साल 2024 खत्म होने को है. कई मायनों में ये साल अहम रहा. खासकर डिफेंस मिनिस्ट्री और भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए. भारत ने इस साल रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व तरक्की की. पड़ोसी देश चीन के साथ बरसों से चले आ रहे तनाव में कमी आई. तेजस के मार्क 1A ने अपनी पहली उड़ान भरी.
तेजस फाइटर जेट की पहली उड़ान से लेकर न्यूक्लियर सबमरीन तक; भारतीय सेनाओं के लिए कैसा रहा 2024?
भारत की Ministry Of Defence और Defence Sector के लिए भी साल 2024 काफी अहम रहा.


साल के आखिरी दिन हर जगह 'ईयर एंडर' की भरमार है. तो रक्षा क्षेत्र इससे अछूता नहीं रह सकता. भारत के सामने एक तरफ जहां चुनौतियां रहीं, वहीं दूसरी ओर भारत ने रक्षा के मोर्चे पर कई मुकाम भी हासिल किए. इस साल भारत ने रक्षा क्षेत्र में क्या प्रगति की, कौन-कौन से बड़े डेवलपमेंट्स हुए? एक-एक कर के जानते हैं.
चीन बॉर्डर पर डिसएंगेजमेंटअक्टूबर 2024 में एक खबर आई. केंद्र सरकार ने बताया कि कई महीनों से चली आ रही चीन से वार्ता सफल रही है. दोनों देश बॉर्डर पर तनाव कम करने के लिए डिसएंगेजमेंट के आखिरी फेज में हैं. डेपसांग और डेमचोक इलाकों में दोनों सेनाओं के बीच पेट्रोलिंग पॉइंट्स को लेकर सहमति बनी.

भारत के हल्के टैंक ज़ोरावर ने समुद्र तल से 4200 मीटर की ऊंचाई पर अपना जलवा दिखाया. इस लाइट टैंक ने इतनी ऊंचाई पर कई राउंड पूरी सटीकता से फायर किए. इस टैंक को DRDO की चेन्नई स्थित Combat Vehicles Research & Development Establishment ने Larsen and Toubro के साथ मिलकर बनाया है. हल्का होने की वजह से इस टैंक की मैनुवर करने की क्षमता बाकी भारी टैंकों से बेहतर है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सैंचेज़ के साथ गुजरात के वड़ोदरा में Tata Aircraft Complex का उद्घाटन किया. रक्षा मंत्रालय ने Airbus Defence और Space SA- Spain के साथ 21,935 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत 56, C-295 एयरक्राफ्ट्स की डील हुई है. इसमें से 16 एयरक्राफ्ट स्पेन से सीधा भारत आएंगे जबकि बाकी के 40 को टाटा की इसी फैसिलिटी में बनाया जाएगा. जो 16 एयरक्राफ्ट स्पेन से आने हैं, उनमें से 6 पहले ही भारत आ चुके हैं और एयरफोर्स में अपनी सेवा दे रहे हैं. सितंबर 2026 तक भारत में बना पहला एयरक्राफ्ट तैयार हो जाएगा. वहीं अगस्त 2031 तक बाकी के 39 एयरक्राफ्ट भी बनकर तैयार होंगे.

भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए ये एक मील के पत्थर की तरह है. वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 21 हजार 83 करोड़ यानी लगभग 2.63 बिलियन डॉलर के रक्षा उत्पादों का एक्सपोर्ट किया है. पिछले वित्त वर्ष में ये आंकड़ा 15 हज़ार 920 करोड़ का था. इस बार इसमें 32.5 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है. एक्सपोर्ट में डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (DPSU) की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत और प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत रही. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उम्मीद जताई है कि 2029 तक ये एक्सपोर्ट 50 हजार करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है.

मार्च के महीने में इंडियन एयरफोर्स के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन केके वेणुगोपाल ने तेजस MK1A में उड़ान भरी. ग्रुप कैप्टन केके वेणुगोपाल हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के चीफ टेस्टिंग पायलट हैं. ग्रुप कैप्टन केके वेणुगोपाल ने 18 मिनट तक तेजस MK1A में उड़ान भरी. तेजस बनाने का उद्देश्य इंडियन एयरफोर्स में पुराने हो रहे मिग और दूसरे जहाजों की जगह भरना है. इंडियन एयरफोर्स पहले से ही स्क्वाड्रन की घटती संख्या से जूझ रही है. ऐसे में तेजस की इस उड़ान को भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
INS अरिघातअगस्त 29, 2024 को अरिहंत क्लास की दूसरी सबमरीन (पनडुब्बी) आईएनएस अरिघात को विशाखापत्तनम में इंडियन नेवी में कमीशन किया गया. ये एक परमाणु सबमरीन है जो अपने पूर्वज अरिहंत से ज्यादा एडवांस है. इस पनडुब्बी को पहले आईएनएस अरिदमन नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर अरिघात कर दिया गया. भारत का यह कदम देश को 'न्यूक्लियर ट्रायड' यानी परमाणु तिकड़ी को और मजबूती देगा.

