देश का सबसे चौचक यूथ शो, द लल्लनटॉप शो, जब शुरू होने वाला था, तो भीड़ गेट खुलने का इंतजार कर रही थी. जैसे ही गेट खुला और भीड़ दाखिल हुई, उसे पता लगा कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आने ही वाले हैं. फिर क्या था. सबने अपनी जगह पकड़ ली. सीएम योगी जब मंच पर आए तो आने के साथ ही जय श्री राम, भारत माता की जय और वंदेमातरम के नारे लगने लगे.

देश के सबसे चौचक शो के बारे में बताए आए इंडिया टुडे ग्रुप के डिजिटल हेड कमलेश किशोर सिंह ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रदेश का मुख्यमंत्री लल्लनटॉप है. लल्लनटॉप के बारे में बताते हुए कहा कि इसका मतलब कोई कानपुरिया ही बता पाएगा. उन्होंने लल्लनटॉप के बारे में कहा कि इसका संपादक भी लल्लनटॉप है, जो इंडिया टुडे ग्रुप का सबसे नया नवेला सदस्य है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब बोलने उठे, तो हॉल एक बार फिर तालियों के साथ ही जय श्रीराम के नारों से गूंजने लगा. मुख्यमंत्री ने मीडिया पर कहा कि समाज को दिशा देने में मीडिया की भूमिका है. लल्लनटॉप की भाषा पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया युवाओं की भाषा शुद्धि का काम करती थी. लोग अखबार पढ़ते थे. लोगों को इससे भाषा सुधारने में मदद मिलती थी.

युवाओं के शो में युवाओं पर फोकस करते हुए युवा मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान की पीढ़ी का आचरण देश का भविष्य तय करता है. युवाओं को अच्छी शिक्षा और रोजगार चाहिए. युवाओं को ऐसा खुला मैदान चाहिए, जहां वो अपनी मर्ज़ी से भविष्य की दिशा तय कर सकें. सीएम ने बताया कि इस कार्यक्रम से ठीक पहले नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी मिलने आए थे औौर बच्चों के साथ होने वाली हिंसा का तरीका पूछ रहे थे. फिर बारी आई सवाल जवाब की, जिसका मुख्यमंत्री ने बड़े ही लल्लनटॉप अंदाज में जवाब दिया.
1.छुटपन की क्या यादें हैं? पढ़ाकू थे कि डांट खाते थे?
मेरी कहानी भी वैसी ही है, जैसी बच्चों की होती है.
2.कोटद्वार आप स्नातक के लिए पहुंचे थे. आपके जीजाजी SFI से जुड़े थे. चाहते थे कि आप भी कॉमरेड बन जाएं?
छात्र जीवन में कई तरह के विचारों से सामना होता है. हमारा सामना SFI और NSUI से भी हुआ. जीवन का ध्येय राष्ट्र की सेवा था, इसलिए ABVP से जुड़ा. उससे जुड़कर जीवन की सार्थकता समझ में आई.
3.लेकिन सचिव पद का चुनाव तो ABVP से बागी होकर लड़ा?
ये सब बातें गौण हैं.
4.आपकी एक दंत कथा सुनी थी हमने. चुनाव के वक़्त आपके कमरे में चोरी हो गई थी?
स्वदेशी जागरण मंच का अभियान चल रहा था. रात को मंच के दफ्तर में सो गया. पीछे से घर में चोरी हो गई. मैं डर गया कि घर पर क्या कहूंगा, रात को कहां था. इसके चलते 10 दिन एक ही कपड़े में रहना पड़ा.
5. मैथ्स आपका पसंदीदा विषय है क्या?
मेरी रुचि थी. रुचि ना होती तो राजनीति में होता क्या. मैं विज्ञान की सीमा देखना चाहता था. मुझे लगा कि विज्ञान की सीमा सीमित है, तो आध्यात्म की ओर मुड़ गया.
6. महंत अवैद्यनाथ एम्स में भर्ती थे. आप मिलने गए थे उनसे?
मैं जब एम्स में महंत अवैद्यनाथ से मिलने गया, तो उनकी हालत खराब थी. मैं उनका इशारा समझ गया. उनसे मिलने गोरखपुर गया. यौगिक क्रियाएं सीखीं और संन्यास लिया.
7. नाथ संप्रदाय में दीक्षा की प्रक्रिया के बारे में कुछ बताइये?
बहुत कठिन होती है. गुरु जब दीक्षा देता है, तो कई मंत्र जपने होते हैं. अलग अलग तरह के. कुछ जोर से बोलने होते हैं, कुछ मन में. एक तरीका होता है, जपाजप। उसमें सांस का संतुलन शामिल होता है. युवाओं के लिए बहुत कारगर साबित होगा. जब घबराहट हो, तो कीजिए. सांस लेते समय श्वाश की प्रक्रिया पर मन को केंद्रित करें. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में मदद करेगी. दीक्षा में दूसरी प्रक्रिया होती है कर्ण छेदन. बहुत मुश्किल होती है. अगर उसे करने वाला परिपक्व नहीं होता, तो बहुत कठिन होता है.
8. दर्द तो बहुत होता होगा?
हां, दर्द तो होगा. 21 दिनों तक कान में डंठल डालते हैं. फिर मि्ट्टी के कुंडल डालते हैं. नाथ संप्रदाय की परंपराएं बड़ी कठिन होती हैं.
9. वो पहला छात्रों का विवाद कौन सा था, जिसमें आपने दखल दिया?
