
स्मार्ट सिटी की 'ज़मीनी हकीकत' जानने के लिए हमने शहर चुना आगरा.
बीजेपी ने वादा क्या किया था?
जनवरी 2014. देश लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर ही रहा था. हर पार्टी अगले पांच साल के लिए अपना-अपना विजन बता रही थी. तभी नरेंद्र मोदी ने एक टर्म कॉइन किया. स्मार्ट सिटीज. मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा था क्यों न 100 नए शहर बनें. फिर आई तारीख 26 मार्च 2014. बीजेपी ने अपना मेनिफेस्टो जारी किया. मेनिफेस्टो यानी दावों की वो किताब जो राजनीतिक पार्टियां चुनाव से ठीक पहले जनता के सामने रखती हैं. बीजेपी का मेनिफेस्टो 52 पेज का था. पेज नंबर 18 पर जाते ही ये योजना दिखती हैः
चुनाव से पहले मोदी जो बात भाषणों में कहते थे वो बीजेपी के घोषणापत्र में भी आ गया.
मोदी सरकार का एलान
घोषणापत्र में बीजेपी ने लिखा कि हम शहरों में बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए अर्बनाइजेशन यानी शहरीकरण को चुनौती नहीं बल्कि मौके की तरह लेंगे. आगे लिखा हम 100 नए शहर बनाने की शुरुआत करेंगे. जो लेटेस्ट टेक्नॉलीज़ से लैस होंगी जहां का बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर दुरुस्त होगा. फिर आई तारीख 16 मई 2014. इन्हीं दावों के बूते पर बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब रही. मोदी सरकार ने कोशिश की कि जो वादा किया गया उस पर काम शुरू हो. 25 जून 2015 को दिल्ली के विज्ञान भवन में देश भर के 500 नगर निकाय यानी म्यूनिसिपल बॉडीज के मेयर, कमिश्नर को बुलाया गया. पीएम मोदी खुद शामिल हुए. साथ थे आज के उपराष्ट्रपति और तब के शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू. इस दिन भारत सरकार ने देश में 100 स्मार्ट शहर बनाने का औपचारिक एलान किया.
25 जून 2015 को लॉन्च के वक्त पीएम मोदी ने ये पोस्टर शेयर किया था.
यहां से एक लंबी प्रक्रिया चल निकली. हर शहर से कहा गया कि वो प्लान भेजें और बताएं कि क्यों और कैसे उनका शहर स्मार्ट बन सकता है. शहर कैसे स्मार्ट होगा इसके लिए तीन में से एक विकल्प चुनना होगा.

ज्यादातर शहरों की तरह आगरा ने भी रेट्रोफिटिंग का विकल्प चुना. (ग्राफिकः दी लल्लनटॉप)
आगरा का नाम 28 जनवरी 2016 को जारी हुई पहली लिस्ट में नहीं था. आगरा की बारी आई दूसरी लिस्ट में जो 20 सितंबर 2016 को जारी हुई. पीएम मोदी 9 जनवरी 2019 को आगरा पहुंचे थे. मोदी आगरा में स्मार्ट सिटी योजनाओं से जुड़ी कई योजनाओं की शुरुआत कर आए.
हमने स्मार्ट सिटी की जमीनी हकीकत पता लगाने के लिए आगरा को चुना. क्योंकि यूपी से राज्यसभा सांसद हैं हरदीप पुरी जो शहरी विकास मंत्री हैं. 3 सितंबर 2017 से वो यह मंत्रालय संभाल रहे हैं. आगरा सहित देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाना उनकी ही जिम्मेदारी है.
स्मार्ट सिटी योजना में क्या होगा?
- पांच साल में भारत में 100 स्मार्ट शहर बनाए जाएंगे. केंद्र सरकार और स्थानीय निकायों की साझेदारी से.
- एक स्मार्ट सिटी का सालाना बजट 200 करोड़ होगा. 100 करोड़ केंद्र देगा, 100 करोड़ राज्य सरकार देगी, यानी पांच साल में 1 हजार करोड़.
- अलग-अलग डिपार्टमेंट इन शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए अपनी-अपनी योजनाएं भी चलाएंगे.
