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रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती कर कर्ज सस्ता करने का रास्ता साफ किया

जानिए रिजर्व बैंक के इस फैसले का आपको क्या नफा-नुकसान हो सकता है?

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रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास लगातार लोन सस्ता करने पर जोर देते रहे हैं. फाइल फोटो.
रिजर्व बैंक ने कर्ज सस्ता करने का रास्ता खोल दिया है. दो महीने के भीतर बैंक ने दोबारा रेपो रेट में कटौती का ऐलान कर किया है. रेपो रेट में एक चौथाई फीसदी यानी 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है. ये फैसला रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में लिया गया. बैठक में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास समेत कमेटी के 6 में से 4 सदस्यों ने रेट घटाने का समर्थन किया. शक्तिकांत दास के अलावा पमी दुआ, रविंद्र ढोलकिया और एम देवव्रत पात्रा ने भी रेट घटाने का समर्थन किया. 2 सदस्यों चेतन घटागे और विरल आचार्य ने रेट में कटौती का विरोध किया. सवाल-1- कटौती के बाद रेपो रेट कितनी हो गई है? रेपो में कटौती के बाद ये 6 फीसदी पर आ गया है. रिवर्स रेपो रेट भी घटकर 5.75 फीसदी पर आ गया है. रेपो रेट घटाने के अनुमान पहले से ही लगाए जा रहे थे. फरवरी, 2019 में भी रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती थी. इस तरह दो महीने के भीतर रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती हो चुकी है. सवाल-2- ये रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट होते क्या हैं? बैंक अपने रोज के खर्चों को चलाने के लिए RBI से पैसा उधार लेते हैं. बैंक जिस दर पर रिज़र्व बैंक से उधार लेते हैं, उसे रेपो रेट कहते हैं. और जब रोज के खर्चों के बाद बैंक के पास कुछ पैसा बचा रह जाता है, तो उसे वे फिर से रिज़र्व बैंक के पास रखते हैं. इसके बदले में रिज़र्व बैंक से बैंकों को ब्याज मिलता है. इसे ही रिवर्स रेपो रेट कहते हैं. सवाल-3- इससे आम आदमी को क्या फायदा? अब जान लीजिए इससे आप सबको क्या नफा-नुकसान होगा. 1-बैंकों के पास अब ज़्यादा कैश होगा. इससे वे लोगों को ज्यादा कर्ज दे सकेंगे. 2-आपके चल रहे मौजूदा लोन की ईएमआई यानी महीने की किस्त कम हो जाएगी. 3-ऑटो और होम लोन सस्ते होंगे. लोग घर खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी लेंगे. 4-कर्ज में दबी कंपनियों को राहत मिलेगी. उनकी भी किस्त कम हो जाएगी. 5-देश में निवेश की ज्यादा संभावनाएं बढ़ेंगी. निजी निवेशक ज्यादा पैसा सकते हैं. 6-बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आएगी. 7-औद्योगिक उत्पादन करने वाली कंपनियों को पूंजी जुटाने में आसानी होगी. 8-प्रधानमंत्री आवास योजना को बढ़ावा मिलेगा. लोग लोन लेने के लिए आगे आएंगे. योजना के तहत लोन की ब्याज दर में छूट दी जाती है. 9-महंगाई को कंट्रोल करने में सरकार को सहयोग मिलेगा, रिटेल और रियल एस्टेट बाजार को बल मिलेगा. सवाल-4- रेपो रेट कम होने का फायदा कैसे मिलेगा? पहली अप्रैल, 2019 से रिज़र्व बैंक ने ऑटो और होम पर लगने वाले ब्याज की व्यवस्था बदल दी है. अब ग्राहकों के लोन को सीधे रेपो रेट से जोड़ दिया गया है. मतलब ये कि रेपो रेट घटने पर बैंकों को लोन की ब्याज दर फौरन कम करनी होगी. छोटे कारोबारियों को दिए जाने वाले कर्ज पर भी यही व्यवस्था लागू होगी. अब तक बैंक खुद ही तय करते थे कि ब्याज दर कब बढ़ानी-घटानी है. अब इसे बदल दिया गया है. अभी बैंक मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट MCLR के आधार पर कर्ज देते हैं. अब आप कहेंगे ये MCLR क्या होता है. MCLR कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट यानी बैंकों के सारे खर्चे जोड़ने के बाद ग्राहकों के कर्ज की दर तय की जाती है. इसमें बैंक हर महीने MCLR रेट घोषित करते हैं. इसका कैलकुलेशन बैंक खुद करते हैं. इसलिए इसे पारदर्शी नहीं माना जाता है. नई व्यवस्था में बैंक रेपो रेट के आधार पर भी लोन की दर तय करेंगे. सवाल-5- रेपो रेट से क्यों जोड़ा गया है बैंकों के लोन को? अभी बैंक रेपो रेट बढ़ने पर ब्याज दर फौरन बढ़ा देते हैं. पर कम होने पर कर्ज सस्ता नहीं करते. इसके लिए पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने हर महीने MCLR तय करने की व्यवस्था लागू की थी. पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल भी कह चुके हैं कि बैंक रेपो रेट में कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं. इसीलिए रिज़र्व बैंक ने अब ये नई व्यवस्था लागू की है. मतलब ये कि अब आपके लोन को सीधे रेपो रेट से जोड़ दिया जाएगा. रेपो रेट घटने पर बैंकों को फौरन किस्त कम करनी होगी.
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