इस बार ऐसा हुआ है तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के साथ. यूं कहें कि ये सब उनके साथ नवंबर 2020 से चल रहा है. शॉर्ट में कहानी समझ लीजिए. फिर अभी वाली ख़बर बताते हैं.
अक्टूबर 2020 में फ़्रांस में एक टीचर सैमुअल पैटी का गला रेत दिया गया. मारने वाला लड़का चेचन मूल का मुस्लिम था. वो टीचर को जानता तक नहीं था. उसे बस इतना पता था कि पैटी ने अपनी क्लास में पैगंबर मुहम्मद का कार्टून दिखाया था. इस हत्या के बाद पूरे फ़्रांस में हंगामा खड़ा हो गया. हमले के ख़िलाफ़ मार्च निकाले गए. फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि कार्टून दिखाए जाते रहेंगे. ये उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है. उन्होंने ये भी कहा कि इस्लाम में पुनर्जागरण की ज़रूरत है.

अब्दुल्लाख़ अंज़ोरोव चेचेन ने सैमुअल पैटी की हत्या कर दी थी. (तस्वीर: एपी)
तहरीक-ए-लब्बैक
इससे मुस्लिम मुल्क़ नाराज़ हो गए. उन्होंने फ़्रांस और मैक्रों के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया. फ़्रेंच प्रोडक्ट्स का बॉयकॉट होने लगा. इसका असर पाकिस्तान में भी दिखा. वहां एक संगठन है तहरीक-ए-लब्बैक (TLP). 2015 में बना. ये ईशनिंदा यानी पैगंबर मुहम्मद की शान में गुस्ताख़ी करने वालों को मौत की सज़ा देने की मांग करता है. T
LP को उस समय एक बड़ा मौका दिखा. अपना बेस मज़बूत करने का. नवंबर 2020 में इसने रावलपिंडी और राजधानी इस्लामाबाद को जाम कर दिया. मांग रखी कि पाकिस्तान में फ़्रांस के दूतावास को खाली कराया जाए और फ़्रेंच प्रोडक्ट्स को बैन किया जाए. देरी हुई तो इस्लामाबाद पर धावा बोल दिया जाएगा.
खतरा था कि अगर भीड़ राजधानी में घुसी तो बाकी देशों के दूतावास भी खतरे में आ जाएंगे. इंटरनैशनल कम्युनिटी को समझाना मुश्किल हो जाएगा. इससे बचने के लिए सरकार ने TLP से बात की. उस वक़्त पार्टी के मुखिया थे ख़ादिम हुसैन रिज़वी. वो अपनी मांग पर कायम रहे. सरकार ने मांगें मान ली. कहा, थोड़ा समय दीजिए. समय मिला. फ़रवरी 2021 तक का. 17 फ़रवरी तक फ़्रेंच राजदूत को निकालने की बात पर सहमति बनी.

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों. (तस्वीर: एपी)
नेतृत्व बदला था, संगठन नहीं
इस बातचीत के दो दिन बाद खादिम रिज़वी की मौत हो गई. TLP के मुखिया बने उनके बेटे साद रिज़वी. सरकार को लगा कि संगठन कमज़ोर पड़ गया. मांग न भी मानी जाए तो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. लेकिन ये उनकी भूल थी. नेतृत्व बदला था, संगठन नहीं. साद रिज़वी ने फ़रवरी की शुरुआत में धमकी दी कि बड़ा रिएक्शन होगा. सरकार ने फिर से TLP से समझौता किया. नई डेडलाइन तय की. 20 अप्रैल 2021 की. इस तारीख़ तक फ़्रेंच राजदूत को निकाले जाने का प्रस्ताव संसद में पेश करने की बात कही.
डेडलाइन आने से ठीक पहले साद रिज़वी को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया. वो भी बीच सड़क पर. सरकार ने यहां पर एक और भूल की. साद रिज़वी के अरेस्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. TLP के नेताओं ने ये समर्थकों से सड़कों पर उतरने के लिए कहा. इसके बाद पूरे देश में प्रोटेस्ट शुरू हो गए. कई बड़े हाईवे घंटों तक जाम रहे. कई जगहों पर हिंसा भी हुई. 30 से ज़्यादा कारों में आग लगा दी गई. पुलिस पर पत्थरबाजी की गई. दोनों तरफ से बड़ी संख्या में लोग घायल हुए. कई लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी.

