आंध्र प्रदेश का वेस्ट गोदावरी ज़िला. यहां एलुरु सिटी में कुछ हफ्तों पहले लोगों की अचानक तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई थी. 600 से ज्यादा लोग बीमार पड़े थे. एक की मौत भी हो गई थी. इस रहस्यमय बीमारी का कारण पता लगाने का ज़िम्मा कई नामी इंस्टिट्यूट्स को सौंपा गया था. सबने रिसर्च की और बुधवार यानी 16 दिसंबर को इस आउटब्रेक का संभावित कारण बताया. ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नॉलजी (IICT) समेत कई इंस्टिट्यूट ने कन्फर्म किया है कि कीटनाशक इस आउटब्रेक का कारण हो सकते हैं. यह जानकारी बुधवार को आंध्र प्रदेश के चीफ मिनिस्टर वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में दी गई. आंध्र प्रदेश सरकार ने 16 दिसंबर को कहा,
लंबी जांच के बाद पता चला, अचानक क्यों बीमार पड़े थे 600 लोग
आंध्र प्रदेश के एलुरु में सैकड़ों लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा था.


"AIIMS और IICT के विशेषज्ञों ने कहा है कि कीटनाशकों के अंश एलुरु की रहस्यमय बीमारी की वजह हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक अभी और स्टडी के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकेगा कि ये अंश इंसानों के अंदर कैसे पहुंचे होंगे."
सीएम ने क्या कहा?
'इंडिया टुडे' के आशीष पांडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम ने इस मामले में और ज्यादा जांच करने को कहा है. ताकि एलुरु जैसी घटना दोबारा न हो. ज़िले में सभी सोर्स से आने वाले पीने के पानी की जांच करने को कहा गया है. सीएम ने कहा,
"सैम्पल्स को व्यवस्थित रूप से इकट्ठा किया जाना चाहिए और विशेषज्ञों के साथ विश्लेषण किया जाना चाहिए. इन सभी परीक्षणों के विश्लेषण के बाद नतीजों के अनुसार ज़रूरी उपाय किए जाने चाहिए."
सीएम ने AIIMS और IICT से अपील की है कि वो एलुरु की घटना पर और गहराई से स्टडी करें. लॉन्ग टर्म इफेक्ट पर भी स्टडी करें. साथ ही एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से कहा है कि वो मार्केट से नुकसानदायक कीटनाशकों को हटाने पर फोकस करें.
किसने क्या पाया?
एम्स दिल्ली के लैब सैम्पल्स ने पीने के पानी और दूध में लेड और निकल की मौजूदगी पाई थी. एम्स ने ये भी बताया कि मरीज़ों के रिश्तेदारों के खून के सैम्पल्स में लेड की मौजूदगी थी. साथ ही ये भी कहा कि इस मामले पर और लंबी जांच की ज़रूरत है. एम्स का कहना है कि बीमारी का एकदम सटीक कारण पता लगाने के लिए खाने, पीने के पानी और सब्ज़ियों के सैम्पल्स के विश्लेषण की ज़रूरत है.
एम्स ने बताया कि मरीज़ों की जांच के बाद ये लग रहा है कि ये हालात ऑर्गेनोक्लोरिन की वजह से बने हैं, ऐसी संभावना है कि ये कीटनाशक खाने के ज़रिए लोगों के शरीर में पहुंचा होगा. ऑर्गेनोक्लोरिन ऐसा कीटनाशक है, जो काफी जहरीला होता है. कई देशों ने तो इसके इस्तेमाल पर रोक तक लगा रखी है.
IICT एक्सपर्ट्स ने पानी के 21 सैम्पल्स की जांच की थी. साथ ही लोगों और जानवरों के खून का भी टेस्ट किया था. IICT ने अभी तक अपनी जांच में इन सैम्पल्स में लेड, निकल और अर्सेनिक जैसे भारी मेटल्स की मौजूदगी नहीं पाई है. हालांकि, उन्होंने ब्लड सैम्पल्स में एंडोसल्फान और DDD की मौजूदगी पाई है.
राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) हैदराबाद ने एलुरु के वायु प्रदूषण पर टेस्ट किया था. NEERI का कहना है कि हवा में प्रदूषण लिमिट में था. उन्होंने अंडरग्राउंड और सरफेस वॉटर का भी विश्लेषण किया और पाया कि सभी मेटल्स लिमिट में थे, केवल मरक्यूरी को छोड़कर. हालांकि NEERI ने पानी में ऑर्गेनोक्लोरिन की मौजूदगी नहीं पाई है.
नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन हैदराबाद ने बताया कि टमाटर और बैंगन के सैम्पल्स में कीटनाशकों के अवशेष मिले हैं और ये बीमारी का कारण हो सकते हैं.













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