9 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 9 फ़रवरी 2016, 11:34 AM IST)
ऐसा है कि फ्री के नाम पर हम चाय पत्ती भी वो लाते हैं, जिसमें कांच वाली कटोरी फ्री मिलती है. पर हम इत्ते भी एबले नहीं है कि फ्री के नाम पर कोई कुछ भी टेका जाए. सोमवार को TRAI ने जबर फैसला दिया. जकरबर्ग का मुंह लटक गया. रात को इत्ती लंबी पोस्ट लिखे कि बस बीप-बीप लिखना ही रह गया था. जुक्कू खिसिआए हैं. लेकिन हमको क्या हम तो मौज लेंगे.