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जुगनुओं की किडनैपिंग और फिरौती में डिनर का इंतजाम, चीन की ये मकड़ियां इतिहास में दर्ज हो जाएंगी!

Science Explained: जिगर मुरादाबादी के शब्दों में इश्क़ आग का दरिया है. ठीक बात. लेकिन मकड़ियों और जुगनुओं पर हाल ही में एक रिसर्च हुई है. जो जुगनुओं के लिए इस शेर के अलग ही मायने बताती नजर आ रही है.

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इस प्रजाति के नर और मादा दोनों ही अपने साथी को लुभाने के लिए जगमगाते हैं. (Credit: Xinhua Fu)

मकड़ी और जुगनू की कहानी होती रहेगी. पहले जिगर मुरादाबादी का ये शेर पढ़िए, 

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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे

इक आग का दरिया है और डूब के जाना है

जिगर मुरादाबादी के शब्दों में इश्क़, आग का दरिया है. ठीक बात. लेकिन मकड़ियों और जुगनुओं पर हाल ही में एक रिसर्च हुई है. जिसकी मानें तो जुगनुओं के लिए ये इश्क़, ‘मकड़े का जाला है, जिसे पार कर जाना है’. नहीं समझे? हम समझाते हैं. 

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दरअसल, रिसर्च जर्नल करेंट बायोलॉजी (Current Biology) में एक रिसर्च छपी है. जिसमें बताया जा रहा है कि जब चीन के वुहान में धान के खेतों में सूरज ढलता है. जुगनू चमकने लगते हैं. इस दौरान नर जुगनू, मादा की तलाश में निकलते हैं.

दरअसल, नर जुगनू, मादा के लाइट लपलपाने को देखकर आकर्षित होते हैं. इससे इन्हें पता चलता है कि ये मादा है. जैसे मोर नाचते हैं, चिड़िया ‘मिलन के गीत’ गाती हैं. वैसे ही जुगनू मिलन के लिए लपलपाते या जगमगाते हैं.

लेकिन कई बार ये ‘मिलन की लाइट’ किसी मकड़े का छलावा भी हो सकती है. ऐसा अब इस रिसर्च में दावा किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि कुछ मकड़ियां नर को पकड़ती हैं. उसे मजबूर करती हैं कि वह मादा की तरह जगमगाने की नकल करे. और जब वो ऐसा करते हैं, तो दूसरे नर इनकी तरफ आकर्षित होते हैं. फिर जाल में फंसकर मकड़ियों का शिकार बन जाते हैं.

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कमाल है ना, जिगर साहब ने इन जुगनुओं की व्यथा सुनी होनी होती, तो शायद इश्क़ को मकड़े का जाला कह ही डालते.

खैर, इस रिसर्च के बारे में अमेरिका की तुफ्तस यूनिवर्सिटी (Tufts University) की जीव वैज्ञानिक सारा लेविस जर्नल साइंस को बताती हैं

यह सच में एक दिलचस्प स्टडी है. नर कभी-कभी मादा को लुभाने के लिए, अपने जगमगाने के पैटर्न में बदलाव करते हैं. ताकि वो बाकी नरों से अलग दिखें और मादा को लुभा पाएं. लेकिन यह नई रिसर्च पहली बार बताती है कि कोई शिकारी नर जुगनुओं में जगमगाने के पैटर्न में बदलाव करवा रहा हो.

दरअसल, एशिया में पाई जाने वाली जुगनुओं की एक प्रजाति है, एब्सकॉन्डिटा टर्मिनेलिस (Abscondita terminalis). नाम थोड़ा जटिल है. इसपर इतना जोर नहीं देते हैं. आते हैं इनके काम पर. इस प्रजाति के नर और मादा दोनों ही अपने साथी को लुभाने के लिए जगमगाते हैं. लेकिन इनकी ये जगमगाहट एक जैसी नहीं होती है. 

क्योंकि मादा के पेट में एक लैंटर्न या जलने वाला हिस्सा होता है, जो एक बार धीरे से जगमगाता है. वहीं नर के पेट में दो लैंटर्न होती हैं, जो जल्दी-जल्दी जलती हैं.

लेकिन इनकी ये जगमगाहट एरानेयस वेंट्रीकोसस (Araneus ventricosus) प्रजाति की मकड़ी के सामने किसी काम की नहीं. क्योंकि नर-मादा दोनों ही इस मकड़ी के लिए आसान शिकार हैं.

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ये सब पता कैसे चला?

चीन की हौजहॉन्ग एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के एक बॉयोलॉजिस्ट, ज़िनहा फु एक रोज फील्ड ट्रिप पर वुहान के खेतों में गए. वहां उन्हें कई नर जुगनू मकड़ी के जालों में फंसे दिखे. उनको शक हुआ कि कहीं ये मकड़ियां, इन नरों का इस्तेमाल करके ज्यादा नरों को आकर्षित तो नहीं कर रही हैं.

अब इस शक का इलाज करना भी जरूरी था. तो रिसर्चर्स ने एक तरकीब लगाई. चार तरह के जालों को टेस्ट किया गया.

  • एक ग्रुप में नर जुगनू के साथ एक मकड़े को रखा गया.
  • दूसरे ग्रुप में बिना मकड़े के जुगनू रखा गया.
  • तीसरे ग्रुप में मकड़े के साथ जुगनू तो रखा गया, लेकिन चमकने वाले हिस्से पर काली स्याही लगा दी गई.
  • वहीं चौथे ग्रुप में न तो जुगनू रखा गया न ही मकड़ा.

फिर किया गया इंतजार, जुगनुओं का. पता चला कि जिस जाले में जगमगाते जुगनू के साथ मकड़ा था, उसमें सात नए जुगनू फंसे. वहीं बिना मकड़े के जाले में दो से ज्यादा जुगनू नहीं फंसे. 

रिसर्च के मुताबिक जब इन नर जुगनुओं के चमकने के पैटर्न को समझा गया, तो वह मादा जुगनू के चमकने जैसा प्रतीत हुआ. जिसके आधार पर ये दावा किया गया कि मकड़े नर को मादा की तरह जगमगाने पर मजबूर करते होंगे. ताकि ज्यादा नर जुगनुओं को आकर्षित करके, जाल में फंसाया जा सके.

वो कहते हैं ना, 

ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे

इक मकड़े का जाला है और… 

या जैसा भी शेर हो!

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