अफ्रीका में बसा एक देश सोमालिया. समुद्र से लगा हुआ. भारत की तरफ देखता हुआ. अपने दौर में इस्लाम भी यहां आया और यहीं का होकर रह गया. वो देश जहां से सिर्फ डकैती और लूट की खबरें आती हैं. बाकी अफ़्रीकी देशों की तरह ये भी ब्रिटिश राज में ही रचा गया था. 1960 में ये देश बना. इसके बाद यहां लोगों का जीना मुश्किल हो गया. खुद के लोगों से की गयी जंग अभी भी जारी है.
राजधानी: मोगादिशु आबादी: 1.8 करोड़ (लगभग मुंबई की आबादी के बराबर) भाषा: सोमाली, अरबी, इटैलियन, इंग्लिश धर्म: सुन्नी इस्लाम
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Operation Worldब्रिटेन और इटली ने एक ही देश के दो कल्चर बना दिए, नतीजन सबने अपनी-अपनी सेना बना ली, देश का बंटाधार हो गया
सोमालिया के लोगों ने ब्रिटेन को चार बार वहां से भगाया था. पर बाद में ब्रिटेन का कब्ज़ा हो गया. नॉर्थ-ईस्ट और सेंट्रल सोमालिया में इटली का कब्ज़ा हो गया. द्वितीय विश्व-युद्ध ख़त्म होने के बाद यूएन ने दस साल की मोहलत दी थी इस एरिया में पॉलिटिकल सिस्टम डेवेलप करने के लिए. इटली के कब्जे वाले एरिया को इस चीज का अनुभव पहले ही हो गया था. पर ब्रिटिश एरिया वाले को पॉलिटिकल और इकॉनोमिक सिस्टम का बिल्कुल ही अनुभव नहीं था. और यही अंतर बाद में झगड़े का कारण बना. इन्हीं दो जगहें को मिलाकर सोमालिया देश बना. फ्रांस के कब्जे वाले ने अलग जिबौती नाम से देश बना लिया.1961 में सोमालिया में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संविधान सब कुछ बन गया. फिर भी एक टेंशन बनी रहती थी. लगता था कि कुछ होने वाला है. छोटा सा देश है फिर भी नॉर्थ, साउथ, वेस्ट, ईस्ट का झंझट बना रहता था. 1969 में सोमालिया के प्रेसिडेंट अब्दी राशिद अली की उनके बॉडीगार्ड ने गोली मार हत्या कर दी.इसके सोमाली आर्मी ने टेकओवर कर लिया मेजर जनरल सिअद बर्रे की लीडरी में. इसी के साथ लेफ्टिनेंट कर्नल केडीए ने पार्टी बना ली और खुद को 'क्रांति का पिता' घोषित कर दिया. बर्रे पार्टी का हेड बन गया. फिर पार्लियामेंट, सुप्रीम कोर्ट और संविधान सब भंग कर दिया गया. सब कुछ नेशनलाइज कर दिया गया. 1976 में तय हुआ कि सिर्फ यही पार्टी चुनाव लड़ेगी. कोई और नहीं. इस्लाम को हर चीज का आधार बनाया जाने लगा.
Reuters: सोमालिया का एक मिलिट्री ग्रुप
1977 में इथियोपिया से लड़ाई हो गयी. क्योंकि ब्रिटिश राज में एक जमीन दोनों देशों के बीच फंसी रह गयी थी. इस लड़ाई में रूस इथियोपिया के साथ आ गया और अमेरिका सोमालिया के साथ. धीरे-धीरे कोल्ड वॉर भी ख़त्म हो गया. और सोमालिया की अहमियत रूस और अमेरिका दोनों के लिए ख़त्म हो गयी. फिर सोमालिया में लोग मिलिट्री राज से एकदम परेशान हो गए थे. फिर मिलिट्री से रिटायर लोग भी काम ढूंढ रहे थे. सब अपनी-अपने सेना बनाने लगे. 7-8 सेनाएं बन गईं.
