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5 साल की बच्ची रोती रही, पंडित उससे फेरे लगवाता रहा

राजस्थान के एक ही गांव में दो-दो बाल विवाह होते देखे गए.

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फोटो - thelallantop
बीते शनिवार राजस्थान के एक ही गांव में दो-दो बाल विवाह होते देखे गए. वो भी उस उम्र की लड़कियों के, जिसमें वो खुद के शादी के जोड़े संभाल नहीं पा रही हैं. शादियां चैत्र शुक्ल दशमी के मौके पर हुईं. https://www.youtube.com/watch?v=g4sMA0VduUE&feature=youtu.be बच्ची की उम्र है 5 साल. वो उम्र जिसमें बच्चे स्कूल जाना शुरू करते हैं. जिस उम्र में माएं अपनी बच्चियों को रंग-बिरंगी फ्रॉक और हेयर क्लिप लगा कर तैयार करती हैं. जिस उम्र में बच्चों को ये तक नहीं पता होता कि जो रिश्ता उसके मम्मी-पापा के बीच है, उसे 'शादी' कहते हैं. जिस उम्र में बच्चियां मोम कलर से घर की सारी दीवारें गोद डालती हैं, उस उम्र में बच्ची की मांग रंगी जा रही है. सिंदूर से. शादी के लिए सजना-संवरना शायद बच्ची के लिए मज़े का काम हो. पर शादी की बेड़ियों में बंधना नहीं. यही बच्चियां जब कल बड़ी होंगी, इनके गौने होंगे. बालिग होने के पहले ये प्रेगनेंट होंगी. और कम उम्र में प्रेगनेंसी के कारण इनको मिसकैरिज होगा. ये सारा जीवन ससुराल और पति की सेवा में बिता देंगी. ऐसी ही उम्मीद रखी जाती है इन नन्ही दुल्हनों से. 'पापा रेप करवा मुझे प्रेगनेंट करवाना चाहते थे, ताकि मेरी शादी हो सके' ये बच्चियां उम्र के पहले बूढ़ी हो जाएंगी. कुछ तो शायद बच्चों की डिलीवरी में मर जाएंगी. इस वीडियो में दूल्हे की उम्र का पता नहीं लग रहा है. पर ये जरूर तय है कि शादी गैरकानूनी है. क़ानून के मुताबिक लड़कियों की शादी की मिनिमम उम्र 18 है. लड़कों की 21. पूरा गांव शादी में आया. दावत उड़ाई, और चल दिए. किसी ने शादी के खिलाफ 'चूं' तक नहीं की. ये वही समाज है जिसकी हम कल्पना करते आए हैं?

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