The Lallantop

साइना नेहवाल का दिल तोड़ने वाला बयान

कोर्ट पर हिरणी-सी दौड़ने वाली सायना अपने पाले में चिड़िया गिरी देखकर 'अरे' कह कर रह जाती हैं.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop

ओलंपिक में जब सायना नेहवाल दूसरे ही मैच में हारकर बाहर हो गईं तब शायद ही किसी को कोई अनुमान था कि वो किसी बड़ी चोट से जूझ रही हैं. भारत वापसी पर घुटने की सर्जरी हुई और एक रूटीन खबर की तरह ये खबर भी आई-गई हो गई. इस दौरान ट्विटर पर कुछ लोगों ने मज़ाक भी उड़ाया कि अब तो सिंधू आपसे आगे आ गई हैं. लेकिन अब पता चला है कि सायना की चोट कोई साधारण चोट नहीं बल्कि करियर खत्म कर देनी वाली चोट है.  सायना नेहवाल के तीसरे ओलंपिक का सफर खत्म करने वाली चोट को देखकर डॉक्टर ने कहा था -  आप इस चोट के साथ खेल कैसे लीं ?

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

खेल बेवसाइट ईएसपीएन को एक इंटरव्यू में सायना नेहवाल ने बताया, ‘ये ठीक है, बहुत सारे लोगों को लगेगा कि मेरा करियर अब खत्म हो जाएगा और मैं कभी वापसी नहीं कर पाउंगी. दिल में कहीं गहरे मुझे भी ऐसा ही लगता है कि शायद ये मेरे करियर का अंत है, तो देखते हैं क्या होता है. शायद ये सब आप कभी नहीं जान सकते.’

यह चोट ठीक उस वक्त दिखी थी जब सायना को ओलंपिक कोर्ट पर उतरना था. सितंबर के आखिरी दिनों में, इस चोट की पीड़ रियो जाते वक्त भी हो रही थी, पहले मैच में भी हो रही थी. तो फिर खेल कैसे लीं? रियो से एक रात अपनी मां से चोट के बारे में बात करते हुए सायना ने कहा, 'ये इतना पीड़ादायी है, अब क्या होगा...'  सायना याद करते हुए बताती हैं उनकी मां का जवाब था, 'क्या हो गया, कुछ भी नहीं हुआ.' मां-पिता की ओर से इतना हौसला मिला कि वहां पहुंचने के बाद न खेलने का तो सवाल ही नहीं था.

Advertisement

सर्जरी के करीब एक महीने तक बिस्तर पर रहने के बाद सायना अब फिर वहीं हैं जहां उन्हें रहना पसंद है– बैडमिंटन कोर्ट पर. अभ्यास पर लौटकर सायना कोशिश कर रही हैं कि शरीर एक बार फिर ऐसा फिट हो जाए कि लगे कुछ भी नहीं हुआ है. लेकिन अब हर स्मैश के साथ घुटने का दर्द ज़ुबां पर आ जाता है, कोर्ट पर हिरणी-सी दौड़ने वाली सायना अपने सामने, अपने पाले में चिड़िया गिरी देखकर 'अरे' कह कर रह जाती हैं. लगातार वर्कआउट न करने की वजह से वजन भी कुछ बढ़ गया है. कुल मिलाकर जिस खेल में आपको सुपरफिट रहना पड़ता है उससे सायना फिलहाल अपने आपको बहुत दूर पा रही हैं. और दिमाग में संदेह उठ रहे हैं कि क्या फिर कभी वैसा खेल हो पाएगा ?

https://twitter.com/NSaina/status/767273692804046848?ref_src=twsrc%5Etfw

आजकल बैंगलोर में फिजियोथैरपिस्ट हीथ मैथ्यूज़ और अपने कोच यू. विमल कुमार के साथ वापसी की कोशिशों में लगी सायना कहती हैं, 'अगर लोगों को लगता है कि मेरा खेल खत्म हो चुका है तो मुझे बहुत खुशी होगी. लोग मेरे बारे में बहुत सोचते हैं, शायद अब ना सोचें. तो मेरे लिए फिलहाल शरीर का ध्यान रखना और फिट होना सबसे ज़रूरी है क्योंकि ये चोटें बहुत दर्द देती हैं. अगर मैं कोई टूर्नामेंट जीत भी जाऊं तो भी इस चोट की वजह से जो दर्द होता है उससे उतनी खुशी नहीं मिलेगी.'

26 वर्षीय सायना नेहवाल ने अपने रिटायरमेंट की ओर इशारा करते हुए तोक्यो ओलंपिक में खेलने की संभावना का भी एक ही सांस में जवाब दे दिया, 'मैं अब अगले एक साल के बारे में सोच रही हूं. मैं अगले 5-6 साल का कोई लक्ष्य लेकर नहीं चल रही.'

Advertisement

भारतीय बैडमिंटन की पहली ध्वजवाहिका सायना नेहवाल के शानदार करियर में कई ऐसी जीतें हैं जो पहली बार किसी भारतीय खिलाड़ी ने हासिल कीं. ओलंपिक में बैडमिंटन का पहला पदक लिया, नंबर बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं और ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में जाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं.  कुल मिलाकर इतना लंबा और सफल करियर तो हो गया है कि सायना नेहवाल पर कोई अच्छी-सी बायॉपिक बन जाए.

तो क्या हम सायना नेहवाल को कोर्ट पर फिर कभी नहीं देखेंगे ? फिलहाल सायना नेहवाल का पहला लक्ष्य है दर्द से छुटकारा पाना और ऐसी हालत में आना की बिना दर्द के खेल सके. उसके बाद कोर्ट पर उतरकर देखा जाएगा कि क्या उस स्तर का प्रदर्शन कर पा रही हैं जिससे इंटरनेशनल बैडमिंटन में दम दिखा सकें. और अगर आप वापसी की तारिख का आइडिया लगाने ही लगें तो दिसंबर में प्रीमियर बैडमिंटन लीग में सायना खेलती हुई दिख सकती हैं.

स्पोर्ट्स इंजरी साधारण चोट नहीं होती. हाथ टूट जाने पर पलसतर करके हाथ जुड़ जाएगा लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप अपने हाथ से उतना ही ज़ोरदार स्मैश लगा पाएंगे. ज़्यादा कोशिश करेंगे तो रहे-सहे हाथ से भी हाथ धोना पड़ता है. ऐसी चोटें ज़िंदगी तो नहींं रोकतीं लेकिन खेल खत्म कर देती हैं और इनका कोई इलाज़ भी नहीं होता. मिसाल के तौर पर कितने ही खिलाड़ियों ने एड़ी में दर्द की वजह से खेल छोड़ा है, साधारण-सा दर्द, जिसके लिए आप इंजेक्शन ले लें, रेडियो-थेरैपी से सेक लगवा लें, सर्जरी करवा लें, लेकिन जाता नहीं है और आपको खेलने भी नहीं देता. जिस खिलाड़ी ने अपनी सारी जवानी किसी खेल को दे दी उसकी सारी मेहनत ऐसी चोट के कारण तबाह हो जाए तो फिर आता है तनाव. स्पोर्ट्स साइकोलॉजी और स्पोर्ट्स इंजरी हाथों में हाथ लेकर चलती हैं. सायना नेहवाल की ये चोट तो दर्द और तनाव देने वाली है ही, साथ ही वो लोग इस खीझ को बढ़ाते हैं जो ट्विटर पर या और कहीं सिंधू से सायना की अज़ीबो-गरीब तरीके से तुलना करते हैं. कुछ लोगों के लिए एक नंबर वन नायिका है तो दूसरी नंबर दो. गोया हमें दो-दो चैंपियन देखने पसंद न हों. सायना का इशारा शायद इस ओर भी था.saina-tweet

Advertisement