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सऊदी अरब के इस वादे से कट्टर मुसलमानों को बहुत मिर्च लगने वाली है

जो कट्टर इस्लाम सऊदी अरब की पहचान है, वो उसी से पीछा छुड़ाने का वादा कर रहा है.

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प्रिंस सलमान ने दिन में पुलवामा हमले पर कुछ नहीं बोला. इस पर सुगबुगाहट होने पर रात में बयान जारी किया गया. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
सऊदी अरब का नाम सोचो. दिमाग में चार ही चीजें आएंगी. पहला, तेल. दूसरा, मक्का-मदीना. तीसरा, कट्टरता. चौथा, शेखों की अय्याशी और फिजूलखर्ची. इनमें से एक चीज शायद जल्द खत्म हो जाए. कट्टरता. सऊदी के राजकुमार हैं. मुहम्मद बिन सलमान. शॉर्ट में बोलो, तो प्रिंस सलमान. किंग सलमान के बेटे. गद्दी के वारिस हैं. अपने पापा के बाद वो ही बनेंगे सऊदी के सुल्तान. इन्होंने ही कहा है. सऊदी कट्टरता से तौबा कर लेगा. माने, सऊदी बदल जाएगा. उन्होंने तो ये भी मान लिया कि सऊदी की कट्टरता गलत थी. उन्होंने माना कि सऊदी के कट्टर इस्लाम को नरम होने की जरूरत है. ये खबर शायद आज की सबसे अच्छी खबरों में से एक है.
किंग सलमान के सुल्तान बनने के बाद से ही प्रिंस सलमान की ताकत काफी बढ़ गई. न केवल उन्हें विदेश मंत्रालय सौंपा गया, बल्कि यमन में सऊदी कार्रवाई जैसे अहम फैसले लेने की सहूलियत भी दी गई.
किंग सलमान के सुल्तान बनने के बाद से ही प्रिंस सलमान की ताकत काफी बढ़ गई. न केवल उन्हें विदेश मंत्रालय सौंपा गया, बल्कि यमन में सऊदी कार्रवाई जैसे अहम फैसले लेने की सहूलियत भी दी गई.

तो क्या सऊदी अरब इंडोनेशिया जैसा बन जाएगा? प्रिंस सलमान ने वादा किया है. सऊदी को नरम बनाएंगे. यहां तक कि सऊदी कट्टरपंथी इस्लाम से भी तौबा कर लेगा. एक तरह से सोचो, तो सऊदी इंडोनेशिया बन जाएगा. प्रिंस सलमान की बातों से उम्मीद तो जगी है. उन्होंने कहा, ऐसा देश बनाना चाहते हैं, जहां नागरिकों के पास ज्यादा से ज्यादा अधिकार हों. उन्होंने कहा कि सऊदी आज की तारीख में जितना कट्टर है, वैसा हमेशा से नहीं था. बोले:
सऊदी हमेशा से ऐसा नहीं था. पिछले 30 सालों का सऊदी का अतीत सामान्य नहीं रहा है. पिछले 30 सालों में जो हुआ, उसे सऊदी का सच मत समझिए. वो सऊदी की पहचान नहीं है. पिछले 30 सालों से पूरे मध्यपूर्वी एशिया में जो हुआ, वो भी इस हिस्से की सच्चाई नहीं है. 1979 में ईरान के अंदर क्रांति हुई. दुनियाभर के इस्लामिक देशों पर दबाव बढ़ा. कई देशों ने इस कट्टरपंथी इस्लामिक मॉडल की नकल करने की कोशिश की. सऊदी भी इनमें से एक था. हमें पता ही नहीं था कि किस तरह इस परेशानी का सामना किया जाए. इस चक्कर में कट्टरता बढ़ती गई. दिक्कत आगे बढ़ते-बढ़ते पूरी दुनिया में फैल गई. अब मौका आ गया है कि हम इस कट्टरता से पीछा छुड़ाएं. इससे छुटकारा पाएं.
जून 2017 के पहले तक प्रिंस सलमान सेकेंड क्राउन प्रिंस थे. यानी, मौजूदा सुल्तान के बाद गद्दी पर उनकी दावेदारी दूसरे नंबर पर थी. उनसे ऊपर थे प्रिंस नायफ, जो कि सुल्तान के भतीजे हैं.
जून 2017 के पहले तक प्रिंस सलमान सेकेंड क्राउन प्रिंस थे. यानी, मौजूदा सुल्तान के बाद गद्दी पर उनकी दावेदारी दूसरे नंबर पर थी. उनसे ऊपर थे सुल्तान के भतीजे प्रिंस नायफ. अब प्रिंस नायफ को हटाकर प्रिंस सलमान को क्राउन प्रिंस बना दिया गया है.

