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ऑस्ट्रेलियन मीडिया उनकी टीम का सपोर्ट स्टाफ है

स्लेजिंग और मीडिया ट्रायल बना देते हैं ऑस्ट्रेलिया दौरा मुश्किल

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फोटो - thelallantop

किसी भी टीम के लिए ऑस्ट्रलिया दौरा सबसे मुश्किल दौरा होता है. पिच से लेकर वहां का मीडिया और फिर स्लेजिंग सबकुछ आपको अपने खिलाफ़ मिलता है. हम हमारे कॉमेंटेटर्स और मीडिया से निष्पक्ष होने की इच्छा रखते हैं, निष्पक्ष नहीं तो कम से कम हमारा मीडिया किसी मेहमान खिलाड़ी का अपमान तो नहीं ही करता है और रिटायरमेंट के बाद मंकी गेटादि में शामिल खिलाड़ियों को काम भी देता है, खेल सिर्फ खेल के मैदानतक.

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पर ऑस्ट्रेलियन मीडिया ऐसा नहीं है. एक बार सुनील गावस्कर ने यहां तक कहा था कि ऑस्ट्रेलियन मीडिया पक्षपात ही नहीं करता बल्कि ऑस्ट्रेलियन टीम के सपोर्ट स्टाफ की तरह काम करता है. अब साउथ अफ्रीका से टेस्ट मैचों में हार के बाद ऑस्ट्रेलियन मीडिया ने माहौल को गर्माना शुरू कर दिया है. और इतना गर्मा दिया है कि साउथ अफ्रीकन कप्तान ने मीडिया द्वारा ‘उत्पीड़ित’ किए जाने की शिकायत की है. सोमवार को ऐडिलेड एयरपोर्ट पर चैनल 9 के एक रिपोर्टर ने मीडिया प्रोटोकोल के बावजूद फाफ के रस्ते में आकर बाइट लेने की कोशिश की. आखिरकार सिक्योरिटी गार्ड्स को उस रिपोर्टर को हटाना पड़ा.

पूरा मामला ये है कि दूसरे टेस्ट मैच में फाफ डू प्लेसिस पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगा था. साउथ अफ्रीका ने ये मैच और सीरीज़ अपने नाम कर ली. साउथ अफ्रीकी टीम के मैनेजर मोहम्मद मूसाजी ने एक बयान में कहा है कि मीडिया और खासकर चैनल 9 को कहा गया है कि जब तक सुनवाई नहीं हो जाती फाफ इस मामले पर कोई बयान नहीं देंगे. लेकिन ऐडिलेड एयरपोर्ट पर चैनल 9 के संवाददाता ने इस मीडिया प्रोटोकोल की तौहीन कर, आक्रामक होकर बाइट लेने की कोशिश की. चैनल 9 का एक रिपोर्टर साउथ अफ्रीका के अधिकारियों की घेराबंदी से निकलकर फाफ की टिप्पणी लेने पहुंच जाता है. इसी तरह से इस चैनल के रिपोर्टर ने मेलबर्न में ऐसा किया था. यह तीसरा मौका है जब रिपोर्टर ने आक्रामक होकर हमारे खिलाड़ियों को परेशान किया है. यह मीडिया प्रोटोकोल की साफ-साफ तौहीन है.'

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https://www.youtube.com/watch?v=G9HnfzF1YaM

सुरक्षा गार्डों के एक्शन पर बयान में आगे बताया गया है, 'रिपोर्टर ने लगातार फाफ का बयान लेने की कोशिश की और यह रिपोर्टर खिलाड़ियों के बस तक पहुंचने वाले रास्ते के बीच में आ गया. हमने उसे तीन बार हटने का अनुरोध किया लेकिन वह गुज़ारिश नहीं माना. इस रिपोर्टर के पास कोई आधिकारिक प्रेस कार्ड भी नहीं था. और किसी अज्ञात चीज़ के साथ फाफ की ओर लपका जिससे सीधे-सीधे सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया.’

यह अज्ञात चीज़ माइक था. आखिरकार सुरक्षा गार्डों से हबड़-तबड़ के दौरान ये माइक उसके हाथ से आ गिरा और रिपोर्टर को किनारे किया गया. हाशिम आमला ने ट्वीट कर इस व्यवहार को उकसाने वाला बताया है.

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तो मित्रों ऑस्ट्रेलिया में खेल के मैदान पर खिलाड़ी स्लेजिंग से घेरते हैं और मैदान के बाहर ऑस्ट्रेलियन मीडिया वाले. क्रिकेट-इतर होने वाली इन घटनाओं का दिमाग पर असर पड़ता है और भावुक खिलाड़ी ज्यादातर अपना दिमाग खो बैठता है. बस इतनी सी कोशिश होती है...बाकी सब आदमी ही हैं.

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