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शरद पवार का एकनाथ शिंदे को सम्मानित करना महज संयोग या पर्दे के पीछे कोई खेल चल रहा?

महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बीच विवाद होते रहे हैं, लेकिन शरद पवार हमेशा बीच-बचाव वाली भूमिका में नज़र आए. ये पहला मौका है जब उद्धव और शरद पवार की पार्टी एक-दूसरे के विरोध में बयान दे रही हैं.

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11 फरवरी, 2025 को नई दिल्ली में कार्यक्रम के दौरान एकनाथ शिंदे और शरद पवार की तस्वीर. (ANI)

शरद पवार (Sharad Pawar) इन दिनों महाविकास अघाड़ी (MVA) के अपने साथी उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की शिवसेना के निशाने पर हैं. नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में पवार ने डिप्टी सीएम शिंदे एकनाथ शिंदे (Deputy CM Eknath Shinde) को सम्मानित किया, जिसके बाद से दोनों पार्टियों के बीच तल्ख बयानबाजी देखने को मिल रही है. शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) और प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने तीखे शब्दों में शरद पवार को आड़े हाथों लिया है. ये पहला मौका है जब उद्धव और शरद पवार की पार्टी एक-दूसरे के विरोध में बयान दे रही हैं. महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बीच विवाद होते रहे हैं, लेकिन शरद पवार हमेशा बीच-बचाव वाली भूमिका में नज़र आए. पर इस बार कहानी कुछ और है. सवाल है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राजनीतिक दांव-पेंच है या मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है?

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शिंदे को सम्मान

11 फरवरी को दिल्ली में एकनाथ शिंदे को महादजी शिंदे राष्ट्र गौरव अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. इस दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे. पवार ने सिर्फ शिंदे के साथ मंच साझा कर उन्हें सम्मानित हीं नहीं किया, उनकी तारीफ भी की. उन्होंने कहा-

शिंदे को शहरी मुद्दों की अच्छी समझ है और उन्होंने मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे में अच्छा काम किया है.

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सम्मान पाकर गदगद शिंदे ने भी पवार की तारीफ में कसीदे पढ़े. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक शिंदे ने कहा-  

शरद पवार की ओर से मुझे कभी गुगली का सामना नहीं करना पड़ा. पवार साहब सदाशिव शिंदे के दामाद हैं, जो एक स्पिन गेंदबाज थे. पवार जब गुगली फेंकते हैं तो उसे समझना मुश्किल होता है. उम्मीद है कि भविष्य में पवार मुझ पर गुगली नहीं फेंकेंगे और मुझे ऐसी गुगली का सामना नहीं करना पड़ेगा.

एक तरफ पवार ने उस शख्स को सम्मानित किया जिसने शिवसेना पार्टी तोड़कर महाविकास अघाड़ी की सरकार गिराई थी, दूसरी तरफ शिंदे ने पवार की खूब तारीफ की. ये सब उद्धव ठाकरे की शिवसेना को नागवार गुज़रना लाज़मी था. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए संजय राउत ने कहा-

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पवार साहब ने हमें निराश किया है. हमें कभी सोचा नहीं था वो ऐसा करेंगे. उन्होंने एक गद्दार को सम्मानित किया, जिसने महाराष्ट्र को बर्बाद करने की कोशिश की. पवार साहेब उस धोखेबाज़ को कैसे सम्मानित कर सकते हैं जिसने MVA की सरकार गिराई और उस पार्टी को तोड़ दिया जिसने हमेशा महाराष्ट्र और मराठा मानुस के अधिकारों की बात की.

इस विवाद पर आदित्य ठाकरे की भी तीखी प्रतिक्रिया आई है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा- 

जो लोग महाराष्ट्र विरोधी हैं, वे राष्ट्र विरोधी हैं. हम ऐसे लोगों को सम्मानित नहीं कर सकते जो गलत काम में लिप्त हैं. यह हमारे सिद्धांतों के खिलाफ है. मुझे उनके (शरद पवार के) सिद्धांतों के बारे में जानकारी नहीं है.