TLP के लोगों ने कई पुलिसकर्मियों को अगवा भी कर लिया था (तस्वीर: एपी)
TLP की क्या मांगे हैं?
16 अप्रैल को पाकिस्तान सरकार ने TLP को ‘प्रतिबंधित संगठन’ घोषित कर दिया. इस ऐलान से कुछ खास फर्क़ नहीं पड़ा. बल्कि उपद्रव और बढ़ गया. एक जगह पर प्रदर्शनकारियों ने 11 पुलिसवालों को बंधक बना लिया. बाद में सेंट्रल डेलिगेशन ने बातचीत कर पुलिसवालों को तो छुड़ा लिया. लेकिन TLP का प्रदर्शन खत्म नहीं करवा पाए.
ये खत्म हुआ तब, जब सरकार ने TLP की चार मांगों को मानने का ऐलान किया. ये मांगें क्या थीं? - फ़्रांस के राजदूत को निकालने का प्रस्ताव संसद में पेश किया जाए. - साद रिज़वी को रिहा किया जाए. - और, TLP के प्रोटेस्टर्स पर जो भी केस दर्ज़ हैं, उन्हें वापस लिया जाए. - TLP पर लगा बैन हटाया जाए.

TLP के मुखिया साद हुसैन रिज़वी.
मंगलवार, 20 अप्रैल को सहमति बनते ही TLP ने प्रोटेस्ट वापस लेने का ऐलान किया. आगे क्या हुआ?
पहली मांग पर उसी शाम नेशनल असेंबली की आपात बैठक बुलाई गई. इसमें प्रस्ताव पेश किया गया. फ़्रांस के राजदूत को बाहर निकाला जाए या नहीं, इसपर बहस शुरू हुई. मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (PML-N) ने कहा कि प्रस्ताव में कुछ खामियां हैं. उन्हें इसमें सुधार के लिए समय चाहिए. बाकी विपक्षी पार्टियों ने भी इमरान सरकार पर अंधेरे में रखने का आरोप लगाया. मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी. अब दोनों पक्ष साथ बैठकर प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे. नेशनल असेंबली की अगली बैठक 23 अप्रैल को बुलाई गई है. इसमें प्रस्ताव पर आगे बात होगी.
दूसरी मांग साद रिज़वी की रिहाई की थी. उन्हें लाहौर के कोट लखपत जेल से रिहा कर दिया गया है. उनकी रिहाई का ऐलान सुबह में ही हो चुका था. लेकिन देर शाम तक रिटेन ऑर्डर जेल में नहीं पहुंचा था.
तीसरी मांग TLP समर्थकों पर दर्ज़ केस वापस लेने की थी. सरकार ने इसपर हामी भरी है. जिस तरह का समर्थन TLP को मिल रहा है, इस मांग से मुकरना सरकार के लिए मुश्किल होगा.

TLP की मांग है कि पाकिस्तान में फ़्रांस के दूतावास को खाली कराया जाए. (तस्वीर: एपी)
चौथी मांग थी संगठन पर लगा प्रतिबंध हटाने की. इमरान ख़ान ने ऐसा करने से साफ़ मना कर दिया है. उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है. अगर TLP को प्रतिबंध हटवाना है तो उन्हें कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना होगा.
चारों मांगों में से जो सबसे अहम है, वो है फ़्रेंच राजदूत का निष्कासन. पूरा मसला यहीं पर आकर फंस रहा है. पाकिस्तान सरकार के लिए ये कदम आत्मघाती साबित हो सकता है. ये बात ख़ुद प्रधानमंत्री इमरान ख़ान कह चुके हैं. सोमवार, 19 अप्रैल को उन्होंने देश के नाम संबोधन दिया. इसमें उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान, फ़्रांस के राजदूत को निकालता है तो देश को भारी परेशानी का सामना करना पडे़गा.
इमरान ख़ान ने क्या-क्या डर गिनाए?
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की टेक्सटाइल इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा यूरोप में जाता है. अगर यूरोप ने ट्रेड पर रोक लगा दिया तो लोग भूखों मरने लगेंगे.
इमरान ख़ान ने अपने संबोधन में डर जताया कि यूरोपियन यूनियन के सारे देश अपने यहां से पाकिस्तान के राजदूतों को बाहर निकाल सकते हैं. उन्होंने कहा कि ये पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका होगा.

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान. (तस्वीर: एपी)
उन्होंने अपने संबोधन में इस डिसिजन के असर को समझाने की पूरी कोशिश की. इमरान ख़ान ने कहा कि उनकी सरकार और TLP का मकसद एक है. बस रास्ते अलग-अलग हैं. उनकी सरकार इंटरनैशनल फ़ोरम के जरिए ईशनिंदा को रोकना चाहती है, जबकि TLP हिंसा के जरिए. इस संबोधन के अगले ही दिन उनकी सरकार को झुकना पड़ा. TLP की डिमांड के अनुसार नेशनल असेंबली में प्रस्ताव पेश करना पड़ा.
अभी जो स्थिति है, उसमें इमरान ख़ान दो नावों पर एक साथ सवार दिख रहे हैं. अगर फ़्रांस के राजदूत को निकालने का प्रस्ताव पास हुआ तो इकोनॉमी पर झटका. यूरोप से दुत्कार मिल सकती है. अगर प्रस्ताव पास नहीं हुआ तो TLP फिर से प्रदर्शन करने उतरेगी. पहले से ज़्यादा हिंसक होकर, अगर ऐसा हुआ तो इस बार उन्हें मना पाना आसान नहीं होगा.



















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