गांवों में किसी जगह पर कब्जा जमाने के लिए लोग पहले एक जगह गोबर फेंकना शुरू करते हैं. फिर वहां धीरे से एक खूंटा गाड़ देते हैं. खूंटा गड़ा नहीं कि गाय या भैंस लाकर बांध देते हैं. फिर टिन की छत लगा देते हैं. एक ईंट की बाउंड्री दे देते हैं. गेट लग जाता है. फिर एक दिन ऐसा आता है कि जमीन का असली मालिक वहां पहुंचता है, तो उसे अपनी ही जमीन में घुसने नहीं दिया जाता. कह दिया जाता है कि भैंस डिस्टर्ब हो जाएगी. बच्चा होने वाला है. फिर बच्चे का बच्चा होता है. ये सिलसिला चलता रहता है. फिर एक दिन मालिक को गली में घुसते देखते ही धुन दिया जाता है.खूंटा गाड़कर जगह हथियाने की यही कोशिश आजकल चीन करता है. अक्साई चिन से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक. हिंद महासागर से लेकर साउथ चाइना सी (South China Sea) तक. हांगकांग से लेकर ताइवान तक तो उसका कब्ज़ा पहले ही है. किताबों में इसे 'साम्राज्यवाद' कहते हैं.
अगर छोटे स्तर पर ऐसा हो, तो फौजदारी होती है, पर अगर बड़े देश ऐसा करें, तो युद्ध होते हैं.
चीन की हरकतों के ये कुछ नायाब नमूने हैं-
1. चीन हिंद महासागर पर घुसपैठ कर रहा है
अमेरिका का 'यूएस पैसिफिक कमांड' प्रशांत महासागर के आस-पास के क्षेत्रों में हो रही हरकतों पर नजर रखता है. उसके कमांडर एडमिरल हैरिस ने कहा है, ''चीन की कुछ पनडुब्बियां और जहाज हिंद महासागर में मूवमेंट कर रहे हैं. अगर चाइना का प्रभाव इसमें बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि इंडिया का कोई प्रभाव नहीं है.''
2. दूसरे तरीके भी अपना रहा है चीन
चीन और पाकिस्तान आपस में बिजनेस बढ़ाना चाहते हैं. इसके लिए वो पाकिस्तान के ग्वादर से चीन के काशगर के बीच रूट बना रहे हैं. पाइपलाइन से लेकर सड़क, रेलवे से बिजनेस होगा. इसे ही चाइना-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (CPEC) कहा जाता है. ये गलियारा 2,442 किमी लंबा है. अब पेच ये फंस रहा है कि इसके रास्ते में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पड़ता है. भारत-पाकिस्तान के बीच इस जगह को लेकर विवाद है. इस रास्ते में पड़ने वाली हर जगह को चीन अपने पर निर्भर बना लेगा.
3. पानी पर खूंटा गाड़ना कोई चीन से सीखे

साउथ चाइना सी (South China Sea)
मैप में साउथ चाइना सी दिख रहा है. इसको चीन अपना मानता है. पर चीन के अलावा मलेशिया, इंडोनेशिया, विएतनाम की समुद्री सीमाएं यहां टकराती हैं. यहां से विश्व के एक बड़े हिस्से का व्यापार होता है. तो चीन सबको धमकाता रहता है. पिछले साल फिलींपींस और चाइना के बीच विवाद बढ़ गया था.
इस पर United Nations Convention on the Sea का जुलाई में फैसला आया था कि चाइना इस तरह इस पर अपना दावा नहीं कर सकता. चाइना की गुंडई ये है कि वो इस फैसले का भी सम्मान नहीं करता. आंखें तरेरता है. उसने यहां के कुछ द्वीपों में अपने हथियार और मिलिट्री कैम्प भी तैनात कर रखे हैं. इसके अलावा ईस्ट चाइना सी (East China Sea) के सेंकाकू द्वीपों को लेकर भी जापान और चीन के बीच विवाद है.
4. भारत तो पहले भी इसका भुक्तभोगी रह चुका है
अरुणाचल प्रदेशजून 9, 2016 को एक रिपोर्ट आई कि ढाई सौ चीनी सैनिक अरुणाचल बॉर्डर में घुसपैठ कर चुके हैं. बाद में ये लौट गए. चीन वाले अरुणाचल प्रदेश को साउथ तिब्बत भी कहते हैं. उनका तिब्बत पर पहले ही कब्ज़ा है. कई बार चीन वाले अरुणाचल को अपने नक़्शे में भी दिखा चुके हैं.अक्साई चिन
8 मार्च 2016 को चीन के कुछ जवान लद्दाख में 6 किमी अंदर तक आ गए थे. भारत लद्दाख के अक्साई चिन को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का हिस्सा मानता है, लेकिन चाइना इसे अपने जिंगजिआंग प्रांत का हिस्सा मानता है. ये विवाद लम्बे समय से चल रहा है. बॉर्डर को लेकर भारत-चीन के बीच 1962 का युद्ध भी हुआ था. बाद में दोनों देशों के बीच लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) को लेकर समझौता भी हुआ था. लेकिन चीन इसका उल्लंघन करता रहता है.
5. अपने पड़ोसी देशों को बेतरह परेशान करता है चीन
इन सबके अलावा चीन का तिब्बत, ताइवान पर कब्जा है ही. दिसंबर 2016 में चीन ने पड़ोसी मंगोलिया के लिए अपने बॉर्डर को ब्लॉक कर दिया था. नवंबर में दलाई लामा मंगोलिया चले गए थे, जिससे चीन उखड़ गया था. हांगकांग के लोग भी चीन से आजादी की बात करते हैं. हांगकांग की संप्रभुता 1997 में यूनाइटेड किंगडम से चीन के हाथों में आ गई थी.शुरुआत की गांव वाली बात पर लौटा जाए, तो चीन उसी आदमी की तरह हर जगह गोबर फेंकता रहता है, खूंटा गाड़ने की कोशिश में रहता है और मौका मिलते ही किसी दिन, कहीं पर टिन-छप्पर तान देगा. कहेगा, हटो. अब ये जमीन हमारी है.
ये स्टोरी निशांत ने की है.