मुसलमानों की छवि खराब करने में इस्लामिक देश भी कसूरवार हैं इतने समय बाद अब जाकर सऊदी को एहसास हुआ है. अपनी जिम्मेदारियों का. पूरी दुनिया में मुसलमानों की एक खास तरह की छवि बन गई है. मान लिया गया है कि मुसलमान है, तो कट्टर ही होगा. पिछले कुछ दशकों में माहौल बहुत खराब हुआ है. लोगों के अंदर कट्टरता बढ़ी है. आतंकवाद बढ़ा है. आतंकवाद को एक खास धर्म से जोड़ दिया गया है. लोग इस्लामोफोबिक हो गए हैं. मतलब, उनको इस्लाम और मुसलमानों की हर बात में ही बुराई दिखने लगी है. कइयों के लिए इस्लाम=आतंकवाद हो गया है. ऐसा नहीं कि इसके लिए अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिम के देश ही जिम्मेदार हों. कई इस्लामिक देश भी कसूरवार हैं. उनकी कट्टरता ने दुनियाभर के मुसलमानों की छवि खराब की है. लगता है कि अब सऊदी को भी इस बात का एहसास हो गया है. कि सुधरना जरूरी है. चीजें ऐसे नहीं चल सकती हैं. शायद इसीलिए प्रिंस ने कहा:
दुनिया में सऊदी अरब की बहुत अहमियत है. दुनिया के सबसे पैसे वाले देशों में शामिल है सऊदी. तीन महादेशों के बीच हैं हम. सऊदी को सुधारने का मतलब होगा कि हम इस पूरे इलाके को बेहतर बना रहे हैं. दुनिया को बेहतर बना रहे हैं. ये ही हमारी कोशिश है. हमें उम्मीद है कि बाकी लोग भी इसमें हमारी मदद करेंगे.
सऊदी की अर्थव्यवस्था अभी पूरी तरह से तेल पर निर्भर है. अब वो अपने हाथ-पैर मार रहा है, ताकि कमाई के दूसरे रास्ते भी तैयार कर सके.
सऊदी की अर्थव्यवस्था अभी पूरी तरह से तेल पर निर्भर है. अब वो अपने हाथ-पैर मार रहा है, ताकि कमाई के दूसरे रास्ते भी तैयार कर सके.

सऊदी की ताकत है कच्चा तेल, लेकिन ये तो खत्म हो जाएगा सऊदी की ताकत है तेल. कच्चा तेल. इसी ऑइल इकॉनमी से उसने अकूत दौलत कमाई है. लेकिन तेल का क्या है. आज है, कल नहीं होगा. सऊदी उस आने वाले कल के लिए खुद को तैयार कर रहा है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बहुत पहले से ये प्लानिंग शुरू कर दी थी. जमकर निवेश किया. आज देखिए. नतीजा सामने है. लाखों लोग हर साल UAE जाते हैं. घूमने. कई कंपनियां हैं वहां. तेल की कमाई के साथ-साथ इन जगहों से भी खूब पैसा आता है. इस मामले में सऊदी सुस्त रहा है. उसने अब हाथ-पैर हिलाने शुरू किए हैं. प्रिंस सलमान का भी ये ही फोकस है. पैसे के लिए तेल से निर्भरता हटाना. कंपनियों को सऊदी में पैसा लगाने के लिए तैयार करना. इसके लिए सऊदी को बदलना होगा. मुनाफे का गणित ही ऐसा है. लोग आपसे डरेंगे और दूर रहेंगे, तो मुनाफा कैसे मिलेगा. शायद ये भी एक वजह है कि सऊदी अपनी छवि बदलना चाहता है.
किंग सलमान अहम फैसलों के लिए अपने बेटे पर काफी निर्भर हैं. उन्हें प्रिंस पर काफी भरोसा भी है.
किंग सलमान अहम फैसलों के लिए अपने बेटे पर काफी निर्भर हैं. उन्हें प्रिंस पर काफी भरोसा भी है.