- स्मार्ट सिटी की तय परिभाषा नहीं है. लेकिन इनमें मूल तत्व ये होंगे - 24 घंटे बिजली. हर वक्त पानी. कूड़ा-कचरा निपटाने की दुरुस्त व्यवस्था. काबिल पब्लिक ट्रांसपोर्ट. गरीबों के लिए सस्ते घर. ई-गवर्नेंस. बेहतर पर्यावरण. स्वास्थ्य और शिक्षा. महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों की सुरक्षा की व्यवस्था.
क्या पूरे शहर में स्मार्ट सिटी का काम चल रहा है?
यहां हम अंदर घुसे तो हमारी मुलाकात कंपनी को चलाने वाले अधिकारियों से होती है. तब हमें पहली बात पता चलती है कि दरअसल पूरा आगरा शहर स्मार्ट नहीं होने वाला. आगरा नगर निगम के अंदर 100 वार्ड आते हैं. इनमें से सिर्फ 9 वार्ड्स को चुना गया और सिर्फ उन्हें ही स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत लिया है. मतलब नगर निगम के अंतर्गत आने वाले आगरा का ग्यारहवां हिस्सा ही स्मार्ट बनेगा. इसे एरिया बेस्ड डेवलेपमेंट कहते हैं. मतलब खास तौर पर एक हिस्से को चुनकर वहां विकास के काम करना. इसके अलावा कुछ प्रोजेक्ट्स ऐसे भी हैं जो पैन सिटी में आते हैं. मतलब कुछ काम ऐसे हो रहे हैं जिनका दायरा इन 9 वार्ड के बाहर तक है.
आगरा नगर निगम के अंतर्गत आने वाली कंपनी. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
नगर निगम को स्मार्ट सिटी पर सलाह कौन देता है?
शहर स्मार्ट कैसे बनेगा इसकी प्लानिंग से लेकर मॉनिटरिंग तक की जिम्मेदारी के लिए एक कंसल्टेंसी हायर की जाती है. आगरा के लिए ये काम मुंबई में रजिस्टर्ड कंपनी दारा शॉ करती है. दारा शॉ कंपनी की पूरी टीम नगर निगम की इसी बिल्डिंग के उस हिस्से में बैठती है जिसके बाहर आगरा स्मार्ट सिटी लिमिटेड का बोर्ड लगा है. हमने इस कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट आनंद मेनन से पूछा कि सिर्फ 9 वार्ड क्यों? वो कहते हैं -"इन्हीं 9 वार्ड के इर्द-गिर्द है ताजमहल. यहां ही टूरिस्ट आता है. इसी को ध्यान में रखकर चुना."

आगरा स्मार्ट सिटी को कंसल्ट कर रही कंपनी दाराशॉ के वाइस प्रेसिडेंट आनंद मेनन. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
नगर निगम के दफ्तर के अंदर जहां आगरा स्मार्ट सिटी का दफ्तर है उसी के अंदर बनना है एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर . जिसे शॉर्ट में ICCC कहते हैं. ये हर स्मार्ट सिटी में बनना है. शहर में लगे सीसीटीवी, ट्रैफिक की बत्तियों और कचरा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग के लिए. मेनन कहते हैं -
"ये सेंटर 1 जुलाई 2019 तक पूरा हो जाएगा. शहर के 122 चौराहों की मॉनिटरिंग होने लगेगी."
आगरा के स्मार्ट स्कूल
अब बारी आई जमीन पर जाने की. हमने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े सरकारी अधिकारी से पूछा - बताएं कौन सा ऐसा काम है आपका जो पूरा हो गया है, या जिसे देखकर कह सकें कि हां ये काम है जो स्मार्ट सिटी वाला है? हमें बताया गया नगर निगम के दो स्कूल हैं. जो स्मार्ट स्कूल भी बन चुके हैं और स्मार्ट क्लासेज भी चलने लगी हैं. हम पहुंचे ताजगंज के बॉयज इंटर कॉलेज.
आगरा के ताजगंज इलाके का बॉयज इंटर कॉलेज. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
यहां जाकर हमें पता लगा कि अभी इस स्कूल को स्मार्ट बनने में बहुत देर है. अभी तो बिल्डिंग ही बन रही है. जाहिर है वो अपना वक्त लेगी. फिर इसकी हर क्लास को डिजिटली इनेबल करने के लिए कुछ और वक्त लगेगा. यहां से निकले तो हम पहुंचे लड़कियों के लिए बने हाईस्कूल में. हमें पहुंचते हुए शाम हो गई थी तो स्कूल तो बंद था. लेकिन हमें वहां चल रहा काम दिखा. हमें जगह-जगह बिखरा बिल्डिंग मैटिरियल दिखा. एक बंद क्लासरूम के बाहर पट्टी चिपकी दिखी - 'वेलकम टु स्मार्ट क्लासरूम अंडर आगरा स्मार्ट सिटी.'

