दो बहनें और एक मां. एक मां जिसने दो मर्दों से ताल्लुक बनाए. दोनों ने छोड़ दिया. दो बेटियां पैदा हुई. पिता अलग मां एक. बचपन गरीबी में गुजरा. भीख मांगते हुई. किसी फिल्म की कहानी में अगर तीन किरदारों का ऐसे इंट्रोडक्शन कराया जाए. तो आगे की कहानी आप लगभग खुद गेस कर लेंगे. कहानी जज़्बे की हो सकती है. कहानी हिम्मत की हो सकती है. कहानी मतभेदों की भी हो सकती है. लेकिन क्या ये कहानी डरावनी हो सकती है? हां. अगर ये कहानी असली जिंदगी में रची गई हो. आज आपको सुनाएंगे कहानी तीन औरतों की. तीन महिलाएं जिन्होंने 42 बच्चों का क़त्ल कर डाला. क़त्ल की बात जितनी डरावनी है. उससे भी भयावह है वो वजह. जिसकी वजह से ये क़त्ल हुए. पूरा किस्सा जानने के लिए देखें तारीख का ये एपिसोड.
तारीख: 42 बच्चों के सीरियल मर्डर को फांसी क्यों नहीं हुई?
दो बहनें और एक मां. एक मां जिसने दो मर्दों से ताल्लुक बनाए. दोनों ने छोड़ दिया. दो बेटियां पैदा हुई. पिता अलग मां एक. बचपन गरीबी में गुजरा. भीख मांगते हुई. किसी फिल्म की कहानी में अगर तीन किरदारों का ऐसे इंट्रोडक्शन कराया जाए.
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