बेईमानी रोकने के लिए तिरुपति मंदिर देखेगा भक्तों का आधार कार्ड
अगर आधार कार्ड नहीं ले गए, तो खास रस्म नहीं कर पाओगे.
Advertisement

फोटो - thelallantop
कभी धार्मिक जगहों पर अपना आईडी प्रूफ गए हो लेकर? जैसे वोटर आई कार्ड, आधार कार्ड या फिर किसी तरह का कोई सबूत जिससे इंसान की पक्के वाली पहचान हो जाए. अरे यार कौन जाता है आईडी प्रूफ टांगे. ऑफिस-कॉलेज कम था क्या जो भगवान को आईडी दिखाएं. आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में भगवान विष्णु का बहुत बड़ा मंदिर है. तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर. पहाड़ों से घिरा हुआ. वहां अगर विद फैमिली जाने की प्लानिंग है तो आधार कार्ड ले जाना न भूलना. अगर भूले तो अंगप्रदक्षिणम करने को नहीं मिलेगा. अरे वही, जिसमें नंगे बदन लोग गुलाटी मार के मंदिर तक जाते हैं. मन्नत वाले तो इस बात का ज्यादा ध्यान दें. एक और बात ये नियम आज से यानी 20 जुलाई 2016 से लागू होगा. वेंकटेश्वर मंदिर में रोजाना ढेर सारे भक्त आते हैं. 6 तरह से भगवान विष्णु की पूजा होती है. और पता है, सारे के सारे तरीके एक-दूसरे से बहुत अलग होते हैं. ठेठ में कहें तो सूरज मामू के निकलने से पहले पूजा स्टार्ट और उनके सोने से पहले खत्म हो जाती हैं. वहां तीन तरीके से लोग रस्म अदा करते हैं. एक तो डेली बेसिस पर. दूसरा साप्ताहिक और तीसरा पीरियॉडिकल. कहने का मतलब जैसे हनुमान जी का व्रत. जो हर मंगलवार आ टपकता है. ये पीरियॉडिकल है. मंदिर में सबसे ज्यादा लोग अंगप्रदक्षिणम करते हैं. 5 सौ फीट से भी ज्यादा लंबी लाइन में लगकर और घंटों वेट कर के. अब उन्हें ये करने से पहले आधार कार्ड दिखाना होगा. मंदिर के श्राइन बोर्ड के प्रवक्ता तालारी रवि का कहना है कि आधार कार्ड से पता चल पाएगा कि कितने लोग अंगप्रदक्षिणम करने वाले हैं. साथ ही एक आदमी दोबारा इसमें पार्ट नहीं ले सकेगा. जिससे दूसरे लोगों को भी अंगप्रदक्षिणम करने का मौका मिल पाएगा. एक और जरूरी बात बतानी थी. गणेश जी का जो सबसे फेमस मंदिर है न, श्री सिद्धिविनायक. वहां अब पैसे के साथ शेयर्स भी दान में दे सकते हो. मंदिर का डीमेट अकाउंट खुल गया है. शुरू में तो बस शेयर्स ही डोनेट कर पाएंगे लोग. पर फ्यूचर में इसमें और चीजें जोड़ी जाएंगी.
Add Lallantop as a Trusted Source

Advertisement
Advertisement
Advertisement





















