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तूने मुझे बुलाया सोनू वालिया!

बहुत कुछ याद आया सोनू वालिया. वो गाना जब वो कबीर बेदी को थिरक-थिरक बरगलाती हैं. ठगिनी क्यों नैना झमकावे. अहो!

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फोटो - thelallantop
एक वक्त था जब इस मुल्क में मिस इंडिया होना स्टारडम की राह का पहला मील पत्थर माना जाता था. इस बात पर नए सिरे से यकीन हुआ आज की बर्थडे गर्ल सोनू वालिया के बारे में जानकारी जुटाने के दौरान. मेरी पैदाइश के साल 1984 में जूही चावला मिस इंडिया बनीं. उनकी सौम्य मुस्कान का आज तक कायल हूं. कई बार तो मुझे लगता था कि जब जूही हंसती हैं, तो उन्हें रि‍कॉर्ड कर रहा कैमरा भी खिलखिलाने लगता है. डायरेक्टर को कई रीटेक लेने पड़ते होंगे उस उजली हंसी को स्थिर करने के लिए. बहरहाल, जूही के ताजपोशी के अगले बरस सोनू वालिया मिस इंडिया बनीं. फिल्मों में उन्होंने अपने वक्त के मुताबिक कई खुले सीन किए. सर्च के दौरान आलम यह आया कि उनकी चर्चित फिल्म आकर्षण का एक झरना किनारे का सेक्स सीन एक पॉर्न ब्लॉग द्वारा यूट्यूब पर अपलोड किया पाया गया. चूंकि इस पैरे में बात मिस इंडिया की हो रही थी सो एक क्विक फैक्ट और. सोनू वालिया के बाद मेहर जैसिया मिस इंडिया बनीं. ये वही मेहर हैं, जो अर्जुन रामपाल की बेटर हाफ हैं. अर्जुन और मेहर हमेशा साथ दिखते हैं. सुना है कि मुंबई की पेज थ्री पार्टीज की जान हैं ये. और गॉसिप वाले हैं कि अर्जुन रामपाल को दूसरों की बीवी पर 'डोरने' वाला बताते हैं. गंदे कहीं के. अब बात सोनू वालिया की. सोनू, कितना घरेलू नाम लगता है न. मतलब मशहूर नेता लोगों में हम इस तरह के नाम तो सुनते हैं कि पप्पू सिंह. गुड्डू पंडित. मुन्ना शुक्ला. वैसे गजबजाइए नहीं ज्यादा. मुन्ना मास्टर का नाम भी हो सकता है. डीयू के एक बहुत श्रद्धेय युवा और चिबिल्ले प्रोफेसर हैं. उनका नाम भी मुन्ना है. हालांकि मुन्ना शब्द पर अनिल कपूर का बालोचित पेटेंट भी है. ये तो हीरो वाली बात हुई. मगर हीरोइन का नाम पिंकू, सोनू, गुड़िया सुनना वैसे ही है जैसे किसी हीरो का स्क्रीन नाम बबलू, छोटू, राजू या टिंकू हो. टिंकू तो जिया होता है. गुड्डू रंगीला है जो अश्लील गाने गाता है और उस पर नाचने के दौरान हीरोइन का मैल रगड़ रगड़ साफ करने की जुगड़ भिड़ाता है. छोटू मेरे एक भाई और मेरे एक साले का नाम है. मगर घर का. बाहर तो शुभांग और सौरभ से सुंदर नाम हैं उनके. हीरो का नाम छोटू हो तो कैसा लगे. सोचिए. यशराज बैनर प्रेजेंट्स छोटू इन एंड एज रंगबाज रोमियो. और फिर माचो