प्रिंस सलमान की सबसे बड़ी ताकत ये है कि वो जवान हैं सऊदी को प्रिंस सलमान से काफी उम्मीदें हैं. एक ऐसा राजपरिवार, जहां बूढ़े-बुजुर्ग ही गद्दी पर बैठते हों, वहां जवान सलमान का वारिस बनना बड़ा बदलाव है. इसी साल जून में प्रिंस को गद्दी का वारिस बनाया गया. उन्हें ये हक देने के लिए मुहम्मद बिन नायफ का हक छीन लिया गया. नायफ मौजूदा सुल्तान के भतीजे हैं. किंग सलमान के बाद उनको ही सुल्तान बनना था. मगर उन्हें दरकिनार कर ये ओहदा प्रिंस सलमान को दे दिया गया. वैसे अपने पिता के सुल्तान बनने के बाद से ही प्रिंस की हस्ती काफी बड़ी हो गई थी. लोग कहते हैं कि जवान होना प्रिंस की सबसे बड़ी ताकत है. जवान लोगों से उम्मीद की जाती है बदलाव की. लचीलेपन की. ये ही उम्मीद प्रिंस से भी थी.
प्रिंस का कहना है कि ईरान में हुई क्रांति के बाद बाकी इस्लामिक देशों पर काफी दबाव बन गया. उनमें इस कट्टर मॉडल को अपने यहां लागू करने की होड़ सी लग गई. प्रिंस के मुताबिक, सऊदी भी इसका शिकार हुआ.
प्रिंस का कहना है कि ईरान में हुई क्रांति के बाद बाकी इस्लामिक देशों पर काफी दबाव बन गया. उनमें इस कट्टर मॉडल को अपने यहां लागू करने की होड़ सी लग गई. प्रिंस के मुताबिक, सऊदी भी इसका शिकार हुआ.

पिछले कुछ दिनों में सऊदी ने कुछ अच्छे फैसले लिए तो हैं हाल के दिनों में सऊदी ने कुछ अच्छे फैसले भी लिए. जैसे, महिलाओं को गाड़ी चलाने का हक दिया. सुनने में ये बहुत मामूली बात लगती है. मगर सऊदी जैसे कट्टर देश में ये एक क्रांति ही है. इस बदलाव के पीछे भी प्रिंस का ही प्रभाव माना गया. कट्टरपंथी इमामों और मौलानाओं से दूरी बनाई गई. इन फैसलों से बदलाव की उम्मीद तो जगी थी. अब प्रिंस की बातों से ये उम्मीद बढ़ी है. वो कहते हैं,
हम पहले जैसे थे, वैसे ही होने जा रहे हैं. पहले हम जिस इस्लाम को मानते थे, वो नरम था. लचीला था. वो सभी लोगों, सभी धर्मों के लिए खुला हुआ था. सबके साथ मिलकर चलता था. सऊदी की मौजूदा आबादी में जवान लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है. 70 फीसद से ज्यादा लोग 30 साल से कम उम्र के हैं. हम अपनी आगे की जिंदगी कट्टरता से लड़ने में नहीं गंवाना चाहते. कट्टरपंथी ख्यालातों को हम अभी, इसी वक्त हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहते हैं.
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प्रिंस को सबसे पहले तो अपने यहां के कट्टरपंथियों से निपटना होगा. उन्हें कट्टरता की आदत हो चुकी है. इतने सालों से सऊदी इस्लामिक कट्टरता का चेहरा बना हुआ है. इस पहचान से पीछा छुड़ाना आसान नहीं होगा.

बदलने के लिए सऊदी को बहुत मशक्कत करनी होगी सऊदी में अभी जो हो रहा है, वो मामूली बात नहीं है. इससे पहले कभी उसने इस तरह सुधरने का लालच नहीं दिखाया. जद्दोजहद नहीं की. बल्कि उसके ऊपर तो दुनियाभर के कट्टरपंथियों और आतंकवादियों की फंडिंग का इल्जाम भी लगता रहा है. जाहिर है, ये बदलाव एक तरह की क्रांति ही है. वहां रहने वाला कट्टरपंथी तबका कट्टर इस्लाम का आदी हो चुका है. वो बदलना नहीं चाहेगा. ऐसे में संघर्ष हो सकता है. ऐसी चीजों से निपटने के लिए तैयारी करनी होगी. सऊदी को अपनी इकॉनमी और सोसायटी, दोनों को सुधारने पर बहुत सिर खपाना होगा. ये नाकों चने चबाने जैसा मुश्किल काम है. नामुमकिन नहीं है मगर. और अगर प्रिंस सलमान की बातों और नीयत में ईमानदारी है, तो वो मनमाफिक नतीजे हासिल भी कर सकते हैं.


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