इंगलैंड के एक रेड लाइट एरिया में वेश्याओं के हक़ में करने वाली जैकी फेयरबैंक्स ने न्यूज साइट 'हल डेली मेल' से बात करते हुए वहां की वेश्याओं के जीवन के बारे में कई बातें बताईं.
कमाठीपुरा भारत का दूसरा सबसे बड़ा रेड लाईट एरिया है. (सांकेतिक फ़ोटो)इनमें से कई औरतों के साथ बचपन में शारीरिक और मानसिक शोषण हुआ था. हिंसा इनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा रहा है. इनमें से कई औरतें बेघर हैं. कई औरतों को मानसिक तकलीफें हैं. स्वास्थ्य खराब रहता है. क्योंकि इन्हें इनके बॉयफ्रेंड या दलाल ने इन्हें झांसा देकर यहां भेज दिया होता है.
फेयरबैंक्स के मुताबिक़ वेश्याएं गरीबी के मारे छोटी-छोटी जरूरतों के लिए काम करती हैं. एक वेश्या एक दिन इसलिए धंधे पर निकली क्योंकि उसे अपनी वॉशिंग मशीन सही करवाना थी.हममें से कुछ लोग 'वेश्या' शब्द को गाली की तरह इस्तेमाल करते हैं. कुछ लोग वॉशिंग मशीन सही करवाने के लिए देह बेचने को अनैतिक मान सकते हैं. कह सकते हैं कि पश्चिमी देशों में ऐसा होता है. मगर भारत की स्थिति कुछ अलग नहीं है. गरीबी इन वेश्याओं से क्या कुछ नहीं करवाती. सामाजिक कार्यकर्ता और दी लल्लनटॉप के रीडर अमित कुमार ने भारतीय वेश्याओं पर एक लेख में लिखा था:
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