77 साल की उम्र में 47वीं बार बोर्ड एक्जाम की तैयारी में लगे हैं दादा
सन 68 में इस बोर्ड कम अग्नि परीक्षा की शुरुआत हुई थी. तब से 46 बार फेल हो चुके हैं. एक बार फिर पढ़ाई और उम्मीद से लबरेज होकर जा रहे हैं हाईस्कूल बोर्ड को निपटाने.
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फोटो - thelallantop
कहते हैं पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती. सही बात है भइया. एक्जांपल देखने को मिला राजस्थान के अलवर जिले में. दसवीं की बोर्ड परीक्षा पास करने के लिए 77 साल के शिव चरण यादव 46 साल से रात-दिन मेहनत कर रहे हैं. खोहारी गांव के शिव चरण 10 मार्च से होने वाले परीक्षा में पास होने के इरादे से 47वीं बार बैठेंगे. 46 बार फेल हो चुके यादव को पास होने के लिए राजस्थान बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने मुश्किलें पैदा कर दी है. शिव चरण का हौसला देखने लायक है. वो कहते है कि जबतक परीक्षा पास नहीं करेंगे "बैचलर ब्वाय" ही रहेंगे. उन्हें बढ़ती उम्र की कोई परवाह नहीं है.
इस बार भी वो कॉन्फिडेंस से लबरेज है. उनका कहना है कि 1968 में पहली बार परीक्षा दसवीं का एक्जाम दिया और फेल हो गया. और ये हर बार होने लगा. कभी मैं एक विषय में पास होता तो दूसरे में फेल. उदाहरण के लिए अगर मुझे मैथ्स औऱ विज्ञान में अच्छे अंक आते तो हिंदी और अंग्रेजी में मैं फेल हो जाता. इस बार उम्मीद करता हूं कि हर विषय में पास हो जाउंगा. 21 साल की उम्र में वो पास होने के करीब थे पर मैथ्स ने उनका गेम बजा डाला. यादव ने कहा कि इस बार मैंने एक स्कूल टीचर से क्लासेज लिया है. पिछले 30 साल से मैं अकेले अपने खानदानी घर में रह रहा हूं. बुढ़ापे में मिलने वाला पेंशन और मंदिर का प्रसाद पास होने में मेरी मदद करेगा.
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