मर्द बने छोटू 10 पैक्स दिखाते हुए महंगी कार से उतरें. पर ये सब लफ्फाजी है. सच्चाई तो ये है कि सोनू नाम की हीरोइन हुई है. सोनू को जनता सबसे ज्यादा याद रखती है राकेश रोशन की चर्चित फिल्म 'खून भरी मांग' के लिए. सोचता हूं तो लगता है कि उस वक्त अपने पति की आहा लपलप की शिकार कितनी औरतें बस एक जोड़ी हीरे के टॉप्स की कामना करती होंगी गुपचुप मन में. रेखा को जब उसके पति कबीर बेदी ने मगरमच्छ का शिकार होने के लिए धकेल दिया था. तो बचते बचते उसका चेहरा जाबड़ जबड़ों की चपेट में आ गया था. मगर भला हो मल्लाहों का जो उन्होंने बचा लिया. और फिर कान में फंसे रहे हीरे के टॉप्स सर्जरी, मेकओवर और पुराने पति को उल्लू बनाइंग के काम आए. फिर भटक गए. तो बात हो रही थी 'खून भरी मांग' की. उसमें सोनू कबीर बेदी की गर्लफ्रेंड बनी थीं. एक गाना है. सोनू और कबीर पूल में तैर रहे हैं. तैरते तैरते रोमांस करने लगते हैं. फिर उन्हें ध्यान आता है कि ये हिंदी रोमांस है. बिना गाने के अधूरा अपशकुनी माना जाएगा. तो वे पूल के बाहर आकर नाचने लगते हैं. चूंकि कलाओं ने रिझाने का बैनामा नायिका के नाम कर रखा है. तो कबीर बेंच पर पसर जाते हैं और सोनू थिरक-थिरक उन्हें बरगलाती हैं. ठगिनी क्यों नैना झमकावे. शायद स्वर्ग में सेब खाने के बाद से ही ईव ने नाचना शुरू कर दिया था. और लोग कहते हैं कि औरत नचाती है. इस बारे में सोचें तो लगता है कि जब मर्दों के हाथ से भाषा की डोर छूटने सी लगी तो उन्होंने मुहावरों पर पेटेंट करना शुरू कर दिया. भाषा चूंकि बाजारू के साथ घरेलू चीज भी है. इसलिए इसमें औरतों ने तुरपाई कर अपने हिस्से के शब्द भी जोड़ दिए. मगर मुहावरे तो शास्त्रीय चीज थे. उन्हें कथाओं का सहारा चाहिए था. इसलिए मर्दों ने मुहावरे गढ़े और जर जोरू जमीन जैसे पदबंध दिए. https://youtu.be/WZehlgOCd98?t=22s हां, तो अगर आप अब भी मूल विषय पर अटके हों तो, सोनू नाच रही है. और नाचने के दौरान चूंकि वह पूरी तरह से नाच पर केंद्रित है. इसलिए बिकिनी बदलने का ख्याल भी फटकने नहीं देती. इससे दर्शक का आस्वाद भी निर्बाध और सरस रहता है. फिर नटनियों सी कला दिखाते हुए सोनू तौलिये का सुंदर इस्तेमाल करती हैं. पाठक गौर करें. जब सोनू ये कर रही थीं, तब सलमान खान अपना हाई स्कूल के फॉर्म में फोटू चिपका रहे होंगे. इसलिए तौलिया डांस पर अब से उनके पट्टे को पर्मानेंट न माना जाए. विचलित न हों. आखिर में सोनू का डांस यहीं वीडियो चिपकाकर आपको दिखाया जाएगा. मगर उसके पहले चूंकि जन्मदिन है. इसलिए सोनू वालिया के बारे में कुछ छोटी छोटी मोटी बातें जान लें.

