सवाल 1 - एक्सक्यूज़ मीं, भियां, टिक टॉक जुड़ी क्या खबर आई है?
ख़बर मद्रास हाईकोर्ट से आई. उसने केंद्र सरकार से टिक टॉक ऐप पर बैन लगाने को कहा है. वजह बताई कि इस ऐप से पोर्नोग्राफी को बढ़ावा मिलता है. और बच्चे इस ऐप के जरिये ऐसे लोगों के चंगुल में पड़ सकते हैं. जो उन्हें यौन अपराध का शिकार बना सकते हैं.
सवाल 2 - (सयानों का सवाल) लला पहले ये बताओ ये टिक टॉक क्या है?
एक ऐप होता है चाची. जैसे डबस्मैश होता था न वैसा ही कुछ. डबस्मैश, स्नैपचैट, लाइक और इंस्टाग्राम जैसी कई ऐप्स को एक सिलबट्टे पर रखिए. कूचिए, पीसिए अंत में बाहर निकलकर आएगा टिक टॉक. बेसिक फंडा ये है कि इस पर 15-15 सेकेण्ड के वीडियो बनाये जाते हैं. सामने कोई गाना या डायलॉग चल रहा होता है, यूजर इधर मुंह चलाता है. लिप सिंक करता है. वीडियो बन जाता है. समय के साथ कई फीचर भी आ गए हैं कि इसमें फ़िल्टर-इमोजी-ब्यूटी इफेक्ट यूज करिए. चाहे तो किसी और के वीडियो के साथ अपना वीडियो जोड़ लीजिए. माने टाइम पास चीज है.
और सरलता से समझिए, पड़ोसन फिल्म का चतुर नार वाला गाना याद है? किशोर कुमार जिसमें गाना गाते हैं और सुनील दत्त ऐसे होंठ चलाते हैं. मानो गाना वो गा रहे हैं. इसे ही एक ऐप की मदद से करिए. यही टिक टॉक है.
सवाल 3 - ये कब आया और कब इतना फेमस हो गया?
वही तो बात है गुरु. आज की डेट पर दुनिया के सबसे फेमस ऐप्स में है, एक अरब से ज्यादा लोग ये ऐप यूज कर रहे हैं. अरबों वीडियो भरे हैं. आपको म्यूजिकली याद है? पहले टिक-टॉक का नाम म्यूजिकली हुआ करता था. 2014 में चाइना में लॉन्च हुआ था. जो लोग म्यूजिकली पर वीडियो बनाते थे. खुद को म्यूजर्स कहते थे, जैसे ढिंचाक पूजा अपने फैंक्स को ढिंचक्स कहती हैं. फिर बाईटडांस नाम की एक कंपनी ने म्यूजिक्ली को खरीद लिया. साल था 2017. उसके पास भी अपना ऐसा ही एक ऐप था टिक-टॉक. तो म्यूजिकली और टिक-टॉक एक हुए और नाम वही रहा टिक-टॉक.

Byte dance का फोटू!
सवाल 4- ऐसे ऐप तो बहुत सारे हैं, फिर टिक टॉक ही क्यों इतना फेमस है?
क्योंकि यहां लोगों को पागलपंती की आज़ादी मिली है. वैसे तो वीडियो ऐप पर बनते हैं, यहां लोग अपने वीडियो भी डाल लेते हैं. जिनके बहुत से फॉलोअर्स होते हैं, टिक टॉक वाली भाषा में जिनको क्राउन-व्राउन मिल जाते हैं. उनको पैसे भी मिलते हैं. लोग अलग-अलग चैलेंज में पार्ट लेते हैं और फेमस होने का फील लेते हैं. आपने वो वीडियो देखे होंगे, जिसमें लोग आधा मुंह लड़के का और आधा मुंह लडकी का बनाकर किसी गाने पर परफॉर्म करते हैं. ऐसे ही वो चैलेन्ज भी चलते हैं जिसमें आधा मुंह ढंककर इंसान रो रहा होता है, आधे में हंस रहा होता है. लेकिन सिर्फ कलाकारी नहीं है, यहां ऐसे वीडियोज भी हैं, जिन्हें देख-सुनकर आपके कानों पर बुरा असर पड़ सकता है. डबल मीनिंग जोक्स, गंदे इशारे, सेक्सिस्ट बातें, अश्लील वीडियोज की भी भरमार है.

