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डोनाल्ड ट्रम्प के घर FBI ने छापा क्यों मारा?

ट्रम्प ने इस रेड के बाद कहा, ये हमारे देश के लिए अंधकार का समय है.

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ट्रम्प ने कहा, ये हमारे देश के लिए अंधकार का समय है. (फोटो-AP)

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के घर FBI का छापा पड़ा है. ये छापा उनके फ्लोरिडा के मार-ए-लागो स्थित घर पर पड़ा है. छापे की ख़बर बाहर आते ही उनके समर्थकों ने इसका विरोध किया, उनके घर के सामने इकट्ठे होकर ट्रम्प के समर्थन में झंडे फहराए, नारे लगाए. 

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ट्रम्प ने इस रेड के बाद कहा, ये हमारे देश के लिए अंधकार का समय है. अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. जांच एजेंसियों के साथ सहयोग के बावजूद इस तरह की रेड की गई. छापे की ये कार्रवाई न्याय प्रणाली का गलत इस्तेमाल है. ये रेडिकल लेफ्ट डेमोक्रेट्स का हमला है, वो नहीं चाहते कि मैं 2024 में राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी पेश करूं. ये सही नहीं है. उन्होंने मेरी तिजोरी तक तोड़ दी! ये कहना है ट्रम्प का. लेकिन अभी तक इस रेड को लेकर FBI की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

छापा क्यों पड़ा? अब ये जान लेते हैं

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अमेरिका में राष्ट्रपति के रिटायर होने के बाद एक प्रथा का पालन किया जाता है. हर राष्ट्रपति को अपने कार्यकाल के दौरान किए गए काम से संबंधित दस्तावेज़, ईमेल और सभी पत्र नेशनल आर्काइव (NA) को देना होता है. ये सब राष्ट्रपति रिकॉर्ड अधिनियम  (PRA) के मुताबिक किया जाता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक अब पेंच इस बात पर फंसा है कि ट्रम्प ने वाइट हाउस से वापसी के बाद ये दस्तावेज नेशनल आर्काइव को वापस नहीं किए.  कहा जा रहा है कि कई बड़े बॉक्स में ये दस्तावेज मार-ए-लागो ले जाए गए थे. इसके बाद से ही अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ट्रम्प और उनके करीबियों पर नज़र रख रहीं थीं. ये छापेमारी भी इन्हीं से जोड़कर देखी जा रही है. अमेरिका के साथ अफगानिस्तान भी आज दुनिया की बड़ी ख़बरों में बना रहा. वजह?

पाकिस्तानी तालिबान, जिसे तहरीक-ए-तालिबान  पाकिस्तान(TTP) के नाम से जाना जाता है, उसका एक कमांडर उमर खालिद खुरासानी एक बम धमाके में मारा गया. मौत के वक़्त खुरासानी पकतिका प्रांत में कार से जा रहा था. धमाके में खुरासानी के साथ TTP के दो सदस्य और मारे गए हैं. जिनकी पहचान मुफ्ती हसन और हाफिज दौलत खान के रूप में हुई है. अफ़ग़ान तालिबान ने खुरासानी की मौत की पुष्टि कर दी है. कार में ब्लास्ट कैसे हुआ, इसका पता नहीं चल पाया है.

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खुरासानी अफ़गान-पाक सीमा से लगे उस क्षेत्र में TTP का लीडर रह चुका है, जहां मोहमंद समुदाय के लोगों की बड़ी आबादी रहती है. TTP ने धमाके के पीछे साजिश की आशंका जताई है और तालिबान सरकार से जांच की मांग की है.

बीते कुछ हफ्तों में TTP की पाकिस्तान के कई अधिकारियों और उलेमाओं के साथ मीटिंग हुई है. इन सभी मीटिंग में खुरासानी भी शामिल हुआ था.

जहां तक खुरासानी का परिचय है, उसने 2014 में अपने कुछ समर्थकों के साथ TTP से अलग होकर एक नया गुट बना लिया था. उस गुट का नाम रखा गया था तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जमात अहरार (TTP-JA). इसके पीछे की वजह बताई TTP में विचारधारा का बदलाव. उसने इस बदलाव का ठीकरा उस वक्त की लीडरशिप पर फोड़ दिया. उस समय TTP के मुखिया थे, मौलवी फजलुल्लाह. वो इस बगावत से नाराज़ हुए. उन्होंने खुरासानी और उसके समर्थकों को गुट से बर्खास्त कर दिया.

नए-नवेले बने इस संघठन ने कुछ वक्त तो ख़ामोशी इख्तियार की. लेकिन कुछ समय के बाद इसने आतंक फैलाना शुरू किया. TTP-JA का नाम वाघा सीमा पर हुए आत्मघाती हमले में भी आया था. नवंबर 2014 में भारत-पाकिस्तान को जोड़ने वाली वाघा सीमा पर पाकिस्तान की तरफ़ हुए आत्मघाती हमले में 70 से अधिक लोग मारे गए थे. इस हमले की ज़िम्मेदारी TTP-JA ने ली थी.

खुरासानी ने इसके बाद भी कई आतंकी घटनाओं की साज़िश रची. कश्मीर में भी एक समय उसके एक्टिव होने की बात कही जाती रही है. 2015 में लाहौर में दो धमाके, 2016 में लाहौर में ही ईस्टर पर हमला और 2017 में लाहौर के मॉल रोड पर प्रदर्शनकारियों पर हमले समेत कई हमलों में उसका संगठन शामिल था. आतंकी गतिविधियों के चलते अमेरिका ने उसे अपनी हिट लिस्ट में रखा था. 2018 में अमेरिका ने उसपर लगभग 23 करोड़ रुपए का इनाम घोषित किया था.

2020 में खुरासानी वापस TTP में शामिल हो गया. TTP पर पाकिस्तान सरकार ने बैन लगाया हुआ है. पाक सेना इस गुट के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन कर चुकी है. हिंसा रोकने के लिए TTP और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका. बातचीत को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशें भी की जा रही हैं. खुरासानी की हत्या को TTP के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है. जानकारों की मानें तो इसका असर शांति की कोशिशों पर भी पड़ेगा.

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