1.

सोनू ने मनोविज्ञान पढ़ा है. निश्चय ही वह मानव मन को बखूबी समझती होंगी. मगर बॉलीवुड ये नहीं समझ पाया और सोनू का करियर बड़े से छोटे पर्दे पर होता हुआ 'जय मां शेरावाली' हो गया. भक्त नाराज न हों. 'जय मां शेरावाली' 2008 में आई सोनू की आखिरी फिल्म का नाम है.

2.

सोनू को इतना फुटेज देने के पीछे आप एक साजिश भी तलाश सकते हैं. वो क्या है कि हम और सोनू सगोत्री हैं. वह भी पत्रकारिता की स्टूडेंट रहीं. और हम तो रोज सुबह से इस काली विद्या को साधने में लग जाते हैं. साधकों से सावधान. उपद्रवी गोत्र तो कतई न कह देना. ये दिल्ली है. हाय हत्यारी होती है यहां की.

3.

अरे, ये तो बहुत पर्सनल हो रहा है. पर्सनल तो लाइफ होती है. सोनू वालिया की पर्सनल लाइफ का क्या. उन्होंने सूर्य प्रकाश से शादी की. उनका निधन हो गया. फिर उन्होंने अमरीका में रहने वाले फिल्म प्रॉड्यूसर प्रताप सिंह से बियाह किया. उनकी एक बेटी है. प्यारी ही होगी. बेटियां प्यारी ही होती हैं बाई डिफॉल्ट. मगर किसी के बेटे उनके हिस्से का प्यार बांटने बढ़ाने के नाम पर अकसर गड़बड़ कर देते हैं.
  और अब उस प्रलयंकारी वीडियो से पहले की आखिरी कथा. सोनू वालिया महाकाव्य महाभारत पर बने सीरियल में भी थीं. वह अर्जुन की पत्नी बनी थीं. मणिपुर वाली पत्नी. जब अर्जुन कौरवों संग आइस-पाइस खेल रहे थे. तो धप्पा से बचने के लिए मणिपुर पहुंच गए थे. वहां उन्होंने राजकुमारी चित्रांगदा से विवाह किया. उन दोनों के बेटे का नाम था बब्रुवाहन. कथा कुछ यूं बताई जाती है कि अर्जुन लौट आए गंगा जमुना के मैदान में. लड़ने और राज करने. चित्रांगदा तभी समझ गई थी कि नॉर्थईस्ट वालों के लिए इंद्रप्रस्थ कुछ ठीक नहीं. सो रुक गई. उसका बेटा बब्रुवाहन अपने नाना का वारिस बना. उसने ठोस साम्राज्य खड़ा किया. फिर एक दिन अश्वमेध का घोड़ा लिए अर्जुन पहुंच गए. गजब लड़ाई हुई होगी. और फिर गैंगस्टर गोली से ही मरता है की तर्ज पर अर्जुन की मौत हो गई. बब्रुवाहन का तीर शूं से अर्जुन को लगा. जब बब्रुवाहन को ज्ञात हुआ तो हाय हाय मच गई. उसने खुद को मारने का संकल्प किया. पर तभी उसकी सौतेली मां (इतिहास और फिल्मों ने कैसी अशोभनीय स्मृति ध्वनि लाद दी है इस सौतेल शब्द पर. सुनते ही विलेन वाली एंट्री टोन बजने लगती है) सौतेली मां और मणिपुर के पड़ोस के नागालैंड की नागा राजकुमारी उलुपी आईं. उनके पास एक मणि थी. उससे अर्जुन जीवित हो गए. बब्रु पापा के साथ दिल्ली घूमने आया. आया तो पता चला, तीर नहीं वो तुक्का था. असल में तो अर्जुन को मरना ही था. क्योंकि उसे एक वसु का श्राप लगा था. क्योंकि अर्जुन ने अपने पापा के पापा के पापा के पापा भीष्म को मारा था. अब मैंने सोनू वालिया के नाम पर और कुछ सुनाया तो आप मेरा वध कर सकते हैं. इसलिए फिलवक्त, इजाजत. अब देखें, सुनें बिकिनी नाच सोनू वालिया का: https://www.youtube.com/watch?v=Wl7dSmWfFoI

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