ताजगंज इलाके में लड़कियों के इस हाईस्कूल में भी स्मार्ट सिटी के तहत काम चल रहा है. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
आगरा की स्मार्ट रोड
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट स्मार्ट स्कूल की पड़ताल करते-करते रात हो चुकी थी. अगले दिन सुबह होते ही हम आगरा की स्मार्ट रोड ढूंढने निकले. आगरा की फतेहाबाद रोड को स्मार्ट रोड बनाया जा रहा है. यमुना एक्सप्रेस वे जहां खत्म होता है ठीक उसी जगह से शहर के अंदर की तरफ जाने वाली रोड. इसको चौड़ा करने का काम चल रहा है. लगभग दोगुना चौड़ा. इसकी जद में कुछ घर आ रहे हैं जिनके एक हिस्से को प्रशासन तोड़ दे रहा है. इसी रोड किनारे के एक पुराने घर के आंगन में अखबार पढ़ रहे बुजुर्ग को अपना घर टूट जाने से खास शिकायत नहीं है. उन्हें उम्मीद है कि आगरा स्मार्ट शहर बनेगा तो यहां रोजगार बढ़ेगा. मॉल खुलेंगे. ज्यादा लोग आएंगे और उनकी जिंदगी आसान होगी.
ये बुजुर्ग उसी आंगन में बैठे हैं जिसके सामने वाली रोड को स्मार्ट रोड बनाना है. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
आठ किलोमीटर आगरा की स्मार्ट रोड मतलब रोड के इधर-उधर या बीच में कोई भी बिजली का खंभा नहीं मिलेगा. सारे तार अंडरग्राउंड होंगे. प्रॉपर ट्रैफिक लाइट होंगी जो ऑटोमेटिक चलेंगी. सड़क से जुड़ने के लिए तय इन पॉइंट और बाहर निकलने के लिए तय आउट पॉइंट होंगे यानी ऐसा नहीं है कि आप कहीं से भी घुस गए और कहीं से भी निकल लिए. सड़क के किनारे पैदल चलने वालों के लिए अलग रास्ता होगा. दुकानदारों, खरीदारों के लिए पार्किंग की व्यवस्था होगी.
सड़क को चौड़ा करने का काम शुरू तो हो गया है लेकिन इसके स्मार्ट रोड बनने में कई अड़चनें हैं. मसलन इस रोड के साथ-साथ बनने वाला एक नाला. ये नाला शहर के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग डिपार्टमेंट की जमीन से होकर गुजरना है. नाला तकरीबन 12 किलोमीटर लंबा होगा. लेकिन प्लानिंग को लेकर जल्दबाजी कहिए या नगर निगम का कच्चा होमवर्क. संबंधित विभागों से पहले से NOC नहीं ली गई. एनओसी माने नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट. अब जब काम शुरू हो रहा है तो संबंधित विभाग अपनी-अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं. ऐसे में हो ये रहा है कि नाला कुछ दूर तक बना. फिर उसके आगे किसी विभाग ने आपत्ति उठा दी तो उस हिस्से में काम रोकना पड़ा. उतना हिस्सा छोड़ उसके आगे फिर काम शुरू कर दिया गया.

ये वो नाला है जो एनओसी के चक्कर में फंसा हुआ है. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
हमने जब एनओसी वाला सवाल आगरा नगर निगम के उपसभापति शरद चौहान से पूछा तो वो कहते हैं -
"निश्चित रूप से एनओसी की दिक्कत आ रही है. थोड़ी बहुत विभागों की दिक्कत आ रही है. कहीं वन विभाग की जमीन है. कहीं किसी और डिपार्टमेंट की. लेकिन उन्हें ठीक कर लिया जा रहा है ."

