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शराब से दूर रहने का वचन नए सदस्यों से क्यों लेती है कांग्रेस पार्टी?

वो कौन सी और पार्टियां हैं, जिनका सदस्य बनने के लिए शराब छोड़ने और खादी पहनने की शर्त माननी पड़ती है?

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कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी को कांग्रेस की सदस्यता दिलाते राहुल गांधी (सांकेतिक फाइल तस्वीर. PTI)
26 अक्टूबर 2021. कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी के महासचिवों, प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों की एक बैठक हो रही थी. इस बैठक में अगले साल होने वाले 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले व्यापक स्तर पर सदस्यता अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया. ये अभियान 1 नवंबर 2021 से 31 नवंबर 2022 तक चलाया जाएगा. ये तो हो गई बात जिस पर मीटिंग के अंदर चर्चा हुई. बाहर मीटिंग के बारे में जिस चीज को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वो कुछ और ही थी. वो थी शराब. आइए बताते हैं क्यों. 'शराब कौन-कौन पीता है?' मीटिंग खत्म हुई तो सदस्यता अभियान के साथ साथ सदस्यता फॉर्म की भी चर्चा थी. आजतक की खबर के मुताबिक, मीटिंग के दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं से पूछा कि यहां मौजूद कितने लोग शराब पीते हैं? समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट बताती है कि राहुल के इस सवाल पर सिर्फ दो महासचिवों ने माना कि वो शराब पीते हैं. पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि उनके राज्य में अधिकांश लोग शराब पीते हैं. सिद्धू ने ये भी पूछा कि मौजूदा माहौल में कांग्रेस की सदस्यता की इस शर्त का पालन कैसे संभव है? जब इस मसले पर बाकी कांग्रेस नेताओं ने भी चर्चा शुरू कर दी, तब पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मामले को संभाला और बहस खत्म कराई.
अब आप सोच रहे होंगे कि राहुल गांधी ने ये सवाल क्यों पूछा? और इसका सदस्यता अभियान से क्या लेना-देना? तो इसका जवाब मिलता है देश की सबसे पुरानी पॉलिटिकल पार्टी के सदस्यता फॉर्म में. क्या शपथ लेनी पड़ती है? भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, जिसे हम कांग्रेस पार्टी के नाम से जानते हैं. इसका सदस्य बनने के लिए आवेदन करने वाले को ये भी घोषणा करनी पड़ती है कि वह शराब या किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करता है. ऐसा पार्टी के संविधान में लिखा गया है. कांग्रेस का सदस्य बनने के लिए और क्या-क्या करना पड़ता है, वो भी जान लीजिए.
इन नियमों को मानने वाला ही कांग्रेस पार्टी का सदस्य बनेगा. ऐसा पार्टी के संविधान में लिखा है.
इन नियमों को मानने वाला ही कांग्रेस पार्टी का सदस्य बनेगा. ऐसा पार्टी के संविधान में लिखा है.