Tik tok पर दिया नाग समेत कई ऐसे चर्चित अकाउंट हैं जिनका किया धरा Cringe की श्रेणी में आता है.
सवाल 5 - कोर्ट को टिक टॉक की सुध कहां से आ गई? सुध नहीं आई थी. याचिका गई थी उनके पास. मदुरै के एक एक्टिविस्ट-वकील हैं, मुथु कुमार. वो मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में याचिका लेकर गए थे. बताया टिक टॉक का कंटेंट बहुत नंगई भरा है. इससे कल्चर को खतरा है. इस ऐप से बच्चों का शोषण हो रहा है और लोग आत्महत्या तक कर रहे हैं.
सवाल 6 - क्या सच में टिक टॉक इतना गंदा है?
ये तय करना सरकार और कोर्ट का काम है. हमें जो सामने नज़र आता है वो बताते हैं. 1 .कुछ रोज़ पहले एक खबर आई थी. शाहजहांपुर का एक लड़का टिक टॉक पर तमंचे के साथ वीडियो बना रहा था. पुलिस ने पकड़ लिया, मुकदमा हुआ, जेल गया. बीकॉम के लड़के को टिक टॉक पर व्यूज बढाने के चक्कर में जेल हो गई. 2. जनवरी में तमिलनाडु के विरुधुनगर में चार लड़कों ने पुलिस स्टेशन में एक फ़िल्मी डायलॉग पर वीडियो बनाया. पुलिस ने इसे अपनी बेइज्जती माना, डायलॉग की भाषा में अपशब्द खोजे, आईटी एक्ट की धारा 67 लगाई और जेल भेज दिया. 3. तमिल नाडु की ही एक और खबर है. तिरुथानी के पास एक लड़के वेंकटरमन का मर्डर हुआ. वजह पता लगी कि उसने दोस्त के साथ मिलकर एक वीडियो टिक टॉक पर डाला था. वीडियो में एक ख़ास कम्युनिटी को उलटा सीधा बोला गया था. इस बात से इलाके में विवाद हुआ. बात बढ़ी तो लड़के फरार हुए. एक दूसरे पर दोष मढ़ा और इसी सबके चक्कर में दोस्त ने दोस्त की हत्या कर दी.
सवाल 7- अब टिक टॉक क्या कह रहा है इस मुद्दे पर? टिक टॉक की सफाई आ गई है कि "हम तो जी, सब काम क़ानून के दायरे में करते हैं." आगे कहा कि कोर्ट का जैसा ऑर्डर होगा, उसे पढेंगे, उस हिसाब से एक्शन लेंगे. अभी के लिए सेफ्टी बढ़ा रहे हैं. यूजर को या शासन-प्रशासन को कोई बात खराब लगती है तो उसे रिपोर्ट करने का मैकेनिजम सुधार देते हैं.
सवाल 8 - पर सरकार ने क्या कहा? क्या सरकार टिक टॉक बंद कर सकती है?
अपने पर आ जाए तो सरकार कुछ भी बंद करा सकती है. लेकिन सरकार नियम-कायदे से चलती है. अभी सरकार मद्रास हाईकोर्ट का फैसला पढ़ रही है. मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी ये मामला देख रही है. और उसके अफसर कह रहे हैं कि कोर्ट का आदेश लागू करना थोड़ा मुश्किल है. हमें कैसे पता चला? इकोनॉमिक टाइम्स नाम की वेबसाईट ने ये खबर छापी है. मिनिस्ट्री के अफसरों का ये भी कहना है कि हम अभी रिपोर्ट पढ़ रहे हैं. जो पार्टी यानी टिक टॉक इस फैसले से प्रभावित होगी, उसे कोर्ट में जाना चाहिए. सरकार को इसमें इनवॉल्व नहीं होना चाहिए. उधर गूगल की तरफ से ये बात आई कि उन्हें भी अब तक सरकार की तरफ से टिक टॉक पर रोक लगाने के कोई आदेश नहीं मिले हैं.
कुल जमा, टिक टॉक का भविष्य क्या होगा, सरकार की तरफ से ज्यादा क्लियर नहीं है. लेकिन मामला अगर कोर्ट की नज़र में है. तो ये बात तो पक्की है कि टिक टॉक सस्ते में नहीं छूटेगा. या तो सुधरेगा या उसका सब बिगड़ ही जाएगा.











