ईरान जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को अपने ही देश में विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा. अमेरिका के कई शहरों मे ट्रंप के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए. लोगों के हाथों में ‘No Kings, No ICE, No war’ की तख्तियां (बोर्ड्स) देखी गईं. ये लोग ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी और उसकी वजह से मारे गए लोगों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके अलावा ईरान के खिलाफ जंग और देश मे उनके अन्य विवादित फैसलों के खिलाफ भी लोगों ने सड़कों पर मोर्चा खोल दिया है.
ईरान में रिजीम बदलने चले थे डॉनल्ड ट्रंप, खुद अमेरिका में सत्ता विरोधी प्रोटेस्ट झेल रहे
US में राष्ट्रपति Donald Trump के खिलाफ लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने आए. वहीं, दुनिया के अन्य देशों में भी ट्रंप और उनकी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन दिखे.


AP की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार, 28 मार्च को अमेरिका के लगभग सभी 50 राज्यों में 3100 से ज्यादा रैलियों का आयोजन किया गया. यहां हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए. इन प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र अमेरिका का मिनेसोटा राज्य रहा. वहीं, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजिल्स जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ कई छोटे कस्बों में भी प्रदर्शन देखा गया. मिनेसोटा में विरोध प्रदर्शन के नेता के तौर पर अमेरिका सिंगर ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने अहम भूमिका निभाई.
अमेरिका में इस समय खूब सर्दी पड़ रही है लेकिन प्रदर्शनों ने वहां माहौल गर्मा दिया है. ब्रूस समेत अन्य नेताओं ने लोगों का इसलिए शुक्रिया अदा किया क्योंकि, लोग इतनी सर्दी में भी ट्रंप के खिलाफ विरोध करने लिए एकजुट हुए. प्रदर्शन के दौरान ब्रूस ने "स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस" गाना भी गया. यह गाना उन्होंने उन दो लोगों के मौत के बाद लिखा था, जिनकी मौत फेडरल एजेंट्स द्वारा की गई गोलीबारी में हुई थी.

विरोध प्रदर्शन करने वालों का मानना है कि इससे पहले 'No Kings' रैली पिछले साल जून और अक्टूबर में भी हो चुकी है. जून की रैली में 50 लाख से ज्यादा और अक्टूबर में 70 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे. उन्हें शनिवार 28 मार्च को भी ऐसी उम्मीद थी कि प्रदर्शन में 90 लाख लोग शामिल हो सकते हैं. हालांकि, ये साफ नहीं है कि प्रोटेस्ट में इतने लोग आए या नहीं. DW की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अलावा जर्मनी के कई शहरों में भी लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. इटली की राजधानी रोम और ब्रिटेन के राजधानी शहर लंदन में भी जंग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं.

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AP की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन पर अमेरिका के व्हाइट हाउस ने रिएक्शन भी दिया है. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इसे "वामपंथी फंडिंग नेटवर्क" का नतीजा बताया. उनके मुताबिक, हकीकत में प्रदर्शन करने वालों को जनता का बहुत कम समर्थन मिला है. उन्होंने कहा,
इन 'ट्रंप डेरेन्जमेंट थेरेपी सेशन' की परवाह सिर्फ वे रिपोर्टर करते हैं, जिन्हें इन्हें कवर करने के लिए पैसे मिलते हैं.
वहीं, अमेरिका की नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेसनल कमेटी ने भी इन रैलियों की कड़ी आलोचना की. कमिटी की प्रवक्ता मौरीन ओ'टूल ने इसे “अमेरिका-विरोधी रैलियां” बताया. वहीं, इंडिया टुडे से जुड़े प्रणय उपाध्याय की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की राजधानी तेल अवीव में भी प्रदर्शन हुए हैं. जंग में जिन बच्चों की मौत हुई है, ये प्रदर्शन उनकी मौत के खिलाफ किए जा रहे हैं.
लोगों के हाथों में जंग में मारे गए बच्चों की तस्वीरें भी थी. ये बच्चे इजरायल, ईरान और लेबनान के थे. वहीं, कुछ लोगों के हाथों में मोमबत्तियां थी.
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