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टाइटन हादसे की कौन सी बात US नेवी ने चार दिन तक छिपाकर रखी?

अगर यूएस नेवी को पहले ही दिन धमाके की जानकारी थी तो उन्होंने बताया क्यों नहीं?

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सबमरीन में मौजूद सभी लोगों की मौत हो गई. (AFP)

टाइटन हादसे के बाद जिज्ञासा का ग्राफ़ लगातार ऊपर जा रहा है. मसलन, हादसे की असल वजह क्या थी? टाइटन में सवार लोगों के साथ क्या हुआ होगा? क्या टाइटन के डिजाइन में ग़लती थी? और, सबसे बड़ा सवाल - अगर यूएस नेवी को धमाके की बात पता थी तो उन्होंने इसे छिपाया क्यों?

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टाइटन 18 जून 2023 को अटलांटिक महासागर में डुबकी लगाने के पौने दो घंटे बाद गायब हो गई थी. इसमें 05 लोग सवार थे. ब्रिटिश उद्योगपति हामिश हार्डिंग. पाकिस्तानी मूल के उद्योगपति शहज़ादा दाऊद और उनके बेटे सुलेमान, टाइटन को ऑपरेट करने वाली कंपनी ओशनगेट के फ़ाउंडर और सीईओ स्टॉकटन रश और फ़्रांसीसी खोजी पॉल आनरी नार्जियोले.

22 जून को यूएस कोस्ट गार्ड और ओशनगेट ने बयान जारी कर पांचों की मौत की पुष्टि कर दी. रियर एडमिलर जॉन मॉगर ने कहा-

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"यूनाइटेड स्टेट्स कोस्ट गार्ड और यूनिफ़ाईड कमांड की तरफ से, मैं शोकग्रस्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. मैं केवल कल्पना कर सकता हूं कि इस ख़बर के बाद उन्हें कैसा लग रहा होगा. मुझे उम्मीद है कि ये खोज इस कठिन समय के दौरान उन्हें कुछ राहत देगी. मुझे पता है कि इस बारे में भी बहुत सवाल होंगे कि ये कैसे, क्यों और कब हुआ? इन सवालों के बारे में हम जितनी संभव हो उतनी जानकारी जमा करेंगे. सरकारों के बीच चर्चा जारी है कि इस हादसे की जांच का स्वरूप कैसा होगा!"

यूएस कोस्ट गार्ड ने इम्प्लोजन यानी अंदर की तरफ़ विस्फोट को हादसे का संभावित कारण बताया. कहा कि नेवी को 18 जून को ही धमाके की आवाज़ सुनाई पड़ी थी. हालांकि, तब उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया. शुरुआती जांच में इसी इमप्लोजन को हादसे का सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि टाइटन की बॉडी में कोई लीक हुई होगी. उसके कारण अंदर मौजूद हवा का दबाव असंतुलित हो गया होगा. जिसके चलते अंदर की तरफ़ धमाका हुआ होगा और फिर सेकेंडों के अंतराल में इसके टुकड़े हो गए होंगे. उसमें सवार लोगों को सोचने का मौका भी नहीं मिला होगा. किसी पनडुब्बी में जब ये उलटा धमाका (इंप्लोज़न) होता है, तब पानी सारी दिशाओं से तुरंत अंदर आता है. इससे पनडुब्बी के भीतर मौजूद गैसें भारी दबाव में गर्म हो जाती हैं. और एक फ्लैश फायर पैदा होती है - माने आग का एक ऐसा धमाका, जो पलभर में ओझल हो जाता है. ऐसे मामलों में भीतर कोई भी चीज़ साबूत बचे, इसकी संभावना नगण्य हो जाती है. अतः टाइटन के मृतकों के अवशेष खोजना टेढ़ी खीर बन सकती है. संभव है कि वो कभी न मिलें.

खैर, हम असली सवाल की तरफ़ लौटते हैं. अगर यूएस नेवी को पहले ही दिन धमाके की जानकारी थी तो उन्होंने बताया क्यों नहीं? सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन को 22 जून तक क्यों खींचा गया?

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इस पर अमेरिकी अख़बार गार्डियन ने यूएस नेवी के अधिकारियों के हवाले से एक रिपोर्ट पब्लिश की है. इसके मुताबिक, धमाके की जानकारी तुरंत ही कोस्ट गार्ड को दे दी गई थी. फिर भी उन्होंने ऑपरेशन जारी रखा. इसकी दो बड़ी वजहें बताई गईं हैं.
पहली, वे इस चीज़ को लेकर आश्वस्त नहीं थे कि धमाके की आवाज़ टाइटन की ही है. इसलिए, संभावनाओं का हरेक दरवाज़ा खुला रखा गया.
दूसरी, यूएस नेवी सबमरीन्स को डिटेक्ट करने की टेक्नॉलजी को सीक्रेट रखना चाहती थी. इसी मकसद से धमाके की जानकारी को पब्लिक डोमेन में नहीं लाया गया.

