एक पुरानी कहानी है. सिकंदर को दुनिया जीतनी थी. उसकी सेनाओं से तमाम देशों को घुटने पर ला दिया लेकिन जब वो अफ़ग़ानिस्तान पहुंचा, उसे मुंह की खानी पड़ी. सिकंदर की सेनाओं ने तीन साल तक अफ़ग़ानिस्तान में डेरा जमाए रखा. इसके बाद भी नतीजा सिफर था. एक रोज़ सिकंदर के पास एक चिट्ठी आई. उसकी मां ने इस चिट्ठी में उसे कुरेदते हुए पूछा था,
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"तुम कैसे योद्धा हो, इतनी छोटी से जमीन जीतने में तुम्हें इतना वक्त लग रहा है?"
सिकंदर ने खत का जवाब नहीं दिया. बस अफ़ग़निस्तान के तीन इलाकों की मिट्टी लेकर अपनी मां के पास भिजवा दी. साथ में लिखा , इसे बगीचे में डाल देना. सिकंदर की मां ने ऐसा ही किया. अगले रोज़ उस शहर में लड़ाई शुरू हो गयी. लोक एकदूसरे की जान के प्यासे हो गए. सिकंदर की मां को उसके सवाल का जवाब मिल चुका था.
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