इफ्तखार, जो विजय को डॉन बनाता है और उसे फंसाकर मर जाता है. अक्सर अपनी जीप से इफ्तखार कारों का पीछा करता था और पीछे से अपनी छह राउंड वाली रिवॉल्वर से अगले का टायर पंक्चर करने की कोशिश करता था. ढिचक्याऊं वाली तीखी आवाज के साथ. लेकिन यहां बात ना तो इफ्तखार की है, ना जीप की, ना उसके आगे भागती कार की. बात है उसके हाथ में छह राउंड वाली रिवॉल्वर की. देसी भाषा में जिसे यूपी में तमंचा कहा जाता है. तो ये राउंड वाला तमंचा कहां से आया. किसने इसे बनाया?
रिवॉल्वर का इतिहास खोजते पीछे जाएं तो एक आदमी पकड़ में आता है. सैमुएल कोल्ट. अमेरिका में रिवॉल्वर का सबसे बड़ा सौदागर. हालांकि कोल्ट ने कभी रिवॉल्वर का आविष्कार करने का दावा नहीं किया, लेकिन उसने रिवॉल्वर में छोटा सा घूमने वाला सिलेंडर जोड़ा था जिसमें गोली भरी जाती थी और बार-बार गोली लोड करने की जरूरत नहीं पड़ती थी. इस तरह की रिवॉल्वर को कोल्ट रिवॉल्वर कहा जाता है.

सैमुएल कोल्ट
1836 में पहली बार उसने इस तरह की रिवॉल्वर का पेटेंट करवाया. कोल्ट ने कहा था कि रिवाल्वर में ये सिलेंडर लगाने का आइडिया उसे समुद्र में आया. इससे पहले 16वीं सदी में जर्मनी की रिवॉल्वर थी, जिसमें एक ही बैरल होती थी और एक ही फायर किया जा सकता था. बार-बार उसे लोड करना होता था. कोल्ट की रिवॉल्वर आई तो चारों तरफ इसकी धूम हो गई. खूब बिकने लगीं और इनसे कोल्ट ने ढेर सारा पैसा कमाया. आज ही के दिन उसने अमेरिकी सिविल वॉर के दौरान USA को अपनी रिवॉल्वर बेची थी और इसकी वजह से उस पर दलाल और घुसपैठिया होने का आरोप लगा. मेकिंग ऑफ़ कोल्ट सैमुएल कोल्ट 11 साल की उम्र में पढ़ाई के साथ एक किसान के यहां पार्ट टाइम काम करता था. गरीब था. उसे वैज्ञानिक खोजों के बारे में पढ़ने का शौक था. 15 साल की उम्र में उसने अपने पिता के टेक्सटाइल के काम में हाथ बंटाना शुरू किया. इसी दौरान कोल्ट ने बहुत से छोटे-मोटे प्रयोग करने भी शुरू कर दिए थे.
कोल्ट 1951 नेवी ऱिवॉल्वर1830 में वो एक समुद्री यात्रा पर जा रहा था. वो जहाज के व्हील सिस्टम से प्रभावित हो गया जिसमें रस्सियों के सहारे एक पहिए से जहाज को कंट्रोल किया जाता था. उसने सोचा इस मेकनिज़म का इस्तेमाल बंदूक बनाने के लिए किया जा सकता है. इसी यात्रा के दौरान उसने लकड़ी के एक रिवॉल्वर का मॉडल बनाया. उसने सोचा कि लौटकर एक असली गन बनाई जाएगी.
शुरू में उसने एक गन बनाई, जो हाथ में ही फट जाती थी. प्रयोग सफल नहीं रहे. इसके बाद उसे प्रयोग के लिए पैसे नहीं मिलते थे. नॉर्थ अमेरिका गया और डॉक्टर काउल्ट के नाम से रहने लगा. यहां वो अपना खर्चा-पानी चलाने और प्रयोग के लिए पैसे जुटाने के लिए लॉफिंग गैस का डेमो दिखाता था.
कुछ पैसे हाथ में आए तो उसने एक लुहार जॉन पैटरसन से दोस्ती की. उसने पैटरसन के साथ मिलकर नए प्रयोग करने शुरू कर दिए. वो घूमने वाले सिलेंडर के साथ ऐसी गन बनाना चाहता था, जिसे चलाने के लिए बार-बार लोड ना करना पड़े और इससे कई राउंड फायर होते हों. दोनों ने ऐसी रिवॉल्वर बना ली. बाद में कोल्ट को इसे पेटेंट करवाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े. उसने अमेरिका में इसके पेटेंट के लिए अप्लाई किया लेकिन उससे कहा गया कि उसे ब्रिटेन से एक फॉरेन पेटेंट करवाना होगा.
1835 में वो इंग्लैंड गया. शुरू में ब्रिटिश के अफसर आनाकानी कर रहे थे. लेकिन इस गन में कोई खामी नहीं थी और अपने आप में मौलिक खोज थी. अमेरिका लौटकर उसने फिर से पेटेंट के लिए अप्लाई किया और उसे अपनी रिवॉल्विंग गन के लिए पेटेंट मिल गया. इसे कोल्ट और उसके दोस्त पैटरसन के नाम पर कोल्ट-पैटरसन नाम दिया गया.

कोल्ट-पैटरसन
शुरू हुआ हथियारों का कारोबार 1836 में इन रिवॉल्वर को बनाने और बेचने के लिए उसने बिजनेस खड़ा किया और एक कंपनी खोली. लेकिन शुरू में उसे कोई खरीदार नहीं मिला. उसने इनकी मार्केटिंग करनी शुरू की. लेकिन फिर भी उसकी कंपनी नहीं चली और उस पर कर्ज बढ़ता गया. 1843 में उसकी कंपनी बंद हो गई. फिर लौटा कोल्ट इसी दौरान 1846 में मेक्सिको-अमेरिका के बीच सिविल वॉर शुरू हो गया. जाहिर है युद्ध हथियार बेचने वालों के लिए सबसे सुनहरे मौके होते हैं. और कोल्ट ने भी मौके का फायदा उठाया. टेक्सास के कैप्टन सैमुअल वॉकर ने कोल्ट को 1000 रिवॉल्वर का ऑर्डर दिया.

कैप्टन सैमुअल वॉकर
कोल्ट इस बात के लिए बदनाम है कि उसने नॉर्थ अमेरिका और साउथ अमेरिका के बीच सिविल वॉर का फायदा उठाया और दोनों को अपनी गन बेची. 4 जनवरी 1847 को उसने पहली बार USA को अपनी रिवॉल्वर बेची. बाद में जब USA को पता चला कि वो साउथ अमेरिका को भी हथियार बेच रहा है तो न्यू यॉर्क टाइम्स और न्यू यॉर्क डेली ट्रिब्यून ने उसे घुसपैठिया और दलाल तक लिखा.इस दौरान उसे ऑर्डर मिलते रहे. उसने एली व्हिटनी ब्लेक नाम के आदमी के साथ पार्टनरशिप की ताकि अच्छी क्वॉलिटी की रिवॉल्वर के साथ-साथ पिस्टल और राइफल्स भी बेची जा सकें. कोल्ट के पहले 1000 रिवॉल्वर के ऑर्डर को 'कोल्ट-वॉकर' कहा जाता था. इसके बाद कोल्ट को फिर से 1000 रिवॉल्वर का ऑर्डर मिला. पैसों की भरमार हुई तो उसने अपनी एक फैक्ट्री खोली. शुरू हुआ 'कोल्ट एरा' का अंत कोल्ट की कंपनी का नाम था Colt's Patent Fire-Arms Manufacturing Company. अब इसे Colt's Manufacturing Company कहा जाता है. इसने बाद में लाखों पिस्टल, रिवॉल्वर और राइफल बनाए और अब भी ये कंपनी काम कर रही है. माना जाता है कि अपने शुरुआती 25 सालों में कोल्ट की कंपनी ने 4 लाख रिवॉल्वर बनाए. राजाओं, अधिकारियों को गिफ्ट करने के लिए वो अलग से स्पेशल रिवॉल्वर बनवाता था, जिन पर कारीगरी की जाती थी.
अपनी मार्केटिंग करवाने के लिए उसने अखबारों के संपादकों को पैसे खिलाए और उसका काम ना रुके, इसके लिए अधिकारियों को जमकर घूस दी. हथियारों की मार्केटिंग के लिए तरह-तरह के स्टंट अपनाता था. उसने लंदन में जब हथियारों की दुकान खोली तो वहां बोर्ड लगाया ''Colonel Colt's Pistol Factory.'' ब्रिटिश अखबारों में ये खबर हेडलाइन में आ गई थी.
1856 को उसने एलिज़ाबेथ जारविस से शादी की और इस शादी में इन्हीं रिवॉल्वर और राइफल से फायरिंग की गई. एलिज़ाबेथ से शादी से पहले उसने एक और शादी की थी. कैरोलिन हेंशा से. इस शादी से उसे एक बेटा भी था.
कोल्ट बाद में अपने काम की वजह से डिप्रेशन में चला गया. इतनी मौतों की जिम्मेदार रिवॉल्वर बाद में उसे खुद नहीं सुहाती थी. अपराधबोध से भर गया. कई बीमारियां हो गईं. बाद में 1862 में 47 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई. जब उसकी मौत हुई तब वो अमेरिका के कुछ सबसे अमीर लोगों में एक था.
कोल्ट ने लोगों के हाथ में मौत का खिलौना थमा दिया. उसे इस बात का घमंड भी हुआ करता था. कहता था, ''मैंने सुना है कि भगवान ने लोगों को बनाया लेकिन सैमुएल कोल्ट ने लोगों को बराबर बनाया.''
ये स्टोरी निशांत ने की है.






















