राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. क्या उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है? क्या हिरासत में लिए जाने से सांसद या नेता प्रतिपक्ष के विशेषाधिकारों का हनन नहीं होता? ये सवाल तब उठे जब दिल्ली में पीएम आवास के बाहर धरना दे रहे कांग्रेस नेता राहुल गांधी को हिरासत में ले लिया गया. उनके साथ वायनाड सांसद प्रियंका गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भी पुलिस उठा ले गई.
क्या पुलिस को राहुल गांधी को हिरासत में लेने का अधिकार है? कानून क्या कहता है?
राहुल गांधी को पीएम आवास के बाहर धरने के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद सांसदों के विशेषाधिकार और गिरफ्तारी के नियमों पर बहस छिड़ गई है. कानूनी जानकारों के मुताबिक, गंभीर कानून-व्यवस्था या आपराधिक मामलों में पुलिस बिना स्पीकर की पूर्व अनुमति के भी किसी सांसद को हिरासत में ले सकती है, हालांकि इसकी सूचना स्पीकर को देना जरूरी होता है.


ये लोग दिल्ली में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने धरने पर बैठे राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बन पाई.
अब राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने के बाद सांसदों के विशेषाधिकार पर बहस शुरू हो गई है. सवाल उठे कि किसी सांसद के लिए उसके विशेषाधिकार कब ‘कवच’ बनते हैं? सांसदों को गिरफ्तारी के लिए क्या पुलिस को कोई स्पेशल प्रसीजर फॉलो करना होता है या आम लोगों की तरह वह नेता प्रतिपक्ष तक पर कार्रवाई कर सकती है? क्या सांसदों को किसी मामले में गिरफ्तारी से छूट मिलती है? या उनकी गिरफ्तारी या हिरासत को लेकर किसी तरह की ‘रोकटोक’ की व्यवस्था है?
इंडिया टुडे के लिए संजय शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के वकील और कानून के जानकार आरके सिंह से इसका जवाब मांगा. उन्होंने बताया कि पुलिस ऐसे किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकती है जिसकी वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो. आरके सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास जैसे अति संवेदनशील इलाके में दल-बल के साथ बिना इजाजत धरना प्रदर्शन करना पुलिस के लिए गंभीर मामला है. इसके लिए जिम्मेदार कोई भी नेता हो, उसे हिरासत में लिया जा सकता है.
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क्या सांसदों को हिरासत में लिया जा सकता है?वकील बताते हैं कि इस स्थिति में कानून साफ हैं. किसी भी सांसद को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार करने या हिरासत में लेने के लिए लोकसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर की पहले से अनुमति लेने की कोई जरूरत नहीं होती है. संसदीय विशेषाधिकार और गिरफ्तारी के नियम में भी आपराधिक और दीवानी मामलों यानी सिविल केसेज में अंतर साफ है. हत्या, भ्रष्टाचार, दंगा या अन्य गंभीर अपराध होने पर पुलिस को किसी सांसद को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने के लिए स्पीकर की अनुमति नहीं चाहिए. हालांकि, गिरफ्तारी के बाद इसकी सूचना लोकसभा स्पीकर को तुरंत देना जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा होती है.
नियम यह भी है कि संसद का सत्र चल रहा हो तो इसके शुरू होने के 40 दिन पहले और समाप्त होने के 40 दिन बाद तक किसी भी सांसद को दीवानी मामलों में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. संसद भवन परिसर के अंदर के नियमों में भी यह साफ है कि लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति के बिना संसद भवन के अंदर किसी भी सांसद को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. न ही कोई कानूनी समन या नोटिस दिया जा सकता है.
अगर कोई विरोध प्रदर्शन या हिरासत की कार्रवाई संसद परिसर के बाहर सार्वजनिक स्थलों पर होती है तो पुलिस आम नियमों के तहत कार्रवाई कर सकती है. पुलिस को ऐसी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है.
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