गोरखनाथ मठ बस आध्यात्मिक केंद्र भर नहीं है. लोग दूर दूर से वहां अपने बच्चों को पढ़ने भेजते हैं. बहुत गरीब छात्र आते हैं. एक बार छात्रावास में पुलिस आ गई. मैंने पता किया, छात्रों की गलती नहीं थी. मैंने आंदोलन किया. जांच हुई, जिसके बाद असली गुनाहगारों को सज़ा हुई.
10. डोम राजा का प्रसंग बताएं?
जब मेरे गुरु ने डोम राजा के घर सहभोज किया, तो डोम राजा और उनके परिवार की आंखों में आंसू आ गए. गोरखनाथ पीठ ने जाति भेद कभी नहीं माना. लोग साथ पंगत में बैठकर खाते हैं. नाथ संप्रदाय में हर जाति, हर धर्म का इंसान जुड़ सकता है. शर्त बस एक है, राष्ट्रवाद। ऐसा नहीं हो सकता कि कोई राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दे. ये नहीं हो सकता है कि आप नाथ सम्प्रदाय में दीक्षित हों और ये कहें कि हम राष्ट्रगान नहीं गाएंगे. 1986 में हुई उडूपी धर्म संसद में मेरे पूज्य गुरुदेव अवैद्यनाथ ने प्रस्ताव रखा कि छुआछूत शास्त्र सम्मत नहीं है. इसे सब शंकराचार्यों ने स्वीकार किया. अगर छुआछूत की परंपरा होती, तो वाल्मीकि और संत रविदास कैसे होते? आज केरल की सरकार ने 6 दलित पुजारियों की नियुक्ति की घोषणा की है. मुझे यह सुनकर हंसी आती है. मेरे गुरुदेव के नेतृव में संत समाज गोरखपुर में यह काम 1990 में कर चुका है.
11. हिंदू युवा वाहिनी कैसे बनी?
उस समय तक नेपाल में माओवाद चरम पर था. नेपाल सीमा पर चल रही राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए हिन्दू युवा वाहिनी बनी.
12. 2006 में संसद में रोने की घटना की वजह?
एक निर्दोष व्यापारी मारे जाने के बाद बीजेपी प्रदर्शन कर रही थी. मैं उस धरने पर भी नहीं था, कुशीनगर में था. मुझे गोरखपुर की सीमा पर रोक कर गिरफ्तार कर लिया गया. जब एक सांसद को न्याय नही मिल पा रहा है तो आम आदमी को कैसे मिलेगा.
13. हॉलीवुड के एक ऐक्टर हैं वीन डीजल. यूपी चुनाव के दौरान एक फोटो बहुत वायरल हुई थी, जिसमें विन डीजल और आपमें समानता दिखाई गई थी? मैनें 25 साल से कोई फिल्म नहीं देखी है. इस वजह से मैं इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं.
हिंदू समाज पर योगी ने रखी राय
सीएम ने कहा कि गोरक्षपीठ 1934 से राम जन्मभूमि आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है. एक शैव परम्परा का पीठ, एक वैष्णव परम्परा के आंदोलन का नेतृत्व कर सकता है, इससे बड़ी समरसता कहां हो सकती है. पीठ ने कभी जाति धर्म का भेद नहीं किया. मेरे गुरु अवैद्यनाथ ने व्यापक धर्मांतरण की घटना के बाद खुद को राजनीति से अलग कर लिया. हिंदू समाज बहुत उदार है. इसके अंदर अपनी कमियों को दूर करने की योग्यता है. हिन्दू समाज इतना उदार है कि किसी कालखण्ड में कोई बुराई अगर धर्म में घुस गई है तो उसका परिमार्जन करने को तैयार है.
जब गुरु ने योगी से कहा पलायन मत करो
लल्लनटॉप शो में मुख्यमंत्री ने बताया कि पहली बार सांसद बनने के 5-6 महीने बाद ही मैंने अपने गुरु से कहा कि राजनीति मुझे जचती नहीं है. मेरे गुरु ने कहा कि पलायन मत करो. इसे सेवा का जरिया बनाओ. इसमें रमो मत. 1999 में 13 महीने बाद जब मेरी जीत का अंतर महज 7 हजार का रह गया था, तो मुझे लगा कि मेरा निर्णय सही था, मुझे चुनाव नहीं लड़ना चाहिए.
कुछ खास बातें जो योगी ने कहीं
#CBSE के पैटर्न पर 166 नए मॉडल स्कूल बनेंगे.
#पाठ्यक्रम में जल्द ही बदलाव होगा.
#दूसरे शहर काम करने गए मजदूरों के बच्चों के लिए काम करेंगे. उनके लिए खास स्कूल बनाएंगे. उनके लिए खेल और स्किल की ट्रेनिंग देंगे.
#हिन्दू धर्म नहीं एक सांस्कृतिक संबोधन है
#धर्म को किसी उपासना विधि के दायरे में कैद नहीं कर सकते
#धर्म निरपेक्ष कोई शब्द नही हैं
#धर्म से निरपेक्ष हो जाएंगे तो पतन की पराकाष्ठा पर पहुंच जाएंगे
#साम्यवाद की एक थ्योरी है। एक झूठ को सौ बार कहो तो वो सच हो जाता है।
#आज इस देश के मूल समाज को साम्प्रदयिक कहते हैं, जो सबके सुख की कामना करता है. कोई एक उदाहरण बताइए कि वृहद हिन्दू समाज ने संकट के समय हर जाति, धर्म, सम्प्रदाय को जगह नहीं दी हो.
योगी आदित्यनाथ के सेशन का वीडियो-