दूसरी तरफ NCP (SP) का कहना है कि इस मामले को इतना तूल नहीं दिया जाना चाहिए. शरद पवार की पार्टी कह रही है कि सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.

क्या चल रहा है महाराष्ट्र में?

शरद पवार और शिंदे का एक साथ मंच पर दिखना दो तर्कों को बल देता है. पहला, कि शरद पवार देश के ऐसे नेता के तौर पर जाने जाते हैं जिनसे उनके धुर विरोधियों के भी अच्छे संबंध रहे हैं. बाल ठाकरे की और शरद पवार की विचारधारा राजनीतिक तौर पर एकदम उलट रही. लेकिन पवार बाल ठाकरे के साथ भी नजर आते थे. एक दूसरे के विरोधी होने के बाद भी निजी संबंधों में कटुता नहीं थी. कुछ ऐसे ही रिश्ते शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच भी हैं. दोनों नेता राजनीतिक तौर पर एक दूसरे के विरोधी हैं, लेकिन दशकों से दोस्त भी हैं. पीएम मोदी भी इस बात को सार्वजनिक मंच पर कह चुके हैं. इसे शरद पवार की राजनीतिक का अंदाज कहा जाता है. शिंदे को सम्मानित करने के पीछे एक कारण इसे भी माना जा रहा है. NCP(SP) इसी तर्क पर ज़ोर दे रही है.

लेकिन इस सियासी कहानी का दूसरा पहलू भी है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से महाविकास अघाड़ी में सबकुछ सामान्य नज़र नहीं आता. उद्धव की शिवसेना और कांग्रेस के बीच मतभेद के सुर सुनाई दिए. यहां तक कि शिवसेना ने BMC और अन्य लोकल बॉडी चुनाव अकेले लड़ने का एलान कर दिया. लेकिन बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं थी. कहा जा रहा है 2019 के बाद उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच जो दूरियां पनपी थीं, वो कुछ कम हुई हैं. सूत्रों को मुताबिक राज्य में नई सरकार के गठन के बाद ठाकरे और फडणवीस के बीच अलग-अलग कारणों से चार मुलाकातें हो चुकी हैं. दोनों नेताओं के बीच कम्यूनिकेशन गैप धीर-धीरे कम हो रहा है.

इधर मुख्यमंत्री पद ना मिलने से एकनाथ शिंदे लगातार नाराज़ चल रहे हैं. शिंदे की नाराज़गी तब भी सामने आई जब जिलों के गार्जियन मिनिस्टर के बंटवारे के बाद वह रूठकर एक बार फिर अपने गांव सतारा चले गए. सूत्रों के मुताबिक शिंदे कैबिनेट मीटिंग्स में भी शामिल नहीं होते. दूसरी तरफ शिंदे जितनी नाराज़गी दिखा रहे हैं, अजित पवार बीजेपी और फड़णवीस के उतने ही करीब होते दिख रहे हैं.

ऐसे में शरद पवार का शिंदे को सम्मानित करना प्रेशर पॉलिटिक्स का एक हिस्सा भी माना जा रहा है. एक तरफ BMC चुनाव में अकेले लड़ने का एलान करने वाली उद्धव ठाकरे की पार्टी को भी संदेश दिया गया, दूसरी तरफ NDA में नाराज़ में शिंदे की असहजता भी कम हुई.

हालांकि, NCP(SP) इससे बात के सहमति नहीं जताती. NCP(SP) के सांसद अमोल कोल्हे ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि इस कार्यक्रम को प्रेशर पॉलिटिक्स से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिस कार्यक्रम में शरद पवार ने शिंदे को सम्मानित किया उसका राजनीति से कोई लेनादेना नहीं है.

वीडियो: नेतानगरी: शरद पवार और देवेंद्र फडणवीस की दुश्मनी के पीछे की कहानी पता लग गई!

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