कांग्रेस पार्टी का सदस्य होने के लिए आवेदक को घोषणा करनी पड़ती है कि-
आवेदक की उम्र 18 साल से अधिक है. आवेदक को प्रमाणित खादी पहनने की आदत है. आवेदक नशीले पदार्थों और एल्कोहल से दूर रहता है. आवेदक सामाजिक भेदभाव नहीं करता है और इसे मिटाने के लिए काम करने का वचन देता है. आवेदक धर्म और जाति के भेदभाव रहित एक सूत्र में बंधे समाज में विश्वास रखता है. आवेदक, कार्य समिति द्वारा निर्धारित न्यूनतम कार्यों को करने के लिए तैयार है जिसमें शारीरिक श्रम भी शामिल है. आवेदक के पास कानूनी तौर पर निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक कोई संपत्ति नहीं है. आवेदक धर्म निरपेक्षता, समाजवाद और लोकतंत्र के सिद्धांतों में विश्वास रखता है और इन्हें आगे बढ़ाने के लिए कार्य करता है. आवदेक पार्टी फोरम के अलावा कहीं भी, किसी भी प्रकार से, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पार्टी की स्वीकृत नीतियों और कार्यक्रमों का विरोध या आलोचना नहीं करेगा. आवेदक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी द्वारा स्वीकृत पत्रिका का नियमित ग्राहक बनेगा.
यानी कि कांग्रेस पार्टी की सदस्यता उसी को मिल सकती है जो शराब या दूसरे नशीले पदार्थों से दूर रहता हो. इसके अलावा वो खादी भी पहनता हो. ये नियम काफी पहले बनाए गए थे. जिनमें से कुछ का अक्षरश: पालन करना अब बहुत से लोगों के लिए मुश्किल है. आजतक की खबर के मुताबिक, मीटिंग में राहुल गांधी ने भी इस बात को माना. वैसे ये पहली बार नहीं है, जब राहुल गांधी ने सदस्तया फॉर्म में शराब से दूर रहने की शर्त का मुद्दा उठाया हो. पार्टी महासचिव बनने के बाद 2007 में जब वह पहली बार कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में शामिल हुए थे, तब भी उन्होंने इस पर सवाल उठाया था. अब चर्चा है कि सदस्यता अभियान शुरू होने से पहले इन दोनों नियमों को हटाया जा सकता है. हालांकि अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. सदस्यता फॉर्म में शराब कहां से आई? देश की सबसे पुरानी पॉलिटिकल पार्टी में ये नियम प्राचीन काल से चले आ रहे हैं. भले ही पालन न होते रहे हों. लेकिन नियम है. इंडिया टुडे के एक आर्टिकल में वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई ने लिखते हैं कि राहुल और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में पार्टी आखिरकार इस विचार के आसपास है कि नए सदस्यों के लिए फॉर्म से शराब का सेवन न करने की शर्त को हटा देना चाहिए. माना जाता है कि ये नियम महात्मा गांधी के समय में बनाए गए. किदवई लिखते हैं कि महात्मा गांधी का जोर शराब मुक्त कांग्रेस पर था. दिसंबर 1924 में उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष नामित किया गया था. करीब एक साल तक वह इस पद पर रहे. वह शराब सेवन के विरोधी थे. अपने कई लेखों में शराब के सेवन का विरोध करते नजर आते हैं. यंग इंडिया में वह लिखते हैं,
मैं शराब को चोरी और शायद वेश्यावृत्ति से भी अधिक हानिकारक मानता हूं. क्या यह अक्सर दोनों की वजह नहीं होता?
ये तो हो गई कांग्रेस की बात. अब आइए जान लेते हैं कि दूसरी पॉलिटिकल पार्टियों का सदस्य बनने के इच्छुक व्यक्ति को क्या-क्या शपथ लेनी पड़ती है.
BJP का मेम्बरशिप फॉर्म
BJP का मेम्बरशिप फॉर्म
भारतीय जनता पार्टी भारतीय जनता पार्टी का सदस्य बनने के लिए आवेदक को शपथ लेनी पड़ती है कि-
वह एकात्म मानववाद में यकीन करता है जो भारतीय जनता पार्टी का मूल दर्शन है.
वह राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता, लोकतंत्र, 'सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर और शोषण से मुक्त समतावादी समाज की स्थापना के लिए गांधीवादी दृष्टिकोण', सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता (सर्व धर्म सम भाव) और मूल्य आधारित राजनीति के लिए प्रतिबद्ध है.
वह धर्मनिरपेक्ष राज्य और राष्ट्र की अवधारणा को मानता है जो धर्म पर आधारित नहीं है.
उसका दृढ़ विश्वास है कि यह कार्य केवल शांतिपूर्ण तरीकों से ही पूर्ण किया जा सकता है.
वह जाति, लिंग, या धर्म के आधार पर भेदभाव में विश्वास नहीं करता.
वह किसी भी प्रकार से या किसी भी रूप में छुआछूत को नहीं मानता.
वह किसी दूसरे राजनीतिक दल का सदस्य नहीं है.
CPI (M) का सदस्य बनने के लिए ये शपथ लेना पड़ता है.
CPI (M) का सदस्य बनने के लिए ये शपथ लेनी पड़ती है.
कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) CPI(M) में शामिल होने वाला व्यक्ति शपथ लेता है कि-
वह पार्टी के उद्देश्यों और लक्ष्यों को स्वीकार करता है. इसके संविधान का पालन करने और पार्टी के निर्णयों को निष्ठापूर्वक पूरा करने के लिए सहमत है.
वह साम्यवाद के आदर्शों पर खरा उतरने का प्रयास करेगा और निस्वार्थ भाव से मजदूर वर्ग और मेहनतकश जनता और देश की सेवा करेगा.
# वह हमेशा पार्टी और लोगों के हितों को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखेगा.
समाजवादी पार्टी का सदस्य बनने के लिए जरूरी नियम
समाजवादी पार्टी का सदस्य बनने के लिए जरूरी नियम
समाजवादी पार्टी समाजवादी पार्टी के संविधान की धारा-5 के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के संविधान की धारा-2 में विश्वास रखने वाला व्यक्ति पार्टी का प्रारंभिक सदस्य बन सकता है. शर्त बस यह है कि वह वह अन्य किसी राजनैतिक एवं साम्प्रदायिक दल जिसकी पृथक सदस्यता, पृथक संविधान एवं पृथक कार्यक्रम हो, का सदस्य न हो.
समाजवादी पार्टी सदस्यता फॉर्म (बाएं) और पार्टी संविधान की धारा-2 (दाएं)
समाजवादी पार्टी सदस्यता फॉर्म (बाएं) और पार्टी संविधान की धारा-2 (दाएं)

हालांकि समाजवादी पार्टी के संविधान की धारा-35 कहती है कि समाजवादी पार्टी के समस्त सदस्यों के लिए खादी/हैंडलूम के वस्त्र पहनना अनिवार्य है तथा सम्बद्ध प्रकोष्ठों, समाजवादी युवजन सभा, लोहिया वाहिनी, मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड व समाजवादी छात्र सभा के सभी स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए निर्धारित पोशाक पहनना अनिवार्य है.
राजद सक्रिय सदस्यता फॉर्म (दाएं) और प्राथमिक सदस्यता फॉर्म (बाएं)
राजद सक्रिय सदस्यता फॉर्म (दाएं) और प्राथमिक सदस्यता फॉर्म (बाएं)
राष्ट्रीय जनता दल राजद की सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को ये शपथ लेनी पड़ती है कि वह जाति-धर्म के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव में विश्वास नहीं रखता. वह साम्प्रदायिक सद्भाव में विश्वास करता है और सभी धर्मों का आदर करता है. पार्टी की प्रारंभिक सदस्यता लेने के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को ये शपथ लेनी पड़ती है कि वो खादी को बढ़ावा देने और नशाबंदी में विश्वास रखता है. जबकि पार्टी का सक्रिय सदस्य बनने के लिए आवेदक का मादक पेय और औषधियों के प्रयोग से दूर रहना अनिवार्य है. पार्टी के सदस्यता फॉर्म में इस बात का उल्लेख स्पष्ट रूप से है.

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