19वां ओवर बांग्लादेश के नाम रहा. बॉलिंग करने आए करीम जमात. बैटिंग पर थे मुस्फिकुर रहीम और बंदे में जैसे करंट दौड़ गया हो. पहली गेंद पर चौका मारा. दूसरी पर फिर चौका. तीसरी पर चौका. चौथी पर चौका. पांचवीं पर फिर चौका जड़ दिया. लगातार पांच चौके. माने गेंद आ रही थी और वापस बाउंडरी की तरफ जा रही थी. रहीम ने जमात को मार-मार के भूत बना दिया. आखिरी गेंद पर एक रन लेकर मुस्फिकुर ने स्ट्राइक अपने पास ही रखी. बांग्लादेश की टीम और फैन उछल पड़े. कहां 12 गेंदों पर 30 रन चाहिए थे. कहां 6 गेंदों पर ही 21 बन गए. अब आखिरी ओवर में 9 रन चाहिए थे.

राशिद ने फेंका था आखिरी ओवर.
मगर 20वें ओवर में मामला पलट गया. काहे से गेंद थी राशिद खान के हाथ में. पहली ही गेंद पर मुस्फिकुर को आउट कर आधा काम कर दिया. दूसरी गेंद पर 1 रन गए. बांग्लादेश को अब 4 गेंदों पर 8 रन चाहिए थे. तीसरी पर 2 रन गए. चौथी पर 1 और पांचवी पर भी महमूदुल्लाह सिंगल ही ले पाए. अब आखिरी गेंद पर जीत के लिए एक चौका चाहिए था. राशिद ने गेंद डाली. अरिफुल हक ने शॉट मारा. गेंद लॉन्ग ऑन की ओर से छक्के के लिए जा रही थी. लगा गया अफगानिस्तान के हाथ से मैच. पर नहीं. बाउंडरी और बॉल के बीच एक फील्डर आ गया. नाम शफीकुल्लाह. बंदे ने उछलकर जो छक्का बचाया, फिर थ्रो फेंका जिससे अरिफुल हक रन आउट हो गए. दो ही रन बन सके. इसी गदर फील्डिंग ने असल में अफगानिस्तान को मैच जिताया. लोग सारा क्रेडिट राशिद को दे रहे थे. कमेंटेटर भी यही कह रहे थे कि राशिद ही 8 रन आखिरी ओवर में डिफेंड कर सकते हैं. मगर ये बात इसीलिए सच हो सकी क्योंकि शफीकुल्लाह ने शानदार फील्डिंग की. आप खुद ये फील्डिंग देखिए. मान जाएंगे शफीकुल्लाह ने ही मैच बचाया है -
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