शुक्रवार के रोज़ CBI ने दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर छापा मार दिया था. एक्साइज़ पॉलिसी और NYT में छपी एक खबर को लेकर उस रोज़ भाजपा और आम आदमी पार्टी में जो कहासुनी हुई, वो हमने आपको बता दी थी. लेकिन फिर सोमवार, माने आज अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया को लेकर गुजरात के दौरे पर चले गए. वही गुजरात, जहां से भाजपा के दो सबसे शक्तिशाली नेता आते हैं. और इसी के साथ एक बार फिर दोनों पार्टियों के बीच बयानबाज़ी होने लगी. क्योंकि जैसा कि दर्शक जानते ही हैं, गुजरात का चुनाव सिर्फ एक सूबे की विधानसभा का चुनाव नहीं है. राजनैतिक मनोविज्ञान की दुनिया में इस चुनाव का बड़ा महत्व है. यहां भाजपा सिर्फ सरकार नहीं बनाना चाहती, वो शानदार जीत दर्ज करना चाहती है. क्या इसीलिए आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच तनातनी इतनी बढ़ गई है?
बीजेपी से मनीष सिसोदिया के पास किसका फोन आया था?
मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल के आरोपी में कितना दम है?


हवा की बात करें तो दिल्ली सबसे दूषित शहर है, जमीन की बात करें तो हर कदम पर राजनीति की चरी बोयी हुई है. मौसम की बात करें तो दिल्ली में उमस है और मिजाज की बात करें तो बहुत गर्मी. भविष्य की बात करें तो कुछ भी कह पाना अंसभव है, इतिहास की बात करें तो किताबें सत्ता संघर्ष से पटी हैं. और वर्तमान की बात करें तो CBI की चहलकदमी ने दो पार्टियों का आमने-सामने ला खड़ा किया है. शराबनीति से शुरु हुए किस्से ने पहले शिक्षा का लबादा ओढ़ा. फिर जाति के रास्ते होते हुए तोड़फोड़ की राजनीति तक पहुंच चुका है. हम जानते हैं इतनी पहेलियों के बावजूद आप समझ गए होंगे कि हम दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया पर पड़े छापे और उसके बाद आई प्रतिक्रियाओं की बात कर रहे हैं. दिल्ली की नई शराब नीति में घोटाले के आरोप लगे, शराब नीति वापस ले ली गई. मामला आगे बढ़ा तो आबकारी मंत्री होने के नाते मनीष सिसोदिया जांच के दायरे में आए. सीबीआई की छापेमारी हुई. घर से कुछ सामानों की जब्ती हुई. केस तो पहले ही दर्ज हो गया था, मनीष सिसोदिया को उस FIR में आरोपी नंबर वन बना दिया गया. अब हर खबर की एक उम्र होती है, मामला शुक्रवार का है. मगर पूरे वीकेंड के बाद भी सर्वाइव कर रहा है.
क्योंकि ये सब होने के बाद शुरू होती है राजनीति. बीजेपी ने आरोप लगाया गया कि शराब के ठेके एलॉट करने में भ्रष्टाचार हुआ. पैसे कमाए गए. दावा तो ये तक कर दिया गया कि मनीष सिसोदिया को जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है. जवाब मनीष सिसोदिया की तरफ से भी आया, और एक नहीं, एक के बाद कई. पहला ट्वीट आया,
"मेरे पास भाजपा का संदेश आया है- “आप” तोड़कर भाजपा में आ जाओ, सारे CBI-ED के केस बंद करवा देंगे. मेरा भाजपा को जवाब- मैं महाराणा प्रताप का वंशज हूं, राजपूत हूं. सर कटा लूंगा लेकिन भ्रष्टाचारियों-षड्यंत्रकारियों के सामने झुकूंगा नहीं. मेरे ख़िलाफ़ सारे केस झूठे हैं. जो करना है कर लो."
इस ट्वीट के जरिए दो इशारे हुए. एक आरोप है, वो ये कि बीजेपी आप को तोड़कर दिल्ली में सरकार बनाना चाहती है. दूसरा खुद को महाराणा प्रताप का वंशज बता, शिक्षा मंत्री ने खुद को एक जाति में नत्थी कर लिया. संदेश का संदेश, आरोप का आरोप. शराब नीति पर सवाल हुआ तो आप ने शिक्षा नीति को जख्मी करता हुआ पोस्टर जारी कर दिया. इसके बाद एक और ट्वीट आया,
"मुझे CM कैंडिडेट बनाने के ऑफर पर BJP को मेरा संदेश- केजरीवाल जी मेरे राजनैतिक गुरु है, उनसे कभी ग़द्दारी नहीं करूंगा. मैं CM बनने नहीं आया, मेरा सपना है- देश के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, तभी तो भारत नंबर 1 देश बनेगा. पूरे देश में ये काम केवल केजरीवाल जी कर सकते हैं."
अब यहां से दिल्ली की राजनीतिक आरोपों की दिशा बदल गई. अब तक छापे के बाद बीजेपी सवाल कर रही थी और आम आदमी पार्टी जवाब दे रही है. अब गेम उलट गया. आप सवाल कर रही है, आरोप लगा रही है और बीजेपी जवाब दे रही है. सिसोदिया के ही ट्वीट को कोट रीट्वीट करते हुए अरविंद केजरीवाल ने भी लिखा,
"इसका मतलब CBI ED रेड का शराब नीति और भ्रष्टाचार से कोई लेना देना नहीं? ये रेड केवल दिल्ली में “आप” की सरकार गिराने के लिए की गयीं? जैसे इन्होंने दूसरे राज्यों में किया है."