आगरा नगर निगम के उपसभापति शरद चौहान. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
तो आगरा की स्मार्ट रोड का क्या हुआ? काम चल रहा है. लेकिन कागजों पर बहुत कुछ होना बताया जा रहा है. जो जमीन पर फिलवक्त दिख नहीं रहा. इस 8 किलोमीटर लंबी रोड के लिए करीब 100 करोड़ का बजट है. सड़क का चौड़ीकरण, उसके बाद एक पैदल मार्ग. सड़क के किनारे नाला और दूसरा अंडरग्राउंड यूटिलिटी डक्ट. अभी सब कुछ बनना बाकी. लेकिन ये सड़क कितनी स्मार्ट बन पाएगी इसके लिए हमें और इंतजार करना पड़ेगा.
आगरा के पुराने घर बाहर से स्मार्ट होंगे?
इसके बाद हम निकल पड़े हेरिटेज के नाम पर आगरा में हो रहे कामों की जमीनी हकीकत पता करने. स्मार्ट सिटी प्लान में फसाड इंप्रूवमेंट ऑफ ट्रेडिशनल हाउसेज भी हो रहा है. यानी पुरानी नक्काशी के घरों को उसी तरह से विकसित करना जैसे वो असल में थे. शहर के 45 पुराने घरों के बाहरी एरिया को सुधारने का प्लान है. बजट है एक करोड़ का. लेकिन अभी तक सिर्फ 3 मकानों में काम चल रहा है. 10 घरों से एनओसी मिलने की उम्मीद है .
आगरा के रावतपाड़ा इलाके में पुराने घरों के बाहरी हिस्से की मरम्मत का काम. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
इस काम में भी कई पेंच हैं. मकान मालिकों से पहले से एनओसी नहीं ली गई. यहां के मकानों के मालिकाना हक में भी बड़ा झोल है. एक घर की अलग-अलग मंजिलों के मालिक अलग-अलग हैं. ऐसे में एक घर के लिए अलग-अलग लोगों की एनओसी लेने में प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों और काम कर रहे ठेकेदार को परेशानी हो रही है. साथ ही लोगों में भरोसा नहीं बन पाया है कि सरकार की नीयत इस काम के पीछे साफ है. उन्हें इसके बदले पैसे नहीं देने पड़ेंगे. या कहीं उनके मालिकाना हक पर इसका असर तो नहीं पड़ेगा ये भी उनकी चिंता में शामिल है.
स्मार्ट टॉयलेट
स्मार्ट स्कूल - काम जारी, स्मार्ट सड़क - काम शुरू, स्मार्ट नाला - एनओसी में फंसा, स्मार्ट पुराने घर - 45 में से सिर्फ 3 का काम चालू. इस स्थिति को लेकर हम आगे चले तो ताजगंज इलाके में ही हमें दिखाए गए ई-टॉयलेट. मतलब इलेक्ट्रॉनिक टॉयलेट. दावा ऐसा है कि इसमें सब कुछ ऑटोमेटिक होगा. 5 रुपये का सिक्का डालकर इसका दरवाजा खुलेगा. ग्रीन बत्ती जलेगी तो मतलब टॉयलेट खाली है. किसी ने 5 का सिक्का डाला तो थोड़ी देर बत्ती ऑरेंज होगी. जब तक बंदा अंदर रहेगा बत्ती पीली रहेगी.
ये ई-टॉयलेट बन रहे हैं, दावा है कि इनमें पानी भी खत्म होगा तो कंट्रोल रूम को पता चल जाएगा. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
स्मार्ट सिटी को लेकर उठ रहे सवाल
ई-टॉयलेट की योजना भी अभी कहीं आधे और कहीं पूरे के बीच में खड़ी है. लेकिन सरकार के तो इस 26 मई को पूरे पांच साल हो जाएंगे. तो कहीं ऐसा तो नहीं कि स्मार्ट सिटी को लेकर सरकार कनफ्यूज है? क्या सरकार की शहरों को लेकर समझ गड़बड़ है? ये सवाल उठाया तकरीबन 70 बरस के बृज मंडल हेरिटेज कन्जर्वेशन सोसाइटी के प्रेसिडेंट सुरेंद्र शर्मा ने."आगरा के अंदर कोई जगह है नहीं जिसे स्मार्ट सिटी बना सकते हैं. यहां की पुरानी चीजों को हटा नहीं सकते. सड़क, गलियां चौड़ी हो नहीं सकती तो कैसे बनेगा स्मार्ट सिटी. जगह है नहीं. स्मार्ट सिटी से आगरे का भला होना नहीं है, न स्मार्ट सिटी बन सकती है. कितने मकान, सड़कें तोड़ेगे. वरना कैसे स्मार्ट सिटी बनाओगे?"

