इस कमेटी की एक बैठक के दौरान कहा गया,
कोविड के कारण बदतर स्थिति और उसके कारण पैदा हुई ऑक्सीजन की मांग की जानकारी एक अन्य उच्चाधिकार प्राप्त समूह (Empowered Group-2) (ग्रुप-2) को दी जाए.ऑक्सीजन और चिकित्सकीय उपकरणों की व्यवस्था का जिम्मा इसी समूह के पास है.इस ग्रुप की जिम्मेदारी है कि प्रभावित राज्यों को मेडिकल सुविधाओं और ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित की जाए.

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार कमेटी कोरना वायरस संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए प्लान बी के बारे में सोचने की बात भी कही है.
फोटो-एएनआई)
एक प्रेस स्टेटमेंट में हेल्थ मीनिस्ट्री ने कहा है कि राज्य सरकारों को कोविड के कठोर प्रबंधन के लिए कहा गया था. राज्य सरकारों को हालात को काबू में लाने के लिए सख्त उपाय करने की ताकीद की और चेताया था कि मौजूदा ढांचा कोविड की इस बड़ी लहर से निपटने में नाकाफी हो सकता है. पिछले साल ही लगने लगा था मुश्किलों का अनुमान सरकार को पिछले साल सितंबर में ही अंदाजा हो गया था कि कितने संसाधनों की जरूरत पड़ने वाली है. पॉल कमेटी ने सितंबर में बताया था कि अगर हर दिन तीन लाख केस आते हैं तो देश को 1.6 लाख आईसीयू बेड, 3.6 लाख नॉन आईसीयू बेड की जरूरत होगी. कमेटी ने यह भी बताया था कि 75 फीसदी ऐसे नॉन आईसीयू बेड की जरूरत होगी जिनमें ऑक्सीजन देने की सुविधा हो.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अगर भारत में 2 लाख केसेज प्रतिदिन के हिसाब से कोरोना संक्रमण बढ़े तो उसे संभाला नहीं जा सकेगा.
बता दें कि भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 3 लाख 52 हज़ार 991 नए मामले आए हैं. 2,812 लोगों की मौत हुई है. इस वक्त देश में कोरोना वायरस के कुल 28 लाख 13 हज़ार 658 एक्टिव मामले हैं.














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