कहते हैं क्रांतियां तब तक अधूरी हैं जब तक कोई क्रांतिगीत उसके साथ ना जुड़ा हो. बड़े-बड़े क्रांतिकारी आयोजनों को सफल करवाने में एक फैक्टर बहुत कारगर साबित हुआ है. वो है कोई ऐसा गीत जो आन्दोलनकारियों में जोश भर दे. उनकी रगों में बह रहे ख़ून की रफ़्तार बढ़ा दे. एक ऐसा प्रेरक गीत लीडर के दर्जनों भाषणों पर भारी पड़ता है.कल विपक्ष ने भारत बंद का ऐलान किया था. आप मानो, न मानो, कल के भारत बंद की बत्ती गुल होने के पीछे यही वजह थी. विपक्ष के पास ऐसा कोई गीत ही नहीं था जो बैंक के बाहर लंबी-लंबी कतारों में लगी जनता को उकसा सके. जो उनको लाइन तोड़ कर सरकार के इस हाहाकारी फैसले के विरोध में उतरने की हिम्मत दे सके. हमसे पूछा होता किसी ने तो हम तमाम भारत बंद के अभिलाषी लोगों से कहते कि आप ये वाला गीत हर बैंक और एटीएम के सामने रिपीट मोड पर बजाओ. जनता खुदै सब कुछ बंद कर देगी. कतार से त्रस्त जनता जब 'तोड़ दे कतार' का मंत्र बार-बार सुनती तो उसे रोकने की ताकत किसी माई के लाल में ना होती. 'सरहद पर जवान मर रहे हैं' से ज्यादा मारक साबित होता ये 'तोड़ दे कतार' वाला मंतर. लेकिन साहिर कहते हैं ना कि 'हाय ये हो न सका!' तो भैया विपक्ष का आइडिया रहा फ़ेल और जनता की बनी रही रेल. खैर आप गीत सुनिए जिसमें क्यू को ब्रेक करने की महिमा का बखान हो रहा है. वैसे तो इस गीत में प्रेम की नीरस गतिविधियों से बेज़ार शख्स को ये सलाह दी जा रही है कि वो कतार तोड़े और कुछ आउट ऑफ़ दी बॉक्स करे. लेकिन थोड़े से हेरफेर के साथ ये गीत आज के हालात पर भी सटीक बैठता है. नोट :- जिस फिल्म का ये गीत है उसका नाम 'इक्कीस तोपों की सलामी' है. अब चाहे आप ऐसा उकसाऊ गीत लिखने वाले गीतकार को दें ये सलामी या देश को कतार में ला खड़ी करने वाली सरकार को. आपकी अपनी श्रद्धा है. https://www.youtube.com/watch?v=N3wHZiQpUQY
वो गीतकार, जिसने नोटबंदी के बारे में भविष्य देख लिया था
इस गीतकार को पहले ही पता था कि देश लाइन में लगने वाला है.
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Image: PTI
एक ऐसा गीत है, जिसने दो साल पहले ही उस समस्या का समाधान बता दिया था जिससे आज समूचा भारत दो-चार हो रहा है. कतार से निजात पाने का तरीका बताने वाले गीतकार संदीप नाथ को पता भी नहीं होगा कि उनके इस गीत को लिखने के दो साल बाद ये गीत इतना प्रासंगिक हो उठेगा. हालांकि इसे गाने वाले गायक लभ जंजुआ आज इस दुनिया में नहीं हैं.
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