बृज मंडल हेरिटेज कन्जर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
सुरेंद्र शर्मा के सवाल थमते नहीं हैं. वो कहते हैं - ये शहर है क्योंकि यमुना है. यमुना का पानी कम हो रहा है तो ये शहर बचेगा कैसे?
"आगरा आते-आते यमुना का पानी खत्म हो जाता है. यमुना यहां नाला है सिर्फ नाला. वहां जाएंगे तो आप अपनी नाक बंद कर लेंगे. जहां पीने का पानी नहीं, वहां क्या स्मार्ट बनाएंगे?"सरकार कहती है कि नमामि गंगे योजना के तहत यमुना की भी सफाई हो रही है. लेकिन आगरा के रहवासी, डॉक्टर देवाशीष भट्टाचार्य हमें अपने साथ ताजमहल के उस पिछले हिस्से में ले जाते हैं जहां से यमुना बहती है. कहते हैं कि यमुना में खुलेआम गंदे नाले समा रहे हैं.
"अभी भी नाले बदस्तूर बह रहे हैं. मैंने एक आरटीआई डाली थी उसमें उन्होंने बताया कि 90 नाले गिर रहे हैं. 2 साल पहले की आरटीआई है. 8 टैप कर लिए हैं. 400 करोड़ रिलीज किए थे. पैसे लैप्स हो गए. यमुना का कुछ नहीं हुआ. 61 छोटे बड़े नाले अभी भी गिर रहे हैं."

डॉक्टर देवाशीष भट्टाचार्य अपना क्लीनिक चलाते हैं, साथ में पर्यावरण के मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
देवाशीष हमें अपने मोबाइल से शूट किया हुआ वो वीडियो भी दिखाते हैं जिसमें यमुना की दुर्गति का सबूत है. यमुना आरती स्थल एत्मादौला व्यू प्वाइंट. 1 अप्रैल 2015 से यहां पर यमुना की पूजा होती है. वो कहते हैं ठीक इसी जगह गंदे नाले यमुना में गिरते हैं. शहर का एक बड़ा भैरों नाला भी खुलेआम यमुना में गिर रहा है और इसे अभी तक रोका नहीं जा सका है. डॉक्टर भट्टाचार्य कहते हैं पहले यमुना को साफ करिए. फिर तय करके ये बता दीजिए कि आगरा को स्मार्ट सिटी बनाना है या हैरिटेज सिटी.
इस कन्फ्यूजन को दूर कर देते हैं आगरा नगर निगम के उपसभापति शरद चौहान. वो कहते हैं -
"हम आगरा को स्मार्ट सिटी ही बनाएंगे. हैरिटेज के लिए सरकार और भी काम कर रही है. आगरा का हैरिटेज सुरक्षित रहेगा."
क्या स्मार्ट सिटी की प्लानिंग में कमजोरी है?
हम शहर में घूम रहे थे तो ये सवाल बार-बार उठ रहे थे कि इन संकरी गलियों, इस पुराने अंदाज के शहर को स्मार्ट बनाएंगे कैसे? कहीं स्मार्ट सिटी बनाने को लेकर निगम की प्लानिंग में जल्दबाजी तो नहीं हुई? क्या इस स्मार्ट सिटी में पुराने हैरिटेज को बचाने की चिंताओं को शामिल किया गया? आगरा टूरिज्म डेवलेपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष संदीप अरोड़ा कहते हैं -"स्मार्ट बनाने के लिए कागजी स्मार्ट होना जरूरी नहीं है. स्मार्ट बनाने के लिए सबसे पहले स्मार्ट योजना जरूरी है. उसमें लोगों की भागीदारी जरूरी है. स्मार्ट सिटी प्रोजक्ट में न हमसे कुछ पूछा गया न कुछ बताया गया. हमसे यहां की जरूरतों के बारे में नहीं पूछा गया. हमसे पूछकर विजन डॉक्यूमेंट नहीं बना. इंडस्ट्री वालों से पूछकर बनाया है."