फिर एक और ट्वीट कर लिखा,
"दिल्ली में ऑपरेशन लोटस फेल."
बीजेपी की तरफ से काउंटर बयान आने लगे, सांसद गौतम गंभीर ने लिखा,
"खुद को ही मुख्यमंत्री पद के ऑफर देने वाले को मैं ये कहना चाहता हूं की अगला चुनाव पटपड़गंज से ही लड़ना, भाग मत जाना!"
दोनों ही तरफ से सोशल मीडिया पर आरोपों का फायर खोल दिया गया है. ट्विटर और टीवी के जरिए हमले हो रहे हैं. इतने में धीरे से आप सूत्रों के हवाले से खबर आती है. कहा जाता है कि मनीष सिसोदिया के पास बीजेपी के किसी नेता का फोन आया. सरकार तोड़ने के लिए. दावा ये भी किया गया कि उस फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भी रखी है. वक्त आने पर, जरूरत पड़ने पर जारी किया जाएगा. जवाब मनोज तिवारी ने दिया. ट्वीट कर लिखा
"मनीष का फ़ोन तो CBI ले गयी खुद ही बोले.. तो किसके फ़ोन पर फ़ोन या मेसिज आया उसका नाम बताए और उनका फ़ोन भी जांच के लिए जमा करवाए.. ताक़ि दूध का दूध और शराब का शराब हो जाए !"
मतलब यही है कि ना आप पीछे हट रही है, ना बीजेपी. सोशल मीडिया और टीवी बहस से अब इसे जमीन पर ले जाने की तैयारी है. बीजेपी ने नई शराब नीति के विरोध में मार्च निकालने की तैयारी में है. 24 सितंबर से मनीष सिसोदिया के पटपड़गंज विधानसभा से इसकी शुरुआत करेगी और डेढ़ महीने केजरीवाल की शराब नीति के खिलाफ कैंपेन चलाएगी. तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को गुजरात चुनाव के लिए भुनाने में लगी है. आज सीएम केजरीवाल और मनीष सिसोदिया गुजरात दौरे पर पहुंचे. सफाई और आरोपों के बीच मुद्दा अब भी शराब नीति का ही है. जिसकी वजह से आप सरकार सवालों के घेरे में है.
आज खबर ये भी उड़ी हुई कि इसी केस में CBI ने सिसोदिया के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर नोटिस जारी किया है. ये नोटिस उस स्थिति में जारी किया जाता है जब किसी आरोपी के देश छोड़कर भागने की आशंका हो. हमारे सूत्रों ने बताया कि ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है. मगर मनीष सिसोदिया के खिलाफ कार्रवाई और भी बड़ी होने की संभावना है. चर्चा है कि ED भी अपनी तरफ से मनी लॉन्ड्रिंग के एक्ट में केस दर्ज कर सकती है. PMLA एक्ट में किसी आरोपी को लंबे वक्त तक जेल में रखा जा सकता है, इसलिए आप भी ये आरोप लगा रही है कि मनीष सिसोदिया को फंसाने के लिए ऐसा किया जा सकता है.
CBI ने छापेमारी के बाद मनीष सिसोदिया का फोन ले गई थी, लैपटॉप भी जब्त कर लिया गया और उनके ईमेल डेटा को भी सिक्योर किया था. अब दावा किया जा रहा है कि कुछ कागजों के आधार पर नया केस बनाया जा सकता है. दावा है कि सीबीआई ने शराब घोटाले से संबंधित FIR और अन्य दस्तावेजों की कॉपी प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दी है. सवाल ये भी उठा कि जब केजरीवाल सरकार की प्राइवेट ठेके बनाने की नई शराब नीति इतनी ही सही थी तो उसे वापस क्यों लिया गया ? इसका भी जवाब केजरीवाल ने गुजरात दौरे पर दिया. उनकी तरफ से कहा गया,
"हम गुजरात में नशाबंदी की पॉलिसी लागू रखेंगे लेकिन गैर कानूनी शराब का धंधा नहीं करेंगे. दिल्ली में 850 शराब दुकानें खुलनी थीं, 500 दुकानें नहीं खुल पाईं, केंद्र के दबाव से ऑफिसर्स ने नीलामी के लिए मना कर दिया. हमारे पास ऑप्शन नहीं था. इसीलिए हम पुरानी पॉलिसी पर चले गए. पुरानी पॉलिसी में 100 खामियां हैं, लेकिन गुजरात की तरह वहां नकली दारू तो नहीं बिक रही."
तमाम दावों और आरोपों के बीच सवाल अब भी बना है कि क्या नई शराब नीति लागू करने में पैसे कमाए गए या फिर राजनीति द्वंद में केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. जवाब शायद जांच पूरी होने के बाद ही मिल पाए. बाकी रहा परसेप्शन का खेल तो वो हम जनता पर छोड़ देते हैं.
वीडियो: किस बीजेपी नेता की कॉल रिकॉर्डिंग का दावा कर रहे हैं मनीष सिसोदिया?



















