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आम आदमी पार्टी गोवा जा रही है

वो बंगाल नहीं जा रहे, केरल भी नहीं जा रहे. जाना तो उन्हें हरियाणा और उत्तर प्रदेश भी था. लेकिन राह बदलकर वो सिर्फ गोवा जा रहे हैं. 40 सीटों के चक्कर में.

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फोटो - thelallantop
वो बंगाल नहीं जा रहे, केरल भी नहीं जा रहे. जाना तो उन्हें हरियाणा और उत्तर प्रदेश भी था. लेकिन राह बदलकर वो सिर्फ गोवा जा रहे हैं. छुट्टी मनाने नहीं, 40 सीटों के चक्कर में. वे कौन हैं? वे आम आदमी पार्टी हैं. ऐलान-वैलान नहीं हुआ है, पर लगभग तय है कि आम आदमी पार्टी 2017 में गोवा विधानसभा चुनाव लड़ेगी. संकेत पहले से मिल रहे थे. अब 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने सूत्र के हवाले से लिखा है कि गोवा चुनाव के लिए सीनियर नेताओं की हरी झंडी मिल गई है. AAP फिलहाल पंजाब में ताकत झोंके हुए है और इसके बाद एमसीडी चुनाव लड़ेगी. गोवा के अलावा 2017 में पार्टी की कोई और चुनाव लड़ने की योजना नहीं है. पार्टी की सेंट्रल कमान के कुछ नेता और अनुभवी वॉलंटियर्स की टीम पहले से गोवा में है. वहां वे ग्राउंड-लेवल पर लोकल सपोर्ट बनाने की कोशिश कर रहे हैं. मार्च में पार्टी नेता आशुतोष जब गोवा दौरे पर पहुंचे थे तब उन्होंने भी कहा था कि पार्टी यहां चुनाव लड़ना चाहती है.

लेकिन गोवा ही क्यों जा रहे हैं?

सियासत ही वो शै है जिसमें कोई कहीं जाता है तो लोग पूछते हैं कि कहीं और क्यों नहीं जा रहे. यहां भी लोग पूछ रहे हैं. AAP ने बीते लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा ऊर्जा और पैसा यूपी में खपाया था. प्रदेश में उन्होंने 77 कैंडिडेट उतारे थे. इनमें पार्टी आलाकमान के तीन नेता शामिल थे- खुद अरविंद केजरीवाल (बनारस से), कुमार विश्वास (अमेठी से) और शाजिया इल्मी (गाजियाबाद से). फिर भी वह यूपी चुनाव नहीं लड़ रहे. बंगाल और केरल में राजनीतिक स्थितियां बिल्कुल अलग हैं. उत्तराखंड में भी AAP के लिए खास उपजाऊ जमीन नहीं है. यूपी बहुत बड़ा है. हरियाणा में इनके लिए संभावनाएं थीं, पर उस वक्त अंदरूनी दो-फाड़ ने वहां उतरने नहीं दिया.
लेकिन गोवा में AAP इसलिए भी संभावनाएं देख रही है क्योंकि वह एक छोटा प्रदेश है. सिर्फ 40 सीटें हैं. चुनाव के बाद पार्टी के पास ज्यादा पैसा बचा नहीं है. इसलिए वह बहुत कैलकुलेटेड दांव खेलना चाहती है. जहां पैसा भी ज्यादा खर्च न हो और सीटें भी ठीक-ठाक निकल आएं.

गोवा में कांग्रेस की हालत ठीक नहीं

गोवा में अगले साल होने वाले चुनाव में कांग्रेस मजबूत उम्मीदवार नहीं मानी जा रही. AAP वहां भी दो सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल होकर सत्ता की मुख्य लड़ाई लड़ना चाहेगी. जैसा कि वह पंजाब में करने की कोशिश कर रही है. गोवा एक कॉस्मोपॉलिटन और तुलनात्मक रूप से प्रोग्रेसिव आबादी वाला शहर माना जाता है. AAP इसे भी अपन प्लस पॉइंट मानकर चल रही है. वैसे आप सोशल मीडिया को जरा स्कैन कर लें तो और दलीलें भी मिलेंगी. जैसे ओवैसी की एंट्री पर सेक्युलर दल बिल्लाते हैं और ओवैसी-बीजेपी में साठ-गांठ का आरोप लगाते हैं. वैसे ही बीजेपी के समर्थक कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी जान-बूझकर उन प्रदेशों में चुनाव लड़ रही है, जहां बीजेपी की सरकार है या वह सत्ता में साझीदार है या वह सत्ता की प्रमुख दावेदार है. इसके लिए वह दिल्ली, पंजाब और अब गोवा में चुनाव लड़ने के उनके फैसले का उदाहरण दे रहे हैं. वे पूछ रहे हैं कि AAP यूपी में अखिलेश, पश्चिम बंगाल में ममता और केरल में कांग्रेस सरकार के खिलाफ क्यों नहीं लड़ती. वैसे एक बयान यहां याद रखा जाए. AAP नेता पंकज गुप्ता जो पार्टी की फंडिंग का हिसाब-किताब रखते हैं. वह कह चुके हैं कि गोवा में अगर पार्टी चुनाव लड़ी तो 6 से 12 करोड़ का ही खर्च होगा. हालांकि फिर भी सीनियर लीडर जमीनी हवा को परख लेना चाहते हैं. स्टेट लेवल के नेता और पार्टी के कुछ कोर मेंबर गोवा में चुनाव लड़ने के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं. गोवा में 40 विधानसभा और दो लोकसभा सीटें हैं. नॉर्थ गोवा से डॉक्टर बी देसाई और साउथ गोवा से स्वाति श्रीधर केरकर चुनाव लड़ी थीं. दोनों सीटों पर पार्टी को करीब 11 हजार वोट मिल गए थे. आम आदमी पार्टी गोवा के पेज पर करीब 81 हजार लाइक्स हैं.

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