The Lallantop

100 करोड़ से बनी ट्रेन-18 में ऐसा क्या है जो आप इसका टिकट दौड़कर लेंगे?

पहली ट्रेन मार्केट में आ गई है. फीचर जानने लायक हैं.

Advertisement
post-main-image
ट्रेन 18 को बनाने में करीब 100 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं.
खबर शुरू करने से पहले थोड़ा जीके-जीके खेलते हैं. सवाल - देश की सबसे तेज ट्रेन कौन सी है?
ऑप्शन रहे ये -
1 - राजधानी एक्सप्रेस 2- शताब्दी एक्सप्रेस 3- गतिमान एक्सप्रेस 4- दुरंतो एक्सप्रेस
जवाब मन में सोचिए...सोच लिया. आप जरूर गतिमान या शताब्दी सोचकर चौड़िया रहे होंगे. एह, एह, एह...गलत जवाब...ऊपर के चारों ऑप्शन गलत हैं. देश की सबसे तेज ट्रेन अब है - ट्रेन 18. शॉर्ट में टी-18.
ट्रेन 18 अपने देश में ही बनी है.
ट्रेन 18 अपने देश में ही बनी है.

नाम में ही गति है. जैसे गाड़ियों के आगे 180...220...350 रहता है. वैसे ही ये ट्रेन 18. अगला सवाल आपके मन में यही होगा कि बड़ा तेज, तेज कर रहे हो. है कितनी इसकी स्पीड. जवाब है 180 किलोमीटर प्रति घंटा.
और ये बात हवा में नहीं कह रहे. ये रफ्तार ट्रेन 18 के ट्रायल रन में रिकॉर्ड की गई है. ये ट्रायल रन हुआ 20 दिसंबर को. दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन से आगरा कैंट के बीच. और इस सफर में 108 मिनट लगे. इसकी औसत स्पीड 176 किलोमीटर प्रति घंटा रही. इस ट्रायल रन के बाद अब बारी है इसके फुल फ्लैश रन की. इसके लिए 29 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे हरी झंडी दिखाएंगे. ट्रेन का रूट भी जान लीजिए. इसे दिल्ली और पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बीच चलाया जाएगा. इस ट्रेन की सबसे खास बात ये है कि ये मेड इन इंडिया है. माने स्वदेशी ट्रेन. और क्या खास बाते हैं, वो भी जान लीजिए -
ट्रेन का ट्रायल रन हो चुका है.
ट्रेन का ट्रायल रन हो चुका है.
# ये दिखने में एकदम बुलेट ट्रेन की तरह है. तो जब तक मोदी जी की बुलेट ट्रेन नहीं आती, आप इसी को देखकर आनंद ले सकते हैं. राजधानी और शताब्दी से तेज रफ्तार से चलने वाली इस ट्रेन से यात्रा में 10 से 15 फीसद समय भी बचेगा. ट्रेन की हाइएस्ट स्पीड है 220 किलोमीटर प्रति घंटा.
# इसमें 16 कोच हैं. चार-चार कोच के चार सेट. माने एक सेट में चार कोच. ट्रेन सेट होने के चलते इस ट्रेन के दोनों ओर इंजन हैं. इंजन भी मेट्रो की तरह छोटे से हिस्से में हैं. ऐसे में इंजन के साथ ही बचे हिस्से में 44 यात्रियों के बैठने की जगह है. इस तरह से इसमें ज्यादा यात्री सफर कर सकेंगे.
अंदर से ऐसी दिखेगी ट्रेन.
अंदर से ऐसी दिखेगी ट्रेन.

# इसमें 14 डिब्बे चेयरकार व दो एग्जीक्यूटिव क्लास के होंगे. एग्जीक्यूटिव क्लास में 56 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी जबकि दूसरे में 18 यात्री बैठ पाएंगे. सभी डिब्बों में आपातकालीन टॉक-बैक यूनिट्स दिए गए हैं ताकि यात्री आपातकाल में ट्रेन के क्रू मेंबर से बात कर सकें. 
# इस ट्रेन के हर कोच में 6 सीसीटीवी कैमरे होंगे. ट्रेन की बॉडी स्टेनलेस स्टील से बनी है. ट्रेन में वाई-फाई, एलईडी लाइट, पैसेंजर इनफर्मेशन सिस्टम भी है. सीटें 360 डिग्री रोटेबल होंगी. स्पेशली स्पेन से मंगाई गई हैं.
टॉयलेट्स कुछ ऐसे होंगे.
टॉयलेट्स कुछ ऐसे होंगे.

# ट्रेन में रबड़-ऑन-रबड़ की फर्श होगी. एस्थेटिक टच-फ्री बाथरूम होंगे. सामान रखने वाला रैक ज्यादा बड़ा रहेगा. एक और खास बात ये कि ट्रेन के डिब्बों में व्हील चेयर की जगह होगी. विकलांगजनों के लिए दो खास टॉयलेट भी होंगे. 
कहां और कितने दिन में बनी ट्रेन?
यह ट्रेन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आइसीएफ) में बनी है. अधिकारियों का दावा है कि ट्रेन के देश में बनने के कारण 1.70 अरब रुपये की बचत हुई है. ट्रेन के लिए सिर्फ ब्रेकिंग सिस्टम, ट्रांसफॉर्मर्स और सीटें विदेश से मंगाए गए हैं. ऐसी अगली ट्रेन मार्च, 2019 तक तैयार होगी. ट्रेन का पहला सेट 18 महीने में तैयार हुआ है. और इसमें करीब 100 करोड़ का खर्च आया है. ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि विदेश में इस तरह की ट्रेन तैयार करने में लगभग तीन साल लगते हैं. फिर विदेश से इसे भारत में लाने पर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ते हैं. ट्रेन को शताब्दी व राजधानी रूट के लिए तैयार किया गया है. ये दिल्ली-भोपाल, चेन्नई-बेंगलुरु व मुंबई-अहमदाबाद रूट पर भी चलेगी.
सीटें 360 डिग्री घूम भी सकेंगी.
सीटें 360 डिग्री घूम भी सकेंगी.

क्या होगा किराया?
अधिकारियों का कहना है कि चूंकि इस ट्रेन में 100 करोड़ रुपये का खर्च आया है. तो ट्रेन 18 का किराया भी सामान्य से ज्यादा होगा. हालांकि किराए पर अबतक कोई फैसला नहीं लिया गया है.
पर क्या हम इसके हकदार हैं?
ये सवाल ऐसी किसी भी सुविधा के लिए उठना लाजमी है. कुछ दिन पहले शुरू हुई गतिमान या डबल डेकर ट्रेनों के टॉयलेट के टूटने. गंदगी फैलाने के किस्से हमने सुने थे. अब इस ट्रेन के स्वागत में लोग चार कदम और आगे निकल गए हैं. 20 दिसंबर को दिल्ली से आगरा के बीच जब इस ट्रेन का ट्रायल हो रहा था, तब इस पर पथराव की घटना घटी. इससे इसका एक शीशा भी टूट गया.
ट्रेन का शीशा तोड़ दिया गया है.
ट्रेन का शीशा तोड़ दिया गया है.

रेलवे आरोपी लोगों को ढूंढने का प्रयास कर रही है. मगर ऐसी घटनाएं यही सवाल खड़ी करती हैं कि क्या हम ऐसी सुविधाओं के हकदार हैं. कुछ लोग इससे आहत भी हो सकते हैं कि हमने थोड़ी न पत्थर फेंका. तो भइया आप हो सकता है टॉयलेट गंदा करें. सीट का कवर नोचें. वगैरह, वगैरह. इससे बचने का तरीका यही है कि हम खुद तो ऐसी हरकतें न ही करें. और किसी को करते देखें तो उसे भी टोकें.


ये भी पढ़ें - 
मोदी के मंत्री ने बुलेट ट्रेन चलने की तारीख बताई

क्या अमृतसर ट्रेन हादसे के ड्राइवर ने आत्महत्या कर ली है?

पटरी पर खड़े होकर ट्रेन को ऐक्सिडेंट से बचाने वाले स्वपन को मिली सरकारी नौकरी

ओह शाहरुख़, तुमने दिल तोड़ दिया!

लल्लनटॉप वीडियो देखें -

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement