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मिलिए उस प्यारी मां से, जिसने बेटे के लिए वेश्या तलाशी

हममें से कितने पुरुष अपनी मां के सामने कह सकेंगे कि वे पैसे देकर सेक्स करते हैं?

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photo credit: daily mail.
मां तो मां होती है. ‘मदर इंडिया’ की नर्गिस से लेकर श्रीदेवी की ‘मॉम’ तक, मां के कितने ही रूप हमनें देखे हैं. मां का आदर्श, केयरिंग और बलिदानी होना मस्ट होता है, हमारी फिल्मों में. लेकिन असल ज़िंदगी में तो मां की लाइफ में अलग ही संघर्ष होता है. सिनेमा के आदर्शवाद से नीचे उतर कर देखा जाए, तो मां की ज़िंदगी के वो लम्हे भी नज़र आएंगे, जहां उसे सही-गलत की परिभाषा से परे भी फैसले लेने होते हैं. चाहे वो अपनी औलाद के गुनाहों को नज़रअंदाज़ करने वाला लगाव हो, या बेटे के लिए कॉलगर्ल की व्यवस्था करने की ज़रूरत को समझने की व्यावहारिकता.
आज ऐसी ही एक मां का किस्सा सुनाएंगे आपको. जिसने बेटे की ज़िंदगी को आसान करने के लिए नैतिकता की सीमाओं को लांघने का सोचा. अपने ‘ऑटिज्म’ से पीड़ित बेटे के जीवन में रोमांस वाला पहलू नदारद न हो, इसलिए उसके वास्ते एक कॉलगर्ल अरेंज करने का फैसला किया.
ऑटिज्म एक मानसिक बीमारी है जिसमें व्यक्ति बाहरी दुनिया से लगभग कट सा जाता है. ना तो खुलकर बात कर पाता है और ना ही घुलमिल पाता है. आत्मकेंद्रित हो जाता है. खुद में खोया रहने लगता है.
इंग्लैंड की रहने वाली कैथी लेट्टे ने अपने बेटे जूलियस के लिए ऐसा कुछ करने की सोची, जिसे नैतिकता के पैरोकार तुरंत खारिज कर देंगे.
जूलियस अपनी मां कैथी के साथ. तस्वीर डेली मेल के सौजन्य से.
जूलियस अपनी मां कैथी के साथ. तस्वीर डेली मेल के सौजन्य से.

जूलियस बचपन से ऑटिज्म से पीड़ित है. चार साल का होने तक उसने बोलना भी नहीं सीखा था. स्कूल में उसे खूब तंग किया जाता. साथी बच्चे उसका मज़ाक उड़ाते. जब वो नौ साल का था, तो एक दिन उसकी घर-वापसी के बाद, कैथी ने उसकी पीठ पर एक कागज़ चिपका पाया. उसपर लिखा था, “मुझे लात मारो, मैं मंदबुद्धि हूं”. जूलियस को मंदबुद्धि का मतलब भी नहीं पता था.
जूलियस बड़ा होता गया. पढ़ाई में तेज़ था. उसकी याददाश्त भी तेज़ थी. एक कामयाब स्टूडेंट रहा वो. लेकिन किसी साथी वाला कॉलम हमेशा ही ख़ाली रहा. खुद में उलझा हुआ जूलियस तनहा, और तनहा, होता गया. उसकी लड़कियों को आकर्षित करने वाली तमाम कोशिशें फेल हो गई. किसीने उसमें दिलचस्पी नहीं ली. एक ने उसे मेंटल बुलाया, तो एक उसे सिर्फ इसलिए अपने साथ पार्टी में ले गई, ताकि दोस्तों के सामने उसका मज़ाक उड़ा सके. एक दिन बेहद निराशा में जूलियस ने अपनी मां से कहा,
“क्या मेरी कभी कोई गर्लफ्रेंड नहीं बन पाएगी? कोई मुझे अहमियत नहीं देता. ये हर बार का रिजेक्शन मुझे तोड़ रहा है. मैं क्या करूं मां? ”
20 साल के बेटे का ये सवाल कैथी को अंदर तक हिला गया. अपने बेटे को डिप्रेशन के कुएं में गर्क होते देखना कैथी को मंज़ूर नहीं था. यही वो लम्हा था, जब कैथी ने एक बोल्ड स्टेप लेने का फैसला लिया. उसने बेटे की रोमांस की महरूमी ख़त्म करने के लिए कॉलगर्ल तलाशना शुरु किया. कोई भी मां किसी चीज़ को अगर शिद्दत से चाहती है, तो वो है उसकी औलाद की ख़ुशी. हर फ्रंट पर. जल्द ही कैथी लिवरपूल का रेड लाइट एरिया खंगाल रही थी. किसी ऐसी कॉलगर्ल की तलाश में, जो उसके बेटे को थोड़ा सा प्यार दे सके. उसके मन से एहसासे-कमतरी को दफा कर सके.
उसकी तलाश का क्या हुआ ये हम नहीं बताएंगे. ये कोई पॉर्न स्टोरी नहीं है. ये एक मां के अपने बेटे की ख़ुशी के लिए किए गए उस प्रयास की कहानी है, जिसे नैतिकता के दायरे से निकल कर देखा जाना चाहिए. 
कैथी ने अपने बेटे की ये कहानी डेली मेल को लिखकर भेजी. उन्होंने इसे छापा भी. आज जूलियस 26 साल का है. खुश है. एक गर्लफ्रेंड भी है उसकी. उसकी मां एक बेहद अज़ीज़ दोस्त की तरह उसके साथ खड़ी है. स्टीरियोटाइप मम्मियों से परे ऐसी माओं को देखना बहुत ख़ुशी दे जाता है.


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