई ने शत्रुघ्न के सामने 'दीवार' में अमिताभ के जबरदस्त परफॉर्मेंस की तारीफ की तो शत्रुघ्न सिन्हा ने उनसे कहा 'अभी क्या मैं अमिताभ बच्चन से एक्टिंग सीखूंगा!'
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