एक सवाल और पूछा जा रहा है. टाइटन के मलबे का पता लगाने में इतनी देर क्यों लगी? क्योंकि जिस इलाके में तलाशी अभियान चल रहा था, वो काफ़ी बड़ा था. लगभग नीदरलैंड्स के क्षेत्रफल के बराबर. इतने बड़े इलाके में लगभग 07 मीटर की पनडुब्बी को ढूंढ़ना किसी भूसे के ढेर में सुई तलाशने से भी ज़्यादा मुश्किल था. इसके अलावा रहस्यमयी समंदर और ख़राब मौसम का भी ऑपरेशन पर काफ़ी असर पड़ा.

अब आगे क्या होगा?

यूएस कोस्ट गार्ड ने कहा है कि हादसे की पूरी जांच होगी. सबसे पहले ये पता लगाया जाएगा कि धमाका हुआ क्यों? और, सर्च ऑपरेशन के दौरान जो तेज़ आवाज़ें सुनाई पड़ी थीं, वो क्या थी?  इसके लिए टाइटन के मलबे को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है.

जांच में क्या-क्या मुश्किलें आने वाली हैं?

टाइटन में हादसा इंटरनैशनल वॉटर्स में हुआ है. यानी, जिस जगह पर धमाका हुआ, वो किसी देश की सीमा में नहीं आता. इसमें कई देशों के नागरिक शामिल थे. मसलन, स्टॉकटन रश अमेरिका से थे. हामिश हार्डिंग, शहज़ादा दाऊद और सुलेमान दाऊद ब्रिटिश नागरिक थे. जबकि पॉल के पास फ़्रांस की नागरिकता थी. इसके अलावा, कनाडा से पनडुब्बी को लॉन्च किया गया था. तो, ये सारे देश अपने-अपने हिसाब से जांच करेंगे. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और कनाडा साथ में इन्वेस्टिगेट करने के लिए राज़ी हो गए हैं. कनाडा ने अपनी जांच शुरू भी कर दी है.

क्या टाइटैनिक टूरिज्म आगे भी जारी रहेगा?

ब्रिटिश अख़बार गार्डियन के मुताबिक, इस बरस ओशनगेट ने 18 ट्रिप्स की प्लानिंग की थी. अभी ये साफ़ नहीं है कि उसका अभियान जारी रहेगा या वो पीछे हट जाएगी. कुछ और कंपनियां भी इसी बिजनेस में हैं. हादसे के बाद टाइटैनिक टूरिज्म पर पाबंदी की मांग बढ़ती जा रही है.

टाइटैनिक टूरिज्म क्या है?

इसका संबंध टाइटैनिक जहाज से है. टाइटैनिक अपने समय का सबसे विशाल और आलीशान जहाज था. लॉन्च से पहले ही इसको समंदर की महारानी कहा जाने लगा था. 10 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक साउथेम्पटन के बंदरगाह से रवाना हुई. इसमें 22 सौ से अधिक लोग सवार हुए. उनकी मंज़िल लगभग साढ़े 05 हज़ार किलोमीटर की दूरी पर बसा अमेरिका का न्यू यॉर्क शहर था. लेकिन सफ़र की शुरुआत में ही टाइटैनिक बर्फ की चट्टान से टकरा कर ओझल हो गई. हादसे में डेढ़ हज़ार से अधिक लोग मारे गए.

सितंबर 1985 में यूएस नेवी के अफ़सर रॉबर्ट बलार्ड ने मलबे की तलाश की. तब से सैकड़ों लोग इस मलबे को देखने के लिए जा चुके हैं. नेशनल जियोग्राफ़िक की रिपोर्ट के मुताबिक, 1998 में डीप ओशन एक्सपीडिशंस ने पहली बार टूरिज्म के लिए लोगों को इस मलबे तक भेजा था. ओशनगेट ने अपने ऑपरेशंस की शुरुआत 2021 में की थी. टाइटन उनकी तीन पनडुब्बियों में से एक थी. इसके लिए कोई क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट नहीं लिया गया था. और, उन्होंने कई वाजिब चिंताओं को भी नज़रअंदाज किया था. इस वजह से भी ओशनगेट पर शिकंजा कसने की मांग चल रही है.

वीडियो: टाइटन में सवार तो नहीं बचे लेकिन 82 साल पहले HMS पर्सियस पनडुब्बी डूबी तो एक आदमी बच आया था

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