ताजमहल के पास संदीप का होटल है, वो स्मार्ट सिटी के नाम पर चल रहे काम से संतुष्ट नहीं हैं. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
संदीप की आवाज इसीलिए जरूरी है क्योंकि वो ताजमहल से कुछ फर्लांग की दूरी पर रहते हैं. होटल चलाते हैं. कहते हैं जिन पर्यटकों के नाम पर सुविधाएं बढ़ाने का दावा किया जा रहा है, जिन पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए स्मार्ट सिटी बनाने की बात हो रही है वो स्मार्ट सिटी जमीन पर है कहां.
नगर निगम की समझ पर सवाल क्यों?
पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद आप ये जरूर पूछेंगे - तो निकला क्या? स्मार्ट सिटी का प्रपोजल बनाने बैठे आगरा नगर निगम ने प्रस्ताव भेजा कि शहर में एक मल्टीलेवल पार्किंग बनाएंगे. इसे बनाने का बजट होगा 225 करोड़ का. इसे 10 करोड़ और लगाकर स्मार्ट पार्किंग सुविधाओं से लैस किया जाएगा. हाल ये है कि नगर निगम शहर में मल्टीलेवल पार्किंग के लिए जगह ही नहीं ढूंढ पाया. अब की स्थिति ये है कि इस शहर में फिलहाल कोई स्मार्ट पार्किंग नहीं बनने वाली है.इन सबके बीच एक उम्मीद उन लोगों को देखकर जगती है जो लगातार स्मार्ट सिटी के अंतर्गत हो रहे कामों में खुद को झोंके हुए हैं. जिस दाराशॉ कनसल्टेंसी की बात कर रहे थे हमें उसके अधिकारी और कर्मचारी हर वक्त काम पर दिखे. प्रोजेक्ट से जुड़े लोग फील्ड पर मुस्तैद थे. हम सुबह 11 बजे नगर निगम पहुंचे तो भी ये वहीं मौजूद अपना-अपना काम निपटा रहे थे. हम रात के करीब 11 बजे वहां पहुंचे तो उस वक्त भी वो स्मार्ट सिटी के कामों पर मीटिंग कर रहे थे.

बाईं तरफ दाराशॉ के टीम लीडर विनोद गर्ग, दाईं तरफ स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर संजय उपाध्याय. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
हम 12 और 13 अप्रैल को दो दिन आगरा में रहे. हमने स्मार्ट सिटी को लेकर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं से बात करने की कोशिश की. दोनों दिन लगातार म्यूनिसिपल कमिश्नर अरुण प्रकाश और मेयर नवीन जैन के दफ्तर गए. दोनों ही नहीं मिले. इसके अलावा भी डिविजनल कमिश्नर अनिल कुमार और आगरा शहर के सांसद राम शंकर कठेरिया को लगातार फोन किए. चारों में से किसी ने भी हमारी कई कॉल्स और मैसेजेस का जवाब नहीं दिया. सांसद महोदय का फोन एक बार उठा. हमने अपना परिचय दिया तो सॉरी रॉन्ग नंबर कहकर फोन काट दिया. आखिर में हमारी बात नगर निगम के उपसभापति शरद चौहान से हुई. उन्होंने तसल्ली से सारे सवालों का जवाब दिया.

जानकार कहते हैं कि यमुना में गंदगी और पानी की कमी की वजह से ताजमहल को भी नुकसान हो रहा है. (फोटोः दी लल्लनटॉप)
तो अब तक इस योजना का हासिल क्या निकला है?
- पूरा आगरा शहर स्मार्ट नहीं बनेगा. 100 में से इसके सिर्फ 9 वार्ड इस प्रोजेक्ट में शामिल किए गए हैं.
- कोई भी प्रॉजेक्ट दिखा नहीं जो अभी तक ठीक से पूरा हुआ हो. आगरा स्मार्ट सिटी कब बनेगी, इसकी कोई फिक्स डेट नहीं है.
- स्मार्ट सिटी के नाम पर कुछ अलग नहीं हो रहा. विकास कार्यों को ही स्मार्ट सिटी का नाम दे दिया गया है.
- प्लानिंग के स्तर पर कमजोरी दिखती है. एडवांस में NOC तक नहीं ली गई.
- स्मार्ट सिटी बनाना है या हैरिटेज सिटी, इसे लेकर भी कन्फ्यूजन है.
- प्रोजेक्ट का आखिरी टेंडर 24 घंटे पानी की सप्लाई और सीवरेज को लेकर है. ये खुला ही है फरवरी 2019 में है.
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