फरवरी 2024 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा डिजाइन और निर्मित किए गए लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड की कमीशनिंग पूरी हुई. इस इंडियन मेड हेलीकॉप्टर ने अप्रैल 2024 में आयोजित गगन शक्ति युद्धाभ्यास में भी अपनी काबिलियत को साबित किया. अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में इसने एयरफोर्स की क्षमता में इजाफा किया है. प्रचंड हेलीकॉप्टर रडार और लेजर वार्निंग रिसीवर्स से लैस है. इसमें मिसाइल वार्निंग सिस्टम, काउंटर मेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम और मिसाइल जैमर भी लगा हुआ है. प्रचंड का कॉकपिट पायलट को न्यूक्लियर, बायो-वेपन और केमिकल हमलों से भी सुरक्षा प्रदान करता है.

मार्च 2024 में इंडियन नेवी ने MH-60 रोमियो हेलीकॉप्टर्स को कोच्चि के INS गरुड़ नेवल एयर स्टेशन में कमीशन किया. इस हेलीकॉप्टर को इंडियन नेवल एयर स्क्वाड्रन (INAS) 334 में कमीशन किया गया है. इन हेलीकॉप्टर्स को सबमरीन हंटर्स के नाम से जाना जाता है. इसे Lockheed Martin और Sikorsky ने मिलकर बनाया है. ये हेलीकॉप्टर अमेरिका के मशहूर 'ब्लैक हॉक' का नेवल वर्जन है. इसका इस्तेमाल निगरानी, जासूसी, वीआईपी मूवमेंट, हमला, सबमरीन खोजना और उसे बर्बाद करने में होगा. एमएच 60आर मल्टी रोल हेलीकॉप्टर पर APKWS यानी एडवांस्ड प्रेसिसिशन किल वेपन सिस्टम लगाया जा सकता है. इसके अलावा इस हेलिकॉप्टर पर चार प्रकार की हैवी मशीन गन लगाई जा सकती है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कैलिनिनग्राड-रूस के यंतर शिपयार्ड में आयोजित एक कार्यक्रम में INS Tushil को नौसेना में कमीशन किया. दरअसल ये मौका था भारत-रूस के बीच 21वीं India-Russia Inter-Governmental Commission on Military and Military Technical Cooperation (IRIGC-M&MTC) का. इसीलिए जहाज को कमीशन करने के लिए ये दिन चुना गया.
INS Tushil एक अपग्रेडेड Krivak III क्लास का फ्रिगेट है. ये रूस के साथ हुई 2.5 बिलियन डॉलर की उस डील का हिस्सा है जिसमें चार ऐसे ही और फ्रिगेट शामिल हैं. इनमें से दो और फ्रिगेट्स का निर्माण रूस के यंतर शिपयार्ड में ही किया जाएगा. जबकि बाकी के दो फ्रिगेट्स को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत भारत में बनाया जाएगा. भारत में इसका निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में किया जाएगा. तुशिल के बाद दूसरे फ्रिगेट का निर्माण यंतर शिपयार्ड में जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि 2025 के मध्य तक इसका निर्माण पूरा हो जाएगा.

मई के महीने में भारत की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाईजेशन (DRDO) ने रुद्रम 2 एंटी रेडिएशन मिसाइल का सफल परिक्षण किया. इस मिसाइल को सुखोई-SU30MK1 विमान से फायर किया गया. इस एंटी रेडिएशन मिसाइल का इस्तेमाल दुश्मन के एयर डिफेंस पर हमला करने के लिए किया जाएगा. भारत इससे पहले रूसी एंटी रेडिएशन मिसाइल Kh-31 का इस्तेमाल कर रहा था. रुद्रम 2, रूसी एंटी रेडिएशन मिसाइल की जगह लेगा.
न्यूक्लियर मिसाइल टेस्टभारत ने इस साल सबमरीन से लॉन्च होने वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया. भारत एक सबमरीन से इस मिसाइल को लॉन्च कर उन चुनिंदा देशों में शामिल हुआ जिनके पास ज़मीन, पानी और हवा; तीनों से परमाणु हमला करने की क्षमता है. इस मिसाइल की रेंज 3,500 किलोमीटर है.
भारत ने इसके अलावा रिमोट कंट्रोल गंस, फ़ास्ट पेट्रोलिंग (गश्ती) वेसल्स, आर्मर्ड गाड़ियों पर भी निवेश किया है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा बजट लगभग 6.22 लाख करोड़ (लगभग 75 बिलियन डॉलर) का था. भारत के सभी मंत्रालयों में सबसे अधिक बजट रक्षा मंत्रालय को ही अलॉट किया गया था. इसके अलावा भारत न सिर्फ सामरिक बल्कि अंतरिक्ष प्रोग्राम में भी आगे बढ़ रहा है. गगनयान प्रोग्राम इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है. अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ भारत तीनों सेनाओं में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने, ऑपरेशनल क्षमता में इजाफा करने के साथ Tri-Services Synergy यानी आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में को-ऑर्डिनेशन को बढ़ावा देने पर भी काम हो रहा है. आने वाले साल में भारत का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र को और आत्मनिर्भर और मॉडर्न बनाने पर होगा.
वीडियो: तारीख: जब अस्तित्व में आया दुनिया का पहला मदरसा


