अकाल पड़ा, हजारों लोग मारे गए, इस्लाम में खोजा जाने लगा अस्तित्व
1982 में इसाक खानदान की नेतागिरी में नेशनल मूवमेंट हुआ और जवाब में मिलिट्री ने 50 हज़ार लोगों को ठोंक दिया. 7 लाख लोग देश छोड़कर इथियोपिया और जिबौती भाग गए. अमेरिका और रूस के हटने से बाहर से पैसा आना बंद हो गया. लड़ाई से इकॉनमी गिर गयी. बर्रे के हाथ से छत्ता निकल गया. उसे राजधानी मोगादिशु छोड़कर भागना पड़ा.उसी वक़्त देश में अकाल पड़ गया. अब स्थिति और ख़राब हो गई. अमेरिका और यूएन ने वहां फ़ूड प्रोग्राम शुरू किया. क्योंकि भयानक लूट-पाट मच गयी थी. पर इससे कुछ रुका नहीं. बल्कि अमेरिका के दो हेलिकॉप्टर मार गिराए गए. 1995 तक अमेरिका और यूएन दोनों सोमालिया छोड़ गए. नॉर्थ-वेस्ट सोमालिया ने खुद को अलग देश घोषित कर दिया. हालांकि अभी तक उसको मान्यता नहीं मिली है. पर वो ठीक-ठाक कंडीशन में है.
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फिर जब इतने मिलिट्री संगठन हैं, तो जंग होगी ही. मार-काट चलती रही. 2004 में जाकर अमेरिका की मदद से एक प्रेसिडेंट बने, पर सोमालिया की जनता ने नकार दिया. वहां पर अब इस्लामी संगठन का जन्म हो चुका था, जो अल-कायदा के संपर्क में था. और हज़ार साल पहले की सभ्यता में जीना चाहता था. जब कुछ नहीं हो रहा हो, तो लोग इतिहास में अपने आप को खोजने लगते हैं.
हजारों मौतों के बीच फिर सरकार बनी, समुद्री डाकू पैदा हुए और 2016 भी आया
2004-06 में ट्रांजिशनल फ़ेडरल गवर्नमेंट बनायी गयी. अंदाज़ा था कि स्थिति बदलेगी. एक अफ्रीकन यूनियन पीसकीपिंग मिशन भी रखा गया गवर्नमेंट की मदद के लिए. पर छोटे-छोटे मिलिट्री ग्रुप बहुत ज्यादा बढ़ गए थे. सेक्युलर वालों को अमेरिका सपोर्ट कर रहा था. और इस्लामी ग्रुप मिडिल ईस्ट से कॉन्टैक्ट में थे. ये मामला इतना गंभीर हो गया कि 2007 में 4 लाख लोग देश छोड़कर भागे. 2008-09 में मामला इतना बिगड़ गया कि सरकार ही टूट गयी और कई नयी सेनाएं बन गईं.2011 में फिर अकाल पड़ा और लाखों लोग भूखे मरने लगे. इसका जिम्मेदार एक सुन्नी आतंकी ग्रुप अल-शबाब था. इन लोगों ने देश में बाहर से आने वाले हेल्प को भी रोक दिया. इतना बुरा हाल हो गया कि लोग देश छोड़कर इथियोपिया, एरिट्रिया और केन्या भागने लगे. हर रोज 3 हज़ार लोग केन्या में घुसते थे. और वहां इनके लिए मसनद नहीं लगा हुआ था. वहां भी जिल्लत ही झेलनी पड़ती.इन्हीं हालात के बीच 2005-12 के बीच ही सोमालिया में समुद्री डाकू पैदा हुए. इंडिया की तरफ आने वाले जहाजों पर लूट-पाट करने लगे. इस चीज ने दुनिया में खलबली मचा दी. क्योंकि इस एरिया से व्यापार बहुत होता था. तभी सोमालिया को डाकुओं के देश के नाम से जाना जाने लगा. इसके बाद दुनिया के बड़े देशों ने इधर ध्यान देना शुरू किया. पॉलिटिकल सलूशन के लिए.
2012 में 45 साल बाद चुनाव हुए. अकैडमिक और सोशल एक्टिविस्ट हसन शेख मोहम्मद राष्ट्रपति बने. पर 2015 में इन्होंने भी सिक्यूरिटी का हवाला देते हुए अगले चुनाव की बात टाल दी. पर फिर भी सदियों बाद एक सेंट्रल गवर्नमेंट बनी है. और स्थिति फिर भी बहुत ठीक है.
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