"दंगे, जिनमें लोगों को गंभीर चोटें आती हैं, कभी-कभी जान भी चली जाती है, गुजरात में अक्सर होते रहते हैं. और ऐसे मामलों को बड़ी सावधानी के साथ हैंडल करना चाहिए. इसमें बहुत सारे लोग शामिल होते हैं. और मिलने वाले सबूत अक्सर किसी एक पक्ष में होते हैं. ऐसे में असली गुनाहगारों के साथ मासूम लोगों को सजा मिलने का खतरा रहता है. क्योंकि दोनों ही पार्टियां चाहती हैं कि वो इसमें अपने ज्यादा से ज्यादा दुश्मनों को खींच अपराधी साबित करवा सकें. कानून ये कहता है कि एक गैरकानूनी भीड़ का कोई भी व्यक्ति अगर पूरी भीड़ के पक्ष में कोई गैरकानूनी काम करता है, तो उसका जिम्मेदार पूरी भीड़ को माना जाएगा. हिंसक भीड़ का हिस्सा होना ही उनके अपराध का सबूत होगा. और उन्हें अलग से गुनाहगार साबित नहीं करन होगा. "नवंबर 2003 में एक एक उपद्रवी ग्रुप ने डकैती करते हुए सड़क जाम कर दी थी. और इस दौरान गुज़र रही बाइक पर पीछे बैठे मुकेश पांचाल नाम के आदमी को मार डाला था. 12 में से 6 आरोपियों को निचली कोर्ट ने गुनाहगार बताते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी. जिसकी सुनवाई अब हाई कोर्ट में थी.
भीड़ का हर दंगाई बराबर का गुनहगार: गुजरात HC
'हिंसक भीड़ का हिस्सा होना ही उनके अपराध का सबूत होगा.'
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फोटो - thelallantop
गुजरात हाई कोर्ट ने कहा है कि दंगों के मामले में किसी एक को नहीं, बल्कि दंगा करने वाली पूरी की पूरी भीड़ को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. ये कोर्ट ने 13 साल पुराने एक मर्डर और डकैती के केस की सुनवाई के दौरान कहा. सुनवाई के दौरान जस्टिस केएस झावेरी और जस्टिस जीबी